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'भारत सरकार ने हर स्तर पर सहयोग किया': ईरानी राजदूत ने भारतीयों का जताया आभार, होर्मुज-US को लेकर क्या कहा?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shubham Kumar Updated Mon, 13 Apr 2026 05:25 PM IST
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सार

भारत में ईरान के राजदूत  मोहम्मद फथाली ने भारत और यहां की जनता का आभार जताया। उन्होंने कहा कि संकट में भारत सच्चा साथी साबित हुआ। उन्होंने अमेरिका पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया और होर्मुज जलडमरूमध्य में नाकाबंदी पर कड़ा विरोध जताया। उनके मुताबिक, ईरान के लिए कूटनीति भी संघर्ष का ही हिस्सा है।

Iranian Ambassador expresses gratitude to Indians Government of India extended cooperation at every level
मोहम्मद फथाली, भारत में ईरानी राजदूत - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। दूसरी ओर पाकिस्तान में हुई शांति वार्ता के असफल रहने के बाद हालात और गंभीर हो गए हैं। इसी बीच भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने एक साथ सभी पहलुओं पर अपनी प्रतिक्रिया दी। इसके साथ ही ईरान का रुख भी साफ किया। फथाली ने सबसे पहले पहले भारत और यहां की जनता का आभार जताया। साथ ही कहा कि संकट के समय भारतीय लोगों ने सच्चे और भरोसेमंद साथी होने का परिचय दिया।

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इस दौरान फथाली ने भारत सरकार का भी धन्यवाद कहा। उन्होंने कहा कि इस संकट के समय में भारत सरकार ने जरूरी सभी व्यवस्थाएं करने में मदद की। उन्होंने कहा कि भारत ने हर स्तर पर सहयोग किया, जिससे हालात को संभालने में मदद मिली। उनके मुताबिक, भारत और ईरान के रिश्ते मजबूत और भरोसे पर आधारित हैं, जो संकट के समय और भी स्पष्ट हो जाते हैं।

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भारतीय जहाजों के आवाजाही पर भी बोले ईरानी राजदूत 
इस दौरान ईरानी राजदूत ने यह भी साफ किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले भारतीय टैंकरों से ईरान कोई टोल वसूल नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल समय में ईरान और भारत के रिश्ते अच्छे बने हुए हैं और दोनों देशों के बीच सहयोग जारी है। राजदूत के मुताबिक, ईरान और भारत के बीच साझा हित और साझा भविष्य है, इसलिए दोनों देश एक-दूसरे के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

होर्मुज और अमेरिकी नाकाबंदी पर क्या बोले?
इस दौरान उन्होंने अमेरिकी के तरफ से होर्मुज में नाकाबंदी के एलान पर भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ईरान के लिए कूटनीति (डिप्लोमेसी) भी एक तरह का संघर्ष ही है। यह उनके देश के रक्षकों की लड़ाई का ही हिस्सा है। उन्होंने अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि ईरान ने अमेरिका के पुराने वादाखिलाफी और गलत इरादों को न तो भूला है और न ही भूलेगा।

उनका कहना था कि ईरान को अमेरिका के साथ अपने पिछले अनुभवों से बहुत कुछ सीखने को मिला है। डॉ. फथाली ने आगे कहा कि हाल ही में हुए 12 दिन के युद्ध के दौरान ईरान बातचीत (नेगोशिएशन) की प्रक्रिया में था, लेकिन इसी बीच इस्राइल और अमेरिका ने और बड़े पैमाने पर हमले शुरू कर दिए। 

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होर्मुज को लेकर फथाली ने क्या कहा?

इसके साथ ही फथाली ने आगे कहा कि युद्ध शुरू होने से पहले होर्मुज पूरी तरह खुला था और वहां सामान्य स्थिति थी। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान पर 12 दिनों तक हमला किया गया, जिसके बाद युद्धविराम (सीजफायर) की बात की गई। राजदूत के मुताबिक, एक तरफ बातचीत (नेगोशिएशन) की बात होती रही, वहीं दूसरी तरफ हमले भी जारी रहे। फथाली ने यह भी कहा कि हमलों में स्कूलों और अस्पतालों को निशाना बनाया गया, जो बेहद चिंताजनक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान के अधिकार क्षेत्र (टेरिटोरियल वॉटर) में आता है और यह उनके लिए बेहद अहम है।

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