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CGHS: 48 लाख लाभार्थी, डॉक्टरों की संख्या 30 फीसदी कम, प्रतिवर्ष बढ़ रहे 10% लाभार्थी; इलाज-सुधार कैसे होगा?

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: Jyoti Bhaskar Updated Mon, 13 Apr 2026 03:38 PM IST
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CGHS Beneficiaries  Shortage of Doctors Annual Increase in  Question on Treatment and Improvements know detail
सीजीएचएस केंद्रों पर हालात नाजुक (प्रतीकात्मक) - फोटो : Freepik.com
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केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) के लाभार्थियों की संख्या हर साल 10 प्रतिशत बढ़ रही है। देश में अगस्त 2025 तक लगभग 48 लाख सीजीएचएस लाभार्थी हैं। स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों की संख्या जिस तेजी से बढ़ रही है, उसके मुकाबले डॉक्टरों के आंकड़े में गिरावट दर्ज की गई है। जनरल ड्यूटी मेडिकल ऑफिसर (एमओ) की संख्या प्रतिवर्ष घट रही है। इसके अलावा, रिक्त पदों को न भरने और डॉक्टरों के अवकाश पर जाने के कारण डॉक्टरों की संख्या में 30 प्रतिशत की कमी आई है। डॉक्टर-लाभार्थी अनुपात खराब होने के कारण 'सीजीएचएस' लाभार्थियों को असुविधा का सामना कर पड़ रहा है। 

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तीन वर्ष में 38 नए सीजीएचएस केंद्रों को मंजूरी... 
'कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स' ने इस संबंध में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा को लिखे पत्र में यह बात कही है। 'कॉन्फेडरेशन के महासचिव बीएस यादव के मुताबिक, पत्र में बताया गया है कि पिछले दशक में सीजीएचएस लाभार्थियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। गत वर्ष सीजीएचएस में लगभग 48 लाख लाभार्थी थे, जिनमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है। केंद्र सरकार ने पिछले तीन वर्षों में देशभर में 38 सीजीएचएस एलोपैथिक स्वास्थ्य केंद्रों को मंजूरी दी है। कुछ सीजीएचएस एक्सटेंशन काउंटर भी स्वीकृत किए गए हैं। वर्ष 2022 में स्वीकृत 16 सीजीएचएस एलोपैथिक स्वास्थ्य केंद्र अब पूरी तरह कार्यरत हैं। यादव ने पत्र में लिखा है कि कर्मचारी एवं पेंशनभोगी, सीजीएचएस की सेवाओं का पूर्ण लाभ उठा रहे हैं। 
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मंजूरी मिली, लेकिन शुरु नहीं हुए 22 नए स्वास्थ्य केंद्र...  
आदेश संख्या: F. No Z215025/38/2023/DIR/CGHS के अनुसार, देश भर में 22 अतिरिक्त सीजीएचएस एलोपैथिक स्वास्थ्य केंद्रों को मंजूरी दी जा रही है। प्रति स्वास्थ्य केंद्र, चार पदों की दर से 88 पदों के सृजित किए जाने को मंजूरी दी गई है। हालांकि एक वर्ष की अवधि बीत जाने के बाद भी इनमें से कोई भी स्वास्थ्य केंद्र चालू नहीं हो पाया है। इसके चलते उन शहरों के सीजीएचएस कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को असुविधा हो रही है। देशभर में फैले सभी सीजीएचएस एलोपैथिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए एक जनरल ड्यूटी मेडिकल ऑफिसर (एमओ) और एक फार्मासिस्ट (एलोपैथी) की नियुक्ति स्वीकृत है। एसआईयू के मानदंडों के अनुसार, चार जनरल ड्यूटी मेडिकल ऑफिसर (एमओ) और तीन फार्मासिस्ट (एलोपैथी) की नियुक्ति अनिवार्य है। 

अब नहीं हो रहा एसआईयू मानदंडों का पालन ...  
स्वास्थ्य मंत्रालय ने वर्ष 2022 तक मानक निरीक्षण इकाई (एसआईयू) के मानदंडों का पालन किया था। उसके बाद पदों की नियुक्ति के लिए एसआईयू मानदंडों का पालन न करने के कारण सीजीएचएस के नए एलोपैथिक स्वास्थ्य केंद्रों में जनरल ड्यूटी मेडिकल ऑफिसर (एमओ) और फार्मासिस्ट (एलोपैथी) की कमी हो गई है। सीजीएचएस लाभार्थियों को नए सीजीएचएस स्वास्थ्य केंद्रों में उचित चिकित्सा उपचार नहीं मिल पा रहा है। वजह, एक जनरल ड्यूटी मेडिकल ऑफिसर (एमओ) और एक फार्मासिस्ट (एलोपैथी) उस शहर में औसतन 15,000 से 25,000 सीजीएचएस लाभार्थियों की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं हैं। 

डॉक्टर/फार्मासिस्ट छुट्टी पर तो स्वास्थ्य केंद्र बंद...  
यदि कोई डॉक्टर या फार्मासिस्ट छुट्टी पर जाता है, तो इससे वहां के सीजीएचएस लाभार्थियों पर असर पड़ता है। छुट्टी की अवधि के दौरान सीजीएचएस स्वास्थ्य केंद्र बंद हो जाता है। सामान्य परिस्थितियों में भी एक डॉक्टर प्रभावी रूप से लगभग 55 से 65 मरीजों का गुणवत्तापूर्ण इलाज कर सकता है, लेकिन डॉक्टरों की कमी के कारण अन्य सीजीएचएस लाभार्थी चिकित्सा उपचार से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में 'कॉन्फेडरेशन' ने पदों की मंजूरी देने में एसआईयू के मानदंडों का पालन करने का अनुरोध किया है। देश भर में एक्सटेंशन काउंटर बिना किसी अतिरिक्त स्वीकृत पद के आवंटित किए गए हैं, जिससे मौजूदा स्वास्थ्य केंद्रों को कठिनाई हो रही है। स्वीकृत पदों और उपलब्ध डॉक्टरों के अभाव में ये एक्सटेंशन काउंटर प्रभावी सेवा प्रदान करने में असमर्थ हैं। 

हर साल घट रही 'एमओ' की संख्या...
सीजीएचएस लाभार्थियों की संख्या प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है, लेकिन जनरल ड्यूटी मेडिकल ऑफिसर (एमओ) की संख्या प्रतिवर्ष घट रही है। रिक्त पदों को न भरने और डॉक्टरों के अवकाश पर जाने के कारण डॉक्टरों की संख्या में 30 फीसदी की कमी आई है, जिससे सीजीएचएस स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की कमी बनी हुई है। संसदीय समिति की सिफारिशों में भी डॉक्टर-लाभार्थी अनुपात की ओर ध्यान दिलाया गया है। 'कॉन्फेडरेशन' ने इस मामले में वित्त मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से व्यक्तिगत हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है। एसआईयू मानदंडों और संसदीय समिति की सिफारिशों के अनुसार सीजीएचएस के नए एलोपैथिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए पदों की उचित स्वीकृति की प्रक्रिया शुरू कराई जाए।

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