{"_id":"6a2a89c821e33e1dcb0f2da2","slug":"india-supports-two-state-solution-for-israel-palestine-conflict-calls-for-immediate-ceasefire-in-gaza-strip-2026-06-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"UNSC में भारत की बड़ी पहल: फिलिस्तीन में विकास परियोजनाओं के लिए देगा 25 लाख डॉलर; युद्धविराम का समर्थन","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
UNSC में भारत की बड़ी पहल: फिलिस्तीन में विकास परियोजनाओं के लिए देगा 25 लाख डॉलर; युद्धविराम का समर्थन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नवीन पारमुवाल
Updated Thu, 11 Jun 2026 03:41 PM IST
विज्ञापन
सार
भारत ने इस्राइल-फिलिस्तीन संघर्ष के लिए दो-राज्य समाधान का समर्थन किया है और गाजा में स्थायी संघर्ष विराम की मांग की है। भारत जल्द ही फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र एजेंसी को 25 लाख डॉलर भी सौंपेगा।
हरीश पर्वतनेनी
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
विस्तार
UNSC: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक उच्च स्तरीय चर्चा के दौरान भारत ने इस्राइल-फिलिस्तीन संघर्ष के समाधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर दोहराया है। भारत ने स्पष्ट किया कि वह गाजा में स्थायी युद्धविराम का समर्थन करता है। इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र की वैधता और विश्वसनीयता पर भी टिप्पणी की।
फिलिस्तीन के शरणार्थियों के लिए भारत ने संयुक्त राष्ट्र राहत और कार्य एजेंसी को जल्द ही 25 लाख अमेरिकी डॉलर की सहायता राशि की घोषणा की है। यह भारत के वार्षिक 50 लाख डॉलर के योगदान की पहली किस्त होगी। इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि गाजा में मानवीय स्थिति बेहद गंभीर है और इसके लिए तत्काल अंतरराष्ट्रीय ध्यान और सहायता की आवश्यकता है।
लेबनान में कार्यरत भारतीय सैनिकों के लिए भी की अपील
भारत ने ना सिर्फ फिलिस्तीन बल्कि लेबनान और यमन की स्थिति पर भी टिप्पणी की। भारत ने लेबनान के संदर्भ में उसकी क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सम्मान करने का आह्वान किया। राजदूत पर्वतनेनी ने लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल के साथ जुड़े भारतीय सैनिकों की सुरक्षा पर जोर दिया और कहा कि उनको निशाना नहीं बनाना चाहिए। इसके साथ ही भारत ने यमन के समुद्री नौवहन पर होने वाले हमलों की कड़ी निंदा करते हुए लाल सागर और अदन की खाड़ी में सुरक्षा को साझा अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी करार दिया।
विज्ञापन
सुरक्षा परिषद के ढांचे में सुधार की उठाई मांग
भारत ने दशकों पुराने सुरक्षा परिषद के ढांचे में आमूल-चूल सुधार करने की भी मांग उठाई है। राजदूत पर्वतनेनी ने कहा, ‘हमें नई वास्तविकताओं के अनुरूप ढलना होगा और अपने प्रयासों को जारी रखना होगा। उदाहरण के लिए, फिलिस्तीन मुद्दा पुराने मध्यस्थता ढांचों से भरा पड़ा है जो आज के संदर्भ में प्रासंगिक नहीं हैं। आज की गाजा शांति योजना और शांति बोर्ड का ढांचा पहले के ढांचों से बिल्कुल अलग है।’
इसके साथ ही भारत ने इस बात पर खास जोर दिया कि किसी भी संघर्ष में सबसे बड़ा नुकसान महिलाओं और बच्चों जैसे समूहों का होता है। इसलिए, विवादों को सुलझाने के लिए मानव-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना अनिवार्य है। पर्वतनेनी ने कहा, ‘संयुक्त राष्ट्र वैधता, विश्वसनीयता और प्रभावशीलता से जुड़े सवालों का सामना कर रहा है। दुनिया के विभिन्न हिस्सों में चल रहे संघर्ष और अथाह मानवीय पीड़ा इसके प्रमुख कारण हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को अपने उद्देश्य के लिए उपयुक्त होना होगा।’
फिलिस्तीन के शरणार्थियों के लिए भारत ने संयुक्त राष्ट्र राहत और कार्य एजेंसी को जल्द ही 25 लाख अमेरिकी डॉलर की सहायता राशि की घोषणा की है। यह भारत के वार्षिक 50 लाख डॉलर के योगदान की पहली किस्त होगी। इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि गाजा में मानवीय स्थिति बेहद गंभीर है और इसके लिए तत्काल अंतरराष्ट्रीय ध्यान और सहायता की आवश्यकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
लेबनान में कार्यरत भारतीय सैनिकों के लिए भी की अपील
भारत ने ना सिर्फ फिलिस्तीन बल्कि लेबनान और यमन की स्थिति पर भी टिप्पणी की। भारत ने लेबनान के संदर्भ में उसकी क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सम्मान करने का आह्वान किया। राजदूत पर्वतनेनी ने लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल के साथ जुड़े भारतीय सैनिकों की सुरक्षा पर जोर दिया और कहा कि उनको निशाना नहीं बनाना चाहिए। इसके साथ ही भारत ने यमन के समुद्री नौवहन पर होने वाले हमलों की कड़ी निंदा करते हुए लाल सागर और अदन की खाड़ी में सुरक्षा को साझा अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी करार दिया।
सुरक्षा परिषद के ढांचे में सुधार की उठाई मांग
भारत ने दशकों पुराने सुरक्षा परिषद के ढांचे में आमूल-चूल सुधार करने की भी मांग उठाई है। राजदूत पर्वतनेनी ने कहा, ‘हमें नई वास्तविकताओं के अनुरूप ढलना होगा और अपने प्रयासों को जारी रखना होगा। उदाहरण के लिए, फिलिस्तीन मुद्दा पुराने मध्यस्थता ढांचों से भरा पड़ा है जो आज के संदर्भ में प्रासंगिक नहीं हैं। आज की गाजा शांति योजना और शांति बोर्ड का ढांचा पहले के ढांचों से बिल्कुल अलग है।’
इसके साथ ही भारत ने इस बात पर खास जोर दिया कि किसी भी संघर्ष में सबसे बड़ा नुकसान महिलाओं और बच्चों जैसे समूहों का होता है। इसलिए, विवादों को सुलझाने के लिए मानव-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना अनिवार्य है। पर्वतनेनी ने कहा, ‘संयुक्त राष्ट्र वैधता, विश्वसनीयता और प्रभावशीलता से जुड़े सवालों का सामना कर रहा है। दुनिया के विभिन्न हिस्सों में चल रहे संघर्ष और अथाह मानवीय पीड़ा इसके प्रमुख कारण हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को अपने उद्देश्य के लिए उपयुक्त होना होगा।’