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Aviation: उत्तर भारत में पहली बार बनेगा विमान इंजन टेस्टिंग केंद्र, ब्रिटिश कंपनी के साथ मिलकर परियोजना शुरू

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Riya Dubey Updated Mon, 13 Apr 2026 02:01 PM IST
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सार

उत्तर भारत में पहली बार अत्याधुनिक प्रोपल्शन टेस्टिंग सुविधा स्थापित करने की दिशा में भारत ने यूके की कंपनी के साथ मिलकर बड़ा कदम उठाया है। टीडीबी ने गुरुग्राम की केसी एविएशन के साथ BE-JTO परियोजना शुरू की है।

For the first time in North India, a dedicated aircraft engine testing center will be set up
विमानन क्षेत्र - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

भारत में उन्नत विमानन तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (TDB), विज्ञान व प्रौद्योगिकी विभाग (DST) ने गुरुग्राम स्थित केसी एविएशन प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। यह समझौता बूस्ट इलेक्ट्रिक जंप टेक-ऑफ (बीई-जेटीओ) परियोजना के तहत किया गया है, जिसे भारत-यूके इंडस्ट्रियल सस्टेनेबिलिटी सहयोग कार्यक्रम के अंतर्गत यूके की एआरसी एयरोसिस्टम्स लिमिटेड के साथ मिलकर विकसित किया जाएगा।

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परियोजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इस परियोजना के लिए टीडीबी ने सशर्त अनुदान स्वीकृत किया है। इसका मुख्य उद्देश्य हाइब्रिड प्रोपल्शन आधारित जंप टेक-ऑफ (JTO) सिस्टम विकसित करना है, जिससे ड्रोन और हल्के विमानों की उड़ान क्षमता और संचालन में बड़ा सुधार हो सके। यह तकनीक कम दूरी या लगभग वर्टिकल टेक-ऑफ की सुविधा देगी, जिससे दुर्गम और दूरदराज इलाकों में भी आसानी से संचालन संभव होगा।

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उत्तर भारत में एक अत्याधुनिक टेस्ट-बेंच सुविधा स्थापित की जाएगी

परियोजना के तहत उत्तर भारत में एक अत्याधुनिक टेस्ट-बेंच सुविधा स्थापित की जाएगी, जहां रोटरक्राफ्ट प्रोपल्शन सिस्टम का परीक्षण और अनुकूलन किया जाएगा। यह सुविधा न केवल कंपनी के लिए बल्कि स्टार्टअप्स और अन्य डेवलपर्स के लिए भी उपयोगी साबित होगी, जो एडवांस्ड एरियल मोबिलिटी और ड्रोन तकनीक पर काम कर रहे हैं।

तकनीक का इस्तेमाल किन-किन क्षेत्रों में किया जाएगा?

इस तकनीक के इस्तेमाल से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, आपदा राहत, मेडिकल इवैक्यूएशन, ड्रोन लॉजिस्टिक्स और निगरानी जैसे क्षेत्रों में बड़े बदलाव की उम्मीद है। खासकर उन इलाकों में जहां पारंपरिक विमान संचालन मुश्किल होता है, वहां यह तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

टिकाऊ विमानन समाधान को मिलेगा बढ़ावा

टीडीबी के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए इस तरह के अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रम रणनीतिक क्षेत्रों में नई तकनीकों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बताया कि हाइब्रिड प्रोपल्शन और एडवांस टेक-ऑफ सिस्टम भारत की ड्रोन और क्षेत्रीय हवाई सेवाओं की क्षमता को मजबूत करेंगे और टिकाऊ विमानन समाधान को बढ़ावा देंगे।

वहीं, केसी एविएशन के प्रमोटर्स ने इस सहयोग के लिए सरकार का आभार जताया और कहा कि इस परियोजना से उनकी तकनीक को वास्तविक परिस्थितियों में परीक्षण का अवसर मिलेगा, जिससे भविष्य के लिए स्केलेबल और उन्नत विमानन समाधान विकसित करने में तेजी आएगी।
 

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