Bengal: बीरभूम के छह लोग अब तक नहीं लौटे, केंद्र के खिलाफ कोलकाता हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल
पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के छह निवासियों को बांग्लादेश भेजे जाने के मामले में उनके परिजनों ने केंद्र सरकार के खिलाफ कोलकाता हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की है। अदालत ने एक महीने में वापसी का आदेश दिया था।
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पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के छह निवासियों को बांग्लादेश भेजे जाने के मामले में उनके परिजनों ने केंद्र सरकार के खिलाफ कोलकाता हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की है। परिजनों ने आरोप लगाया कि केंद्र ने अदालत के उस आदेश का पालन नहीं किया, जिसमें एक महीने के भीतर सभी को भारत वापस लाने का निर्देश दिया गया था। अदालत के दस्तावेजों के अनुसार, यह मामला 6 नवंबर को न्यायमूर्ति तपब्रत चक्रवर्ती और रीतोब्रोतो कुमार मित्रा की पीठ के सामने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट का खटखटाया दरवाजा
इससे पहले, 26 सितंबर को इसी पीठ ने परिजनों की हैबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार के उस फैसले को खारिज कर दिया था, जिसमें छह लोगों (जिनमें तीन बच्चे भी शामिल हैं) को अवैध प्रवासी करार देकर बांग्लादेश भेज दिया गया था। जानकारी के मुताबिक, सोनाली नाम की एक महिला, जो नौ महीने की गर्भवती हैं, वर्तमान में बांग्लादेश की जेल में बंद हैं। वहां के अधिकारियों ने उन्हें अवैध निवासी बताते हुए हिरासत में लिया था। हालांकि, 30 सितंबर को बांग्लादेश की अदालत ने इन सभी को भारतीय नागरिक करार दिया और ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग को उनकी वापसी की व्यवस्था करने का निर्देश दिया।
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इस बीच, 22 अक्टूबर को गृह मंत्रालय (MHA) ने कोलकाता हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मंत्रालय ने तर्क दिया कि कोलकाता हाईकोर्ट को इस मामले में अधिकार क्षेत्र नहीं है, क्योंकि हिरासत और निर्वासन की प्रक्रिया दिल्ली में हुई थी। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले में गृह मंत्रालय की अपील और निर्वासन प्रक्रिया की वैधता पर विचार कर रहा है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि निर्वासन की प्रक्रिया जल्दबाजी में की गई, जो मंत्रालय के निर्देशों का उल्लंघन है, जिनके तहत दिल्ली का एफआरआरओ बांग्लादेशी नागरिकों की वापसी की प्रक्रिया संचालित करता है।