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'पत्नी गर्भवती है साहब': सड़क पर बैठ पति ने की मिन्नतें, राज्यपाल के लिए रुके ट्रैफिक के बीच हुआ ये इंतजाम

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Mon, 01 Jun 2026 04:52 PM IST
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सार

बंगलूरू में राज्यपाल थावरचंद गहलोत के काफिले के लिए ट्रैफिक रोके जाने पर एक व्यक्ति सड़क पर बैठ गया। वह अपनी गर्भवती पत्नी के साथ सफर कर रहा था और लंबे इंतजार से नाराज था। उसने वीआईपी कल्चर पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या आम लोग महत्वपूर्ण नहीं हैं। पुलिस ने उसे समझाकर हटाया। घटना के बाद बड़े शहरों में वीआईपी मूवमेंट और आम जनता की परेशानी पर बहस तेज हो गई।

Bengaluru husband protest for Pregnant wife over Governor convoy traffic halt VIP movement
आम आदमी बनाम वीआईपी सिस्टम की तस्वीर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

बंगलूरू की व्यस्त सड़कों पर सोमवार सुबह एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने हजारों लोगों के दिल को छू लिया। ओल्ड एयरपोर्ट रोड पर राज्यपाल थावरचंद गहलोत के काफिले के लिए ट्रैफिक रोक दिया गया था। इसी बीच अपनी गर्भवती पत्नी के साथ सफर कर रहे एक व्यक्ति का सब्र टूट गया। वह कार से उतरा और सड़क के बीच बैठकर विरोध करने लगा। उसकी आवाज में गुस्सा भी था और बेबसी भी। वह बार-बार यही कह रहा था कि उसकी पत्नी गर्भवती है और उसे जरूरी काम से जाना है, फिर आम लोगों को इस तरह क्यों रोका जा रहा है।



यह पूरा मामला कुछ ही मिनटों का था, लेकिन इसने वीआईपी मूवमेंट और आम जनता की परेशानी पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। वीडियो में दिखाई दिया कि व्यक्ति सड़क पर बैठा हुआ है और ट्रैफिक पुलिस अधिकारी उसे हटाने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिसकर्मी उसे समझा रहे थे कि सड़क खाली कर दे, लेकिन वह लगातार पूछ रहा था कि क्या सिर्फ बड़े पदों पर बैठे लोग ही महत्वपूर्ण हैं। उसका सवाल था, क्या सिर्फ राज्यपाल ही वीआईपी हैं, हम लोग कुछ नहीं हैं?
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गर्भवती पत्नी की परेशानी ने तोड़ दिया शख्स का धैर्य
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार व्यक्ति अपनी पत्नी के साथ कार में जा रहा था। तभी राज्यपाल के काफिले के कारण ट्रैफिक रोक दिया गया। लंबे समय तक सड़क बंद रहने से वह परेशान हो गया। उसने पुलिस से कहा, “मेरी पत्नी गर्भवती है। हमें सिग्नल पर क्यों रोका गया है? राज्यपाल अभी एयरपोर्ट से निकले भी नहीं हैं।” उसकी बातों में आम आदमी की नाराजगी साफ दिखाई दे रही थी। कार में बैठी उसकी पत्नी भी लगातार इंतजार करती रही।
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क्या वीआईपी मूवमेंट आम लोगों की मुश्किल बढ़ा रहा?
बंगलूरू पहले से ही भारी ट्रैफिक जाम के लिए जाना जाता है। ऐसे में जब किसी वीआईपी के काफिले के लिए सड़कें रोक दी जाती हैं तो हजारों लोग प्रभावित होते हैं। ऑफिस जाने वाले कर्मचारी, स्कूल जा रहे बच्चे, मरीज और गर्भवती महिलाएं तक घंटों फंस जाती हैं। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों ने सवाल उठाए कि आखिर आम नागरिकों की परेशानी का जिम्मेदार कौन है। कई लोगों ने कहा कि सुरक्षा जरूरी है, लेकिन आम लोगों की जिंदगी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

पुलिस ने हालात संभालने के लिए क्या किया?
मौके पर मौजूद ट्रैफिक पुलिस अधिकारी लगातार व्यक्ति को समझाने की कोशिश करते रहे। अधिकारी ने उससे कहा कि वह भी महत्वपूर्ण है और सड़क पर बैठना सही नहीं है। लेकिन व्यक्ति ट्रैफिक चालू करने की मांग करता रहा। कुछ देर तक सड़क पर तनावपूर्ण माहौल बना रहा। बाद में पुलिस पेट्रोलिंग वाहन बुलाया गया। इसके बाद व्यक्ति ने अपना विरोध खत्म किया और वापस कार में बैठकर वहां से चला गया।

यह घटना खत्म जरूर हो गई, लेकिन इसके बाद एक बार फिर वीआईपी कल्चर पर बहस तेज हो गई है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या किसी बड़े पद पर बैठे व्यक्ति की सुरक्षा के लिए हजारों आम लोगों को परेशान करना सही है। खासकर तब, जब किसी की तबीयत खराब हो, कोई मरीज अस्पताल जा रहा हो या कोई गर्भवती महिला सफर कर रही हो।

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