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Maharashtra: उद्योगपति अरुण लखानी के BJP उम्मीदवार बनने पर उठे सवाल, संजय राउत बोले- वे RSS के पुराने समर्थक
पीटीआई, मुंबई
Published by: अमन तिवारी
Updated Mon, 01 Jun 2026 05:06 PM IST
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सार
संजय राउत ने कहा कि भाजपा ने अरुण लखानी को उम्मीदवार बनाया है क्योंकि वे पुराने आरएसएस समर्थक हैं। उन्होंने भाजपा पर दलबदलुओं को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। राउत ने कहा कि पार्टी के पुराने कार्यकर्ता अब सिर्फ नए नेताओं की सेवा में लगे हैं।
संजय राउत, सांसद, शिवसेना यूबीटी
- फोटो : ANI
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विस्तार
शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने सोमवार को उद्योगपति अरुण लखानी को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। भाजपा ने आगामी महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव के लिए लखानी को अपना उम्मीदवार बनाया है। राउत ने कहा कि लखानी का नामांकन कोई अजीब बात नहीं है। उन्होंने लखानी को एक सज्जन व्यक्ति बताया। उन्होंने कहा कि लखानी हमेशा से आरएसएस का समर्थन किया है।
अरुण लखानी के बेटे सारंग की शादी एनसीपी (एसपी) नेता सुप्रिया सुले की बेटी रेवती से होने वाली है। भाजपा ने लखानी को वर्धा-चंद्रपुर-गढ़चिरौली स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र से मैदान में उतारा है। राउत ने पत्रकारों से कहा कि लखानी शुरू से ही विदर्भ के उन लोगों की सूची में शामिल हैं जिन्होंने आरएसएस को हर तरह से मजबूती दी है। उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र से संसद में ऐसे कई नेता हैं जिनकी जड़ें आरएसएस में हैं। लखानी कभी कांग्रेस या एनसीपी (एसपी) में नहीं रहे।
विधान परिषद चुनाव के लिए नामांकन भरने की आखिरी तारीख एक जून है। दो जून को नामांकन पत्रों की जांच होगी। चार जून तक नाम वापस लिए जा सकते हैं। वोटों की गिनती 22 जून को होगी। यह चुनाव 16 स्थानीय निकाय क्षेत्रों में हो रहे हैं। इनमें सोलापुर, अहमदनगर, ठाणे, जलगांव, सांगली-सतारा, नांदेड़, यवतमाल, पुणे, भंडारा-गोंदिया, रायगढ़-रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग, नासिक, वर्धा-चंद्रपुर-गढ़चिरौली, अमरावती, उस्मानाबाद-लातूर-बीड, परभणी-हिंगोली और औरंगाबाद-जालना शामिल हैं। नागपुर सीट पर उपचुनाव भी होगा। इन चुनावों में स्थानीय निकायों के चुने हुए सदस्य वोट डालते हैं।
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ये भी पढ़ें: Bengal Politics: दो TMC विधायक निष्कासित, संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप
संजय राउत ने प्राजक्त तनपुरे के नामांकन को लेकर भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि तनपुरे ने पिछले विधानसभा चुनावों में भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ा था। राउत ने तनपुरे से कहा कि वे विकास कार्य का बहाना बनाकर भाजपा का इस्तेमाल करने का नाटक बंद करें। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा को कुछ नियमों का पालन करना चाहिए। पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी अब सिर्फ नए आने वाले नेताओं के लिए दरी बिछाने और चाय के कप उठाने तक रह गई है। राउत ने दावा किया कि भाजपा के ज्यादातर बड़े नेता दलबदलू हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल और असम के मुख्यमंत्रियों का उदाहरण देते हुए कहा कि महाराष्ट्र और कुछ अन्य राज्यों को छोड़कर बाकी जगह यही हाल है।
अरुण लखानी के बेटे सारंग की शादी एनसीपी (एसपी) नेता सुप्रिया सुले की बेटी रेवती से होने वाली है। भाजपा ने लखानी को वर्धा-चंद्रपुर-गढ़चिरौली स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र से मैदान में उतारा है। राउत ने पत्रकारों से कहा कि लखानी शुरू से ही विदर्भ के उन लोगों की सूची में शामिल हैं जिन्होंने आरएसएस को हर तरह से मजबूती दी है। उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र से संसद में ऐसे कई नेता हैं जिनकी जड़ें आरएसएस में हैं। लखानी कभी कांग्रेस या एनसीपी (एसपी) में नहीं रहे।
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विधान परिषद चुनाव के लिए नामांकन भरने की आखिरी तारीख एक जून है। दो जून को नामांकन पत्रों की जांच होगी। चार जून तक नाम वापस लिए जा सकते हैं। वोटों की गिनती 22 जून को होगी। यह चुनाव 16 स्थानीय निकाय क्षेत्रों में हो रहे हैं। इनमें सोलापुर, अहमदनगर, ठाणे, जलगांव, सांगली-सतारा, नांदेड़, यवतमाल, पुणे, भंडारा-गोंदिया, रायगढ़-रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग, नासिक, वर्धा-चंद्रपुर-गढ़चिरौली, अमरावती, उस्मानाबाद-लातूर-बीड, परभणी-हिंगोली और औरंगाबाद-जालना शामिल हैं। नागपुर सीट पर उपचुनाव भी होगा। इन चुनावों में स्थानीय निकायों के चुने हुए सदस्य वोट डालते हैं।
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संजय राउत ने प्राजक्त तनपुरे के नामांकन को लेकर भी भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि तनपुरे ने पिछले विधानसभा चुनावों में भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ा था। राउत ने तनपुरे से कहा कि वे विकास कार्य का बहाना बनाकर भाजपा का इस्तेमाल करने का नाटक बंद करें। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा को कुछ नियमों का पालन करना चाहिए। पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी अब सिर्फ नए आने वाले नेताओं के लिए दरी बिछाने और चाय के कप उठाने तक रह गई है। राउत ने दावा किया कि भाजपा के ज्यादातर बड़े नेता दलबदलू हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल और असम के मुख्यमंत्रियों का उदाहरण देते हुए कहा कि महाराष्ट्र और कुछ अन्य राज्यों को छोड़कर बाकी जगह यही हाल है।