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Cyber Criminals: साइबर अपराधियों से सावधान, अब एआई से बना रहे असली लगने वाले डीपफेक वीडियो और नकली पहचान

डिजिटल ब्यूरो ,अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Asmita Tripathi Updated Thu, 11 Jun 2026 02:13 PM IST
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सार

आज कल सिंथेटिक आइडेंटिटी बनाने के लिए एआई का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन तकनीकों के जरिए फेशियल ऑथेंटिकेशन, लाइवनेस वेरिफिकेशन, वीडियो-केवाईसी, अकाउंट रिकवरी और फाइनेंशियल व डिजिटल सेवाओं तक पहुंच संभव हो गया है।      
 

Beware cybercriminals they are now using AI to create realistic-looking deepfake videos and fake identities.
साइबर अपराध - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

साइबर अपराधी अब असली लगने वाले डीपफेक वीडियो और नकली पहचान (सिंथेटिक आइडेंटिटी) बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का तेजी से इस्तेमाल कर रहे हैं। इन तकनीकों का इस्तेमाल फेशियल ऑथेंटिकेशन, लाइवनेस वेरिफिकेशन, वीडियो-केवाईसी, अकाउंट रिकवरी और फाइनेंशियल व डिजिटल सेवाओं तक अनधिकृत पहुंच (बिना इजाजत एक्सेस) पाने के लिए किया जा सकता है। एआई की मदद से साइबर अपराधी फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना सकते हैं। यह एडवायजरी 'भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र' (आई4सी) द्वारा जारी की गई है। 



केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले आई4सी के मुताबिक, धोखाधड़ी करने वाले लोग धोखे से की गई वीडियो कॉल, नकली ऑनलाइन जॉब इंटरव्यू या सोशल इंजीनियरिंग के तरीकों से हासिल की गई फेशियल रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल करके अकाउंट्स तक अनधिकृत पहुंच पाने की कोशिश कर सकते हैं।
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साइबर अपराधियों का काम करने का तरीका ... 

1. शुरुआती संपर्क:  

धोखाधड़ी करने वाले लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, मैसेजिंग ऐप, जॉब पोर्टल, डेटिंग प्लेटफॉर्म या फ़ोन कॉल के ज़रिए लोगों से संपर्क करते हैं।

2. चेहरे का डेटा इकट्ठा करना:  
चेहरे का डेटा पब्लिक प्लेटफॉर्म से इकट्ठा किया जा सकता है। पीड़ितों को चेहरे की हरकतें करने के लिए भी मनाया जा सकता है, जैसे स्क्रीन की ओर देखना, सिर घुमाना, पलकें झपकाना या बोलना। धोखाधड़ी करने वाले इन इंटरैक्शन को चुपके से रिकॉर्ड कर सकते हैं।
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3. एआई डीपफेक बनाना: 
रिकॉर्ड किए गए वीडियो को एआई-आधारित टूल का इस्तेमाल करके प्रोसेस किया जा सकता है ताकि एक असली जैसा दिखने वाला डिजिटल क्लोन बनाया जा सके। यह क्लोन पीड़ित के चेहरे की हरकतों, हाव-भाव/पलक झपकाने और आवाज की नकल कर सकता है।

4. सुरक्षा को बाईपास करने की कोशिश: 
अगर डीपफेक का पता लगाने वाली तकनीक मौजूद न हो, तो इस सिंथेटिक मीडिया का इस्तेमाल चेहरे से पहचान करने (फेशियल ऑथेंटिकेशन) और जीवित होने की पुष्टि (लाइवनेस वेरिफिकेशन) करने वाले सिस्टम को बाईपास करने के लिए किया जा सकता है।

5. धोखाधड़ी से केवाईसी और डिजिटल वॉलेट एक्टिवेशन: 
इससे फाइनेंशियल संस्थानों द्वारा अपनाई जाने वाली केवाईसी प्रक्रिया को बाईपास किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल फाइनेंशियल अकाउंट बनाने या एक्टिवेट करने के लिए किया जा सकता है।

ये हैं साइबर अपराध से बचने के लिए सुरक्षा उपाय: 
डीप फेक डिटेक्शन: 
1
. कस्टमर ऑनबोर्डिंग सिस्टम, जिसमें फिनटेक कंपनियां भी शामिल हैं, उन्हें डीप फेक और सिंथेटिक रूप से बनाए गए कंटेंट का पता लगाने वाले सिस्टम को शामिल करना चाहिए।
2. अपने बायोमेट्रिक्स प्रोफ़ाइल को लॉक करना इस तरह की रिमोट आइडेंटिटी चोरी के खिलाफ सबसे मजबूत सुरक्षा है। 
3. अनधिकृत लॉगिन या ऑथेंटिकेशन की कोशिशों के लिए किसी भी ईमेल नोटिफिकेशन पर नज़र रखें।
4. संदिग्ध फाइनेंशियल गतिविधि या आइडेंटिटी चोरी की तुरंत रिपोर्ट करें। बैंकिंग नेटवर्क से पैसे निकलने से पहले उन्हें फ्रीज करने के लिए तेज़ी बहुत ज़रूरी है। घटना को नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर ऑनलाइन दर्ज करें। धोखाधड़ी करने वाले का कॉन्टैक्ट नंबर और इस्तेमाल किए गए वीडियो का लिंक दें।
5. अपने टेलीकॉम प्रोवाइडर को अलर्ट करें। अगर आपके मोबाइल नेटवर्क की कनेक्टिविटी अचानक काम करना बंद कर दे, तो तुरंत अपने नेटवर्क प्रोवाइडर से संपर्क करें ताकि यह पक्का हो सके कि धोखाधड़ी से सिम स्वैप तो नहीं हुआ है।

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