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तमिलनाडु: चुनाव प्रचार के सिर्फ नौ दिन बाकी, अब तक नहीं हुई राहुल की एंट्री; DMK-कांग्रेस गठबंधन पर उठे सवाल

आईएएनएस, चेन्नई Published by: Himanshu Singh Chandel Updated Mon, 13 Apr 2026 04:07 PM IST
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सार

Tamil Nadu Elections 2026: तमिलनाडु चुनाव के अंतिम चरण में राहुल गांधी की प्रचार में भागीदारी को लेकर बनी अनिश्चितता ने डीएमके-कांग्रेस गठबंधन की रणनीति को प्रभावित किया है। सलेम रैली से पहले उनकी अनुपस्थिति की आशंका ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। दोनों दलों के बीच तालमेल को लेकर सवाल उठ रहे हैं। 

Tamil Nadu election DMK Congress alliance coordination Rahul Gandhi participation in campaign uncertainty
राहुल गांधी, नेता कांग्रेस - फोटो : ANI
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विस्तार

तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के लिए 23 अप्रैल को मतदान होना है। अब राजनीतिक दलों के पास प्रचार के लिए सिर्फ नौ दिन ही बाकी है। ऐसे में सभी दल पूरी ताकत के साथ रैलियां और रोड शो कर रहे हैं। फिर चाहे वो टीवीके प्रमुख विजय हो या फिर डीएमके प्रमुख स्टालिन। सभी चुनाव में पूरी ताकत झोंक रहे हैं। इस चुनाव में डीएमके का कांग्रेस के साथ गठबंधन है। लेकिन इस गठबंधन पर अब सवाल उठ रहे हैं। इसका कारण है राहुल गांधी की रैली। 
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दरअसल, जिस भी प्रदेश में कांग्रेस गठबंधन के साथ चुनाव लड़ती है। वहां कई बड़े नेताओं समेत राहुल गांधी भी खुद जाते हैं। रैलियों में हिस्सा लेते हैं। रोड शो करते हैं। चुनाव पर इसका काफी असर भी पड़ता है। लेकिन तमिलनाडु चुनाव में अभी तक राहुल गांधी की एंट्री नहीं हुई। इसे लेकर ही कई लोगों के भीतर कई सवाल उठने लगे।
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क्या सवाल उठ रहे?
कई चुनावी चाणक्यों को लगता है कि दोनों पार्टियों में सीट बंटवारे के बाद खटास आ गई है। वहीं, कुछ का मानना है कि राहुल गांधी का चुनाव के आंतिम समय में आ सकते हैं। इससे आखिरी समय में चुनावी माहौल डीएमके-कांग्रेस गठबंधन की ओर मुड़ सकता है। हालांकि अभी तक राहुल गांधी की मौजूदगी को लेकर अभी तक कोई स्पष्टता नहीं है। इससे पार्टी नेतृत्व के भीतर चिंता बढ़ गई है।

राहुल गांधी की मौजूदगी क्यों अहम?
सूत्रों के अनुसार, डीएमके नेताओं को डर है कि अगर राहुल गांधी रैली में शामिल नहीं होते हैं तो इससे गठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठ सकते हैं। चुनाव के अंतिम दौर में एकजुटता का प्रदर्शन बेहद जरूरी होता है। ऐसे में उनकी गैर-मौजूदगी विपक्ष को हमला करने का मौका दे सकती है। लोगों में आसानी से कई तरह के नैरेटिव फैलाए जा सकते हैं। इसका खामियाजा कांग्रेस और डीएमके के प्रत्याशियों को भुगतना पड़ सकता है। ऐसे में मजबूती से चुनाव लड़ने के लिए राहुल की मौजूदगी अहम है।

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क्या कांग्रेस-डीएमके के बीच तालमेल में कमी?
गठबंधन के भीतर तालमेल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस और डीएमके के बीच सीट बंटवारे के दौरान पहले भी मतभेद सामने आए थे। हालांकि बाद में समझौता हो गया, लेकिन अब राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर अस्पष्टता ने फिर से समन्वय की कमी की चर्चा तेज कर दी है।

जब साथ दिखे थे स्टालिन और राहुल गांधी
हाल के हफ्तों में राहुल गांधी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एसके स्टालिन एक साथ मंच साझा करते कम ही दिखे हैं। पुदुचेरी में दोनों एक ही दिन मौजूद थे, लेकिन साथ में रैली नहीं की। चेन्नई और कोयंबटूर के दौरों में भी दोनों नेताओं के संयुक्त कार्यक्रम नहीं हुए, जिससे राजनीतिक गलियारों में अटकलें और तेज हो गई हैं।

कांग्रेस के अंदर भी राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर एक राय नहीं दिख रही है। कुछ नेता कह रहे हैं कि वे जल्द ही प्रचार में शामिल होंगे, जबकि अन्य नेता इस पर स्पष्ट जवाब देने से बच रहे हैं। इससे स्थिति और उलझ गई है और कार्यकर्ताओं के बीच भी असमंजस बना हुआ है।


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