Explainer: 370 रुपये की बिरयानी पर बवाल; ऐसे मोटी कमाई का जरिया और विवादों का केंद्र बनी स्टैंड-अप कॉमेडी
छोटे कैफे और ओपन-माइक मंचों से शुरू हुई स्टैंड-अप कॉमेडी आज करोड़ों रुपये के उद्योग में बदल चुकी है। इंटरनेट और सोशल मीडिया ने कॉमेडियनों को नई पहचान दी, वहीं लाइव शो और ब्रांड साझेदारियों ने इसे बड़ा कारोबार बना दिया। लेकिन बढ़ती लोकप्रियता के साथ विवाद भी बढ़े हैं। ऐसे में सवाल है कि क्या स्टैंड-अप कॉमेडी अब केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक बहस और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का भी महत्वपूर्ण मंच बन चुकी है? आइए जानते हैं।
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विस्तार
आज भारत में एक कॉमेडी शो, एक वायरल क्लिप या मंच पर कही गई एक टिप्पणी राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बन जाती है। हाल ही में कॉमेडियन प्रणीत मोरे के शो से सामने आए '370 रुपये की बिरयानी' वाले वायरल वीडियो ने यही दिखाया। एक दर्शक की टिप्पणी पर शुरू हुई चर्चा देखते ही देखते सहमति (Consent), महिलाओं के प्रति सोच, कार्यस्थल की जवाबदेही और सोशल मीडिया के प्रभाव तक पहुंच गई।
यह पहला मौका नहीं है जब स्टैंड-अप कॉमेडी किसी बड़े विवाद के केंद्र में आई हो। पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक व्यंग्य से लेकर धार्मिक भावनाओं, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, अश्लीलता और सामाजिक संवेदनशीलता तक कई मुद्दों पर कॉमेडियनों को विरोध, कानूनी कार्रवाई और सार्वजनिक आलोचना का सामना करना पड़ा है।
दिलचस्प बात यह है कि विवादों के बावजूद भारत में स्टैंड-अप कॉमेडी का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। छोटे कॉमेडी क्लबों से शुरू हुआ यह मंच अब बड़े ऑडिटोरियम, यूट्यूब, ओटीटी प्लेटफॉर्म और करोड़ों रुपये के लाइव एंटरटेनमेंट उद्योग का हिस्सा बन चुका है।
ऐसे में सवाल उठता है कि भारत में स्टैंड-अप कॉमेडी कैसे शुरू हुई? इसका बाजार कैसे बढ़ रहा है? इंटरनेट से कैसे इसे फायदा मिला? डिजिटल प्लेटफॉर्म ने क्या भूमिका निभाई? कॉमेडियन कैसे ब्रांड बन गए? हाल के वर्षों में इससे जुड़े कौन से विवाद सामने आए? कौन-कौन से फेमस कॉमेडियन हैं और क्या बदलते दर्शक अब कॉमेडी की सीमाओं को नए सिरे से तय कर रहे हैं? आइए विस्तार समझते हैं।
भारत में स्टैंड-अप कॉमेडी की शुरुआत कैसे हुई?
भारत में हास्य की परंपरा नई नहीं है। फिल्मों, नाटकों और टीवी कार्यक्रमों में दशकों से हास्य कलाकार मौजूद रहे हैं। लेकिन आधुनिक स्टैंड-अप कॉमेडी का स्वरूप 2000 के दशक के अंत और 2010 के दशक की शुरुआत में विकसित होना शुरू हुआ। मुंबई, दिल्ली, बंगलूरू और पुणे जैसे शहरों में छोटे कैफे, बार और ओपन-माइक कार्यक्रमों ने इस संस्कृति को जन्म दिया। शुरुआत में दर्शक सीमित थे और कलाकारों के लिए इसे पेशे के रूप में अपनाना आसान नहीं था। उस समय अधिकांश कॉमेडियन नौकरी या पढ़ाई के साथ-साथ मंच पर प्रदर्शन करते थे।
धीरे-धीरे यह संस्कृति शहरी युवाओं के बीच लोकप्रिय होने लगी। इसकी वजह यह थी कि स्टैंड-अप कॉमेडी आम लोगों के अनुभवों पर आधारित थी। इसमें परिवार, रिश्ते, नौकरी, कॉलेज, ट्रैफिक, शादी और सामाजिक दबाव जैसे विषयों पर बात की जाती है, जिनसे युवा आसानी से जुड़ पाते हैं।
कैसे बढ़ रहा है स्टैंड-अप कॉमेडी का बाजार?
आईआईएम अहमदाबाद की 2018 की रिपोर्ट में भारतीय स्टैंड-अप कॉमेडी को एक उभरते हुए व्यवसायिक क्षेत्र के रूप में बताया गया था। अध्ययन के अनुसार उस समय भारतीय स्टैंड-अप कॉमेडी उद्योग लगभग 30 करोड़ रुपये का था और इसके लगभग 25 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया गया था। रिपोर्ट में कहा गया कि स्टैंड-अप कॉमेडी केवल कला नहीं रह गई है, बल्कि यह एक संगठित सेवा उद्योग का रूप ले रही है।
रिपोर्ट की एक महत्वपूर्ण बात यह थी कि उसने कॉमेडियन को एक "ब्रांड" के रूप में देखने का सुझाव दिया। जिस तरह कोई कंपनी उत्पाद बनाकर उपभोक्ता तक पहुंचाती है, उसी तरह एक कॉमेडियन अपने अनुभवों और विचारों को कंटेंट में बदलकर दर्शकों तक पहुंचाता है। अध्ययन में यह भी कहा गया कि इस क्षेत्र में टैलेंट मैनेजमेंट, टिकटिंग, डिजिटल वितरण, लाइव शो और ब्रांड साझेदारियों जैसी कई व्यावसायिक संभावनाएं मौजूद हैं।

इंटरनेट से कैसे बदली पूरी तस्वीर?
भारतीय स्टैंड-अप कॉमेडी के विस्तार में सबसे बड़ी भूमिका इंटरनेट और सोशल मीडिया ने निभाई। एक समय था जब किसी कॉमेडियन को लोकप्रिय होने के लिए टीवी चैनल या बड़े मंच की जरूरत होती थी। लेकिन यूट्यूब ने यह बाधा समाप्त कर दी। कलाकार अब सीधे दर्शकों तक पहुंचने लगे। जाकिर खान, अभिषेक उपमन्यु, अनुभव सिंह बस्सी, आकाश गुप्ता और कई अन्य कलाकारों की लोकप्रियता में यूट्यूब की बड़ी भूमिका रही। लाखों लोगों ने पहली बार स्टैंड-अप कॉमेडी को ऑनलाइन देखा। सस्ते मोबाइल इंटरनेट ने इस बदलाव को और तेज किया। स्मार्टफोन के जरिए कॉमेडी वीडियो देश के छोटे शहरों तक पहुंचने लगे। अब किसी कलाकार को राष्ट्रीय पहचान पाने के लिए टीवी पर आने की जरूरत नहीं थी।
डिजिटल प्लेटफॉर्म ने क्या निभाई भूमिका?
पिछले कुछ वर्षों में यूट्यूब, इंस्टाग्राम रील्स और पॉडकास्ट ने स्टैंड-अप कॉमेडी को पूरी तरह बदल दिया है। आज कॉमेडियन केवल मंच पर प्रदर्शन नहीं करते, बल्कि उनके कंटेंट के छोटे-छोटे क्लिप लाखों लोगों तक पहुंचते हैं। एक शो खत्म होने के बाद भी उसका प्रभाव सोशल मीडिया पर महीनों तक बना रह सकता है।
ईवाई- पार्थेनन और बुकमाईशो की संयुक्त रिपोर्ट "Beyond Attention: Into Immersion" के अनुसार, कॉमेडी भारत के सबसे तेजी से बढ़ते गैर-संगीत लाइव एंटरटेनमेंट प्रारूपों में से एक बन चुकी है। रिपोर्ट बताती है कि कॉमेडियन अब लाइव शो, सोशल मीडिया, यूट्यूब, पॉडकास्ट और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सहज रूप से काम करते हैं। इस वजह से स्टैंड-अप केवल मंचीय प्रदर्शन नहीं रह गया, बल्कि एक निरंतर कंटेंट और कम्युनिटी इंजन बन गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, कॉमेडी दर्शकों की कुछ प्रमुख विशेषताएं हैं,
- अंग्रेजी बोलने वाले, सांस्कृतिक रूप से जागरूक शहरी दर्शक
- रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी हास्य सामग्री पसंद करने वाले लोग
- युवा पेशेवर और कॉलेज छात्र
- सोशल मीडिया पर सक्रिय "सुपरफैन"
- क्षेत्रीय भाषाओं और स्थानीय संस्कृति पर आधारित हास्य पसंद करने वाले दर्शक
यानी स्टैंड-अप कॉमेडी अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं है। यह टियर-2 और टियर-3 शहरों तक भी तेजी से पहुंच रही है।
क्यों आकर्षित हो रहे हैं बड़े ब्रांड?
कॉमेडी की बढ़ती लोकप्रियता ने ब्रांडों का भी ध्यान आकर्षित किया है। ईवाई और बुकमाईशो की रिपोर्ट के अनुसार, कॉमेडी इवेंट ब्रांडों को तीन प्रमुख लाभ देते हैं, पहुंच, जुड़ाव और लॉयलटी। रिपोर्ट में बताया गया है कि कॉमेडी शो ऐसे वातावरण तैयार करते हैं जहां दर्शक भावनात्मक रूप से अधिक जुड़े होते हैं और उनका ध्यान अपेक्षाकृत अधिक केंद्रित रहता है। इस कारण ब्रांड अपने संदेश को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर सकते हैं।
उदाहरण के तौर पर:
- टीचर्स पैक्ड ड्रिंकिंग वॉटर ने कॉमेडियन वीर दास के शो के साथ साझेदारी की।
- ग्रामीण कुल्फी ने जाकिर खान के 20 से अधिक शहरों और 50 से अधिक शो वाले टूर में भागीदारी की।
इन अभियानों का उद्देश्य केवल विज्ञापन नहीं था, बल्कि कॉमेडियन के प्रशंसक समुदायों के साथ भावनात्मक जुड़ाव बनाना भी था।
किस आयुवर्ग में सबसे ज्यादा लोकप्रिय है स्टैंड-अप कॉमेडी?
स्टैंड-अप कॉमेडी की बढ़ती लोकप्रियता के पीछे युवाओं की बड़ी भूमिका रही है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कॉमेडियनों की बढ़ती पहुंच ने लाइव शो की मांग को भी बढ़ाया है। 'वीक इंडिपेंडेंट वुमन' से फेमस हुई महिला कॉमेडियन शेरॉन वर्मा के दिल्ली में हुए 40-50 मिनट के शो के टिकट की कीमत 1000-1600 रुपये के बीच थी। कई मशहूर कॉमेडियन के टिकट की कीमत 3000 से 4000 रुपये तक पहुंच जाती है। इनके शो के अधिकतर दर्शक युवा ही होते हैं।
प्रणीत से पहले और किन विवादों की वजह से चर्चा में इस तरह के शो?
बीते कुछ वक्त में कई ऐसे मौके आए जब स्टैंड-अप कॉमेडियन या उनके शो किसी वजह से विवाद में आए। ऐसे ही कुछ विवादों को यहां जानें...
1. कुणाल कामरा और राजनीतिक व्यंग्य
कुणाल कामरा पिछले कई वर्षों से राजनीतिक व्यंग्य को लेकर चर्चा में रहे हैं। उनके शो और सोशल मीडिया टिप्पणियों पर कई बार शिकायतें दर्ज हुईं। कुछ कार्यक्रम रद्द हुए और प्रदर्शन स्थलों को विरोध का सामना करना पड़ा। इसने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक आलोचना की सीमाओं पर बहस को जन्म दिया।
2. मुनव्वर फारूकी को जाना पड़ा जेल
मुनव्वर फारूकी की 2021 में हुई गिरफ्तारी भारतीय स्टैंड-अप कॉमेडी के सबसे चर्चित मामलों में शामिल है। इस घटना ने यह सवाल खड़ा किया कि कलाकारों को मंच पर कही गई या कथित रूप से कही जाने वाली बातों के लिए किस हद तक जवाबदेह ठहराया जा सकता है।
3. वीर दास का "टू इंडियाज"
वीर दास के I Come From Two Indias मोनोलॉग ने भी सुर्खियां बटोरी। कुछ लोगों ने इसे सामाजिक यथार्थ पर तीखी टिप्पणी माना, जबकि कुछ ने इसे भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला बताया। इसके बाद शिकायतें और कानूनी विवाद भी सामने आए।
4. India's Got Latent विवाद
समय रैना के शो India's Got Latent से जुड़ा विवाद इस बात का उदाहरण है कि डिजिटल युग में कॉमेडी कितनी तेजी से सार्वजनिक जांच के दायरे में आ सकती है। शो में माता-पिता को लेकर की गई टिप्पणियों को लेकर भारी आलोचना हुई और कानूनी कार्रवाई तक की नौबत आ गई।