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Supreme Court Updates: SIR में 2002 आधार वर्ष बरकरार, ISKCON विवाद में नई पीठ पर विचार

Mon, 17 Aug 2026 02:34 PM IST
प्रशांत तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत तिवारी Updated Mon, 17 Aug 2026 02:34 PM IST
सार

Supreme Court Updates: दो दिन की छुट्टी के बाद आज देश की सर्वोच्च अदालत फिर से खुली है। आज कोर्ट में कई अहम मुकदमों की सुनवाई है। ऐसे में सभी के अपडेट्स पढ़िए अमर उजाला पर...

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Several key issues are being heard in Supreme Court today get the latest updates on all of them
सुप्रीम कोर्ट अपडेट - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सिक्किम में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के लिए 2002 को आधार वर्ष रखने के निर्वाचन आयोग के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने ‘सिक्किमीज मूलनिवासी सुरक्षा संघ’ की याचिका खारिज कर दी।

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याचिकाकर्ता ने क्या मांग की थी?
 याचिकाकर्ता संगठन ने मांग की थी कि SIR के लिए 2002 के बजाय 1993 को आधार वर्ष बनाया जाए। संगठन का तर्क था कि 2002 में मतदाता सूची में जोड़े गए मतदाताओं का आंकड़ा सिक्किम के जनसांख्यिकीय आंकड़ों से मेल नहीं खाता और इससे मतदाता सूची में और विसंगतियां पैदा हो सकती हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने क्यों हस्तक्षेप से किया इंकार?
पीठ ने कहा कि पूरी प्रक्रिया के बीच में नियम या आधार वर्ष नहीं बदला जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देशभर में SIR के लिए 2002 को आधार वर्ष रखा गया है, क्योंकि उस वर्ष अंतिम SIR हुआ था। पीठ ने यह भी कहा कि 2002 की मतदाता सूची में शामिल मतदाताओं ने इसके बाद हुए चुनावों में मतदान किया है। अदालत ने कहा कि सिक्किम जैसे सीमावर्ती राज्यों में प्रवासन और जनसांख्यिकीय बदलाव की समस्या रहती है, लेकिन केवल इस आधार पर ECI के फैसले में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।
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CJI ने खारिज की याचिका  
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि संगठन की याचिका के आधार पर निर्वाचन आयोग के फैसले में हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा। हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ता को सिक्किम के लिए उचित छूट देने के संबंध में निर्वाचन आयोग से संपर्क करने की स्वतंत्रता दी। इसके बाद पीठ ने याचिका खारिज कर दी।

 इस्कॉन बेंगलुरु मंदिर के समीक्षा याचिका के लिए नई पीठ पर SC करेगा विचार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बेंगलुरु स्थित हरे कृष्ण मंदिर के स्वामित्व से जुड़े विवाद में 16 मई 2025 के अपने फैसले की समीक्षा याचिका सुनने के लिए नई पीठ गठित करने के अनुरोध पर विचार करने की बात कही। यह अनुरोध इस्कॉन मुंबई की ओर से मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष किया गया। वकील ने बताया कि समीक्षा याचिका पहले न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरश और बाद में न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठों के समक्ष सूचीबद्ध हुई थी, लेकिन सुनवाई नहीं हो सकी।

16 मई 2025 को न्यायमूर्ति अभय एस. ओका और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को पलटते हुए बेंगलुरु के मंदिर और संबंधित संपत्ति को इस्कॉन बेंगलुरु का बताया था। उच्च न्यायालय ने पहले इस्कॉन मुंबई के पक्ष में फैसला दिया था। नवंबर 2025 में पुनर्विचार याचिका पर न्यायमूर्ति जे. के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए. जी. मसीह की पीठ ने अलग-अलग राय दी। न्यायमूर्ति माहेश्वरी ने पुनर्विचार का मामला मानते हुए याचिका को खुली अदालत में सुनने की अनुमति दी, जबकि न्यायमूर्ति मसीह ने अभिलेख पर स्पष्ट त्रुटि नहीं पाई और याचिका खारिज कर दी। मतभेद के चलते मामला आगे की कार्रवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजा गया। यह विवाद 2011 से अदालत में लंबित है और मंदिर व शैक्षणिक परिसर के नियंत्रण को लेकर इस्कॉन बेंगलुरु तथा इस्कॉन मुंबई के बीच चल रहा है। इस्कॉन बेंगलुरु का कहना है कि वह कर्नाटक में पंजीकृत एक स्वतंत्र संस्था है और दशकों से मंदिर का संचालन कर रही है। वहीं, इस्कॉन मुंबई का दावा है कि बेंगलुरु की संस्था उसकी शाखा है और संबंधित संपत्ति पर उसका अधिकार है।

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