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Supreme Court: तीस्ता सीतलवाड़ के पासपोर्ट पर अदालत सख्त, तीन जजों की बेंच को भेजी याचिका, जानें पूरा मामला

Mon, 13 Apr 2026 04:52 PM IST
Himanshu Singh Chandel पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Himanshu Singh Chandel Updated Mon, 13 Apr 2026 04:52 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने तीस्ता सीतलवाड़ के पासपोर्ट रिलीज से जुड़े मामले को तीन जजों की बेंच को भेज दिया है। यह मामला 2002 गुजरात दंगों से जुड़े कथित फर्जी दस्तावेज केस से जुड़ा है। कोर्ट ने पहले उन्हें जमानत दी थी, लेकिन पासपोर्ट कोर्ट में जमा रखने की शर्त लगाई थी।

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Teesta Setalvad passport case Supreme Court verdict Gujarat riots case 2002 link to Zakia Jafri
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट में सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ के पासपोर्ट को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई ने नया मोड़ ले लिया है। अदालत ने उनके पासपोर्ट रिलीज करने की मांग वाली याचिका को तीन जजों की बेंच के पास भेज दिया है। यह मामला 2002 के गुजरात दंगों से जुड़े उस केस से जुड़ा है, जिसमें दस्तावेज गढ़कर निर्दोष लोगों को फंसाने के आरोप लगे थे। इस फैसले से साफ हो गया है कि अदालत इस मामले को गंभीरता से देख रही है और अंतिम फैसला बड़ी बेंच ही करेगी।

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सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने कहा कि चूंकि पहले जमानत तीन जजों की बेंच ने दी थी, इसलिए पासपोर्ट से जुड़ा फैसला भी वही बेंच करेगी। कोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि इस मामले को भारत के मुख्य न्यायाधीश के सामने रखा जाए। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने बताया कि जमानत की शर्त के तहत सीतलवाड़ का पासपोर्ट सेशंस कोर्ट के पास जमा है और उसे वापस दिलाने की मांग की गई है।
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क्या है पूरा मामला और क्यों जमा है पासपोर्ट?
यह मामला 2002 के गुजरात दंगों के बाद के केसों से जुड़ा है। आरोप है कि कुछ लोगों ने फर्जी दस्तावेज बनाकर निर्दोष लोगों को फंसाने की कोशिश की। इसी केस में सीतलवाड़ को जमानत मिली थी। सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2023 में उन्हें नियमित जमानत देते हुए कहा था कि हिरासत में पूछताछ की जरूरत नहीं है, क्योंकि ज्यादातर सबूत दस्तावेजी हैं और चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है। लेकिन जमानत की शर्त के तहत उनका पासपोर्ट कोर्ट में जमा रखा गया।
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क्या पहले हाईकोर्ट ने जमानत से किया था इनकार?
गुजरात हाईकोर्ट ने जुलाई 2023 में सीतलवाड़ की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को गलत और विरोधाभासी बताते हुए रद्द कर दिया। इसके बाद उन्हें राहत मिली और नियमित जमानत दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि हर आरोपी को अपील करने का अधिकार होता है और उसे समय दिया जाना चाहिए।

क्या जाकिया जाफरी केस से जुड़ा है यह विवाद?
यह मामला जाकिया जाफरी के केस से भी जुड़ा हुआ है। जाकिया जाफरी ने 2002 के दंगों में बड़ी साजिश का आरोप लगाया था। सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में उनकी याचिका खारिज कर दी थी और उसी के बाद यह एफआईआर दर्ज हुई थी। जाकिया जाफरी, पूर्व सांसद एहसान जाफरी की पत्नी हैं, जिनकी दंगों में मौत हो गई थी।
 
सीतलवाड़ को जून 2022 में गुजरात पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उनके साथ पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट और पूर्व डीजीपी आर बी श्रीकुमार को भी हिरासत में लिया गया था। आरोप था कि इन्होंने साजिश के तहत सबूत गढ़े। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि कुछ टिप्पणियां बिना सीतलवाड़ को सुने की गई थीं।

 
अब यह मामला तीन जजों की बेंच के पास जाएगा, जो तय करेगी कि पासपोर्ट वापस किया जाए या नहीं। अदालत ने पहले ही साफ कर दिया है कि सीतलवाड़ किसी गवाह को प्रभावित नहीं करेंगी और उनसे दूर रहेंगी। साथ ही अगर ऐसा कोई प्रयास हुआ तो गुजरात पुलिस सीधे सुप्रीम कोर्ट जा सकती है। आने वाले समय में इस मामले का फैसला कानूनी और राजनीतिक दोनों दृष्टि से अहम माना जा रहा है।

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