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फैक्टरी कर्मियों की मांगें क्यों बदली प्रदर्शन में: नोएडा में क्यों भड़का आक्रोश, बीते हफ्ते क्या थे घटनाक्रम?

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: Kirtivardhan Mishra Updated Mon, 13 Apr 2026 02:48 PM IST
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सार

नोएडा में बीते चार दिनों से फैक्टरी कर्मियों के वेतन बढ़ोतरी की मांग वाले प्रदर्शन सोमवार को अचानक उग्र हो गए। इस दौरान अलग-अलग मांगों को सामने रखते हुए कर्मचारियों ने जगह-जगह धरना दिया और कुछ जगहों पर उनका पुलिस से भी टकराव हुआ। इसके चलते प्रदर्शन उग्र हो गए। कई जगहों पर गाड़ियों में आग लगाए जाने और पत्थरबाजी की खबरें हैं।

UP Noida Factory Workers Protest Turns violent know the minimum wage demand Working Condition Bonus Payment
नोएडा में फैक्टरी कर्मियों का प्रदर्शन। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में सोमवार को स्थिति अचानक नाजुक हो गई। दरअसल, उत्तर प्रदेश के नोएडा में कर्मचारियों की तरफ से न्यूनतम वेतन को बढ़ाने की मांग को लेकर जारी प्रदर्शन अचानक उग्र हो उठे। स्थिति यह हो गई कि प्रशासन को स्थिति को संभालने के लिए पुलिस बल को उतारना पड़ा। इतना ही नहीं नोएडा की जिलाधिकारी मेधा रूपम को भी प्रदर्शनकारियों से शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील करनी पड़ी। साथ ही उन्होंने कर्मचारियों के हितों को लेकर भी कंपनियों और उद्योगों को श्रम कानूनों का सही ढंग से पालन करने का निर्देश दे दिया। 
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दिल्ली-एनसीआर और खासकर नोएडा में अचानक भड़के इन प्रदर्शनों के बीच अब तक यह साफ नहीं है कि आखिर कर्मचारी किस बात को लेकर नाराज हैं? उनकी शिकायतें क्या-क्या हैं? हरियाणा के किस एक फैसले को लेकर यूपी के इस औद्योगिक शहर में भी हिंसक प्रदर्शन भड़क उठे? बीते दो-तीन दिनों में इसे लेकर राज्य में किस तरह स्थितियां बदली हैं? और आखिर में श्रम कानून के तहत फैक्टरियों और उद्योगों के लिए कर्मचारियों को किस तरह की सुविधा मुहैया कराना जरूरी है? आइये जानते हैं...
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पहले जानें- नोएडा में कर्मचारियों की क्या हैं शिकायतें?

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में निजी कंपनियों (खासकर परिधान निर्यात इकाइयों) के कर्मचारियों के उग्र प्रदर्शन के बीच अमर उजाला ने प्रदर्शनकारी कर्मियों से बात भी की। इसमें सामने आया कि यूपी में फैक्टरियों की तरफ से कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम दिया जा रहा है। उनकी नाराजगी के मुख्य कारण वेतन में भारी असमानता और खराब कामकाजी परिस्थितियां हैं, वह भी ऐसे समय में जब महंगाई दर में तेज बढ़ोतरी हुई है। 

ये भी पढ़ें: UP: तोड़फोड़, आगजनी, पत्थरबाजी और जाम, उग्र लोगों ने पुलिस की गाड़ी भी फूंकी, नोएडा में वेतन की मांग पर आक्रोश

कर्मचारी बढ़ती लागत और एलपीजी सिलेंडर जैसी जरूरी चीजों के महंगे होने से आर्थिक रूप से परेशान हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदर्शन के शुरुआती दिनों में जब पुलिस ने अधिकारियों से बातचीत कराने का वादा किया था, तब अधिकारियों के न पहुंचने से कर्मचारियों का गुस्सा और भड़क गया।

इस बीच जब प्रशासन ने प्रदर्शनों के बीच किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिसबल की तैनाती की तो प्रदर्शनकारियों का पुलिसकर्मियों से भी आमना-सामना हो गया। इसके बाद स्थिति और ज्यादा तनावपूर्ण और हिंसक हो गई। कुछ जगहों पर गाड़ियों में आगजनी की खबरें हैं। इनमें एक पुलिस जीप फूंके जाने की भी खबर सामने आई है। 

कर्मचारियों की प्रमुख शिकायतें और मांगें

समान वेतन: कर्मचारियों की मुख्य मांग है कि उनका वेतन बढ़ाकर बेहतर किया जाए। अधिकतर कर्मचारियों ने कहा है कि हरियाणा में हाल ही में कर्मचारियों के वेतन में करीब 35 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। ऐसी ही कुछ मांग अब यूपी में भी की जा रही है। 

ओवरटाइम और बोनस: कर्मचारियों की मांग है कि फैक्टरी और उद्योगों से नए श्रम कानूनों के तहत अतिरिक्त काम करने पर दोगुनी दर से भुगतान सुनिश्चित कराया जाए और नियमानुसार बोनस सीधे उनके बैंक खातों में जमा किया जाए।

समय पर वेतन और सैलरी स्लिप: कर्मियों ने यह भी कहा है कि हर महीने की 10 तारीख तक कर्मचारियों को उनका वेतन दे दिया जाए और सभी को अनिवार्य रूप से सैलरी स्लिप मिलनी चाहिए। यानी श्रम कानून के एक और नियम का कड़ाई से पालन हो। कर्मचारियों की एक बड़ी शिकायत यह भी है कि उनके वेतन से मनमाफिक कटौती की जाती है, जिस पर रोक लगनी चाहिए।

साप्ताहिक अवकाश: कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें हफ्ते में एक दिन का अवकाश सुनिश्चित किया जाए, और अगर छुट्टी के दिन काम कराया जाता है, तो उस दिन का दोगुना भुगतान किया जाए। कर्मियों की शिकायत है कि अधिकतर फैक्टरियां और उद्योग इस नियम का पालन नहीं करते। 

ये भी पढ़ें: सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर नोएडा में कर्मचारियों का प्रदर्शन, देखें क्या बोले प्रदर्शनकारी?

बेहतर कार्यस्थल सुरक्षा: कार्यस्थल पर बेहतर और सुरक्षित कामकाजी परिस्थितियों को लेकर भी फैक्टरी कर्मियों ने गुस्सा जाहिर किया है। उनका कहना है कि कंपनियां न तो श्रम कानून के तहत आने वाले फैक्टरी अधिनियम, 1948 का पालन कर रही हैं और न ही वे न्यूनतम मानदेय अधिनियम, 1948 को ही मान रही हैं। 

अपनी इन्हीं अधूरी मांगों और शिकायतों के समाधान के लिए हजारों कर्मचारी सड़कों पर उतरे हैं, जिसके कारण प्रदर्शन ने आगजनी, पथराव और हिंसक रूप ले लिया है।

हरियाणा के किस एक फैसले से यूपी में कर्मी सड़कों पर उतरे?

हरियाणा सरकार ने इसी महीने की 10 तारीख को एक नोटिफिकेशन जारी किया। इसमें फैक्टरी-उद्योगों से जुड़े कर्मियों के न्यूनतम वेतन में 35% की बढ़ोतरी करने का फैसला किया गया। इस फैसले से हरियाणा में कर्मचारियों का मासिक वेतन काफी बढ़ा है। जहां अकुशल कर्मियों को अब लगभग 11,274 रुपये से बढ़कर 15,220 रुपये मिल रहे हैं, तो वहीं कुशल कर्मियों को 13 हजार के मुकाबले करीब 18 हजार और उच्च-कौशल वाले कर्मियों को 14 हजार की जगह 19 हजार के करीब वेतन मिल रहा है।

इसके उलट उत्तर प्रदेश में कर्मियों का न्यूनतम वेतन अभी भी काफी कम- करीब 11,313 रुपये (अकुशल कर्मी) से लेकर 13,940 रुपये (कुशल कर्मी के लिए) है।  

दैनिक वेतन के मामले में भी नोएडा में जहां 435-536 रुपये के बीच मिलते हैं, तो वहीं हरियाणा के गुरुग्राम और मानेसर में यह करीब 585 रुपये 747 रुपये प्रतिदिन तक पहुंचा दिया गया है। वेतन में इस भारी अंतर की वजह से ही नोएडा के कर्मचारियों में भारी असंतोष फैल गया और वे हरियाणा के कर्मचारियों के समान वेतन की मांग करते हुए उग्र प्रदर्शन करने लगे। कर्मियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच मौजूदा वेतन में गुजारा करना बेहद मुश्किल हो रहा है। इसके अलावा प्रदर्शनों की यह आग राजस्थान के भिवाड़ी में भी फैल गई, जहां कर्मचारियों ने कम वेतन को लकेर अपने गुस्से का इजहार किया। 



चौंकाने वाली बात यह है कि हरियाणा में भी कुछ दिन पहले कर्मचारियों ने कुछ इसी तरह प्रदर्शन किए थे, जिसके बाद राज्य सरकार ने न्यूनतम वेतन बढ़ाने को लेकर नोटिफिकेशन जारी किया। इसके बावजूद सोमवार को पलवल और फरीदाबाद के कई फैक्टरी कर्मी यह कहते हुए सड़कों पर उतर आए हैं कि उन्हें अपने फैक्टरी मालिकों से वेतन बढ़ाने को लेकर कोई संस्तुति नहीं मिली है। 

बीते दो-तीन दिनों में इसे लेकर राज्य में किस तरह स्थितियां बदली हैं?

ऐसा नहीं है कि नोएडा में फैक्टरी कर्मियों का प्रदर्शन अचानक ही शुरु होते हुए हिंसक हो उठा है, बल्कि इसे लेकर बीते तीन-चार दिनों से धरने और बातचीत का दौर जारी था। आइये जानते हैं इन बीते दिनों के घटनाक्रम...

1. शुक्रवार और शनिवार: शुरुआती प्रदर्शन और तनाव
  • शुक्रवार को करीब 1,000 संविदा कर्मचारियों ने नोएडा के होजरी कॉम्प्लेक्स (फेज 2) में समान वेतन की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू किया और कुछ देर के लिए यातायात बाधित किया।
  • सैकड़ों कर्मचारी सड़कों पर उतर आए। शांतिपूर्ण विरोध के तौर पर शुरू हुआ प्रदर्शन जल्द ही हंगामे में बदल गया। कर्मचारियों ने सूरजपुर-दादरी रोड पर बैठकर चक्का जाम कर दिया। इस बीच पत्थरबाजी की घटना सामने आई, जिसके जवाब में पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। 
  • शनिवार शाम को श्रम विभाग के लिखित आश्वासन के बाद कर्मचारियों ने प्रदर्शन को धीमा करने का फैसला किया। इस बीच राजधानी लखनऊ में सीएम योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। इसमें औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों की समस्याओं और उनके हालिया प्रदर्शनों का संज्ञान लिया। अफसरों को निर्देशित किया कि औद्योगिक संगठनों, उद्योग प्रतिनिधियों और इकाई प्रबंधन से बात करके 24 घंटे में उनकी समस्याओं का समाधान करें। 

2. रविवार: प्रशासनिक बैठक और नए दिशा-निर्देश
  • रविवार को नोएडा की डीएम, प्रमुख सचिव (श्रम) और श्रमायुक्त ने उद्योग प्रतिनिधियों और कर्मचारियों के साथ बैठक की।
  • प्रशासन ने तनाव कम करने के लिए कर्मचारियों के पक्ष में कई कड़े निर्देश जारी किए, जिनमें हर महीने की 10 तारीख तक वेतन देना, ओवरटाइम का दोगुना पैसा देना, साप्ताहिक अवकाश सुनिश्चित करना और सभी को अनिवार्य रूप से सैलरी स्लिप देना शामिल था। साथ ही एक समर्पित कंट्रोल रूम भी बनाया गया।

3. सोमवार: आंदोलन का उग्र और हिंसक रूप
  • रविवार को मिले आश्वासनों के बावजूद, सोमवार को हजारों की संख्या में कर्मचारी नोएडा और ग्रेटर नोएडा के कई औद्योगिक क्षेत्रों (फेज-2, सेक्टर 60, और सेक्टर 84) में सड़कों पर उतर आए। 
  • कर्मियों की शिकायत है कि प्रशासन की तरफ से उनकी कई मांगों पर विचार किए जाने के बावजूद अब तक वेतन बढ़ाने पर कोई फैसला नहीं हुआ है। इसके अलावा कई फैक्टरी और उद्योगों की तरफ से अब तक उन्हें प्रशासनिक आदेशों की स्वीकार्यता की बात नहीं पता चली है। इसके चलते हजारों की संख्या में कर्मचारी सड़कों पर हैं।
  • पिछले तीन दिनों से चल रहे धरने ने सोमवार को हिंसक रूप ले लिया। प्रदर्शनकारियों ने जमकर पत्थरबाजी की, कंपनियों में तोड़फोड़ की और पुलिस की गाड़ियों के साथ-साथ कई अन्य वाहनों को भी पलटकर आग के हवाले कर दिया।
  • इस बवाल और आगजनी के कारण गौतमबुद्धनगर के कई इलाकों में भारी ट्रैफिक जाम लग गया, जिससे दफ्तर जाने वाले लोगों को काफी परेशानी हुई। कई सड़कों पर कार-बाइकों का काफिला फंसा नजर आया। राष्ट्रीय राजमार्ग 9 पूरी तरह जाम हो गया है। एनएच 9 पर बड़ी संख्या में कर्मचारी जुटे हैं।
  • स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग भी करना पड़ा है। 
  • प्रदर्शनकारियों ने एक कंपनी के पास करीब चार गाड़ियों को आग के हवाले किया। पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर प्रदर्शनकारी मजदूरों को तितर-बितर किया। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने पुलिस की गाड़ी को पलट दिया और उसमें आग लगा दी। उन्होंने पथराव भी किया।

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