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MEA: खाड़ी में भारतीय नाविकों वाले तीन जहाजों को अमेरिकी सेना ने बनाया निशाना, भारत ने दर्ज कराया कड़ा विरोध

पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Rahul Kumar Updated Thu, 11 Jun 2026 05:46 PM IST
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सार

ओमान तट के पास अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में भारतीय चालक दल वाले तीन विदेशी व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया गया है, जिसमें तीन भारतीय नाविकों की जान चली गई है। भारत ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिकी प्रभारी राजदूत को तलब कर औपचारिक विरोध-पत्र सौंपा है और साफ किया है कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत समुद्री मार्गों पर निर्बाध आवाजाही जारी रहनी चाहिए।

US Navy attacked 3 merchant vessels with Indian seafarers in Gulf region; issue taken up with US
ओमान तट पर जहाज पर हमला - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार

भारत ने गुरुवार को कहा कि पिछले चार दिनों में ओमान तट के पास भारतीय चालक दल वाले तीन व्यापारिक जहाज अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की चपेट में आए। इन घटनाओं में तीन भारतीय नाविकों की भी मौत हुई है। भारत ने इस मामले को अमेरिका के समक्ष मजबूती से उठाया है। यह पहला अवसर है जब भारत ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि भारतीय नाविकों वाले जहाज अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई का निशाना बने हैं।



चार दिन में तीन जहाजों को अमेरिका ने बनाया निशाना
आठ जून को पलाऊ ध्वज वाले तेल टैंकर मैरिवेक्स पर अमेरिकी बलों की कार्रवाई हुई थी। जहाज पर 24 भारतीय नाविक सवार थे। इस घटना के बाद जहाज निष्क्रिय हो गया था, हालांकि सभी चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया। इसके बाद 10 जून को पलाऊ ध्वज वाले एक अन्य टैंकर सेटेबेलो पर हमला हुआ। जहाज पर सवार 24 भारतीय नाविकों में से तीन की मौत हो गई।
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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अंतर-मंत्रालयी मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि भारत अपने समुद्री समुदाय की सुरक्षा और कल्याण को अत्यंत महत्व देता है। उन्होंने कहा कि सेटेबेलो पर हमले के बाद भारत ने अमेरिकी पक्ष के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया था।  उन्होंने बताया कि भारत में अमेरिकी प्रभारी राजदूत जेसन मीक्स को विदेश मंत्रालय तलब किया गया और उन्हें भारत की गहरी चिंता से अवगत कराया गया। साथ ही औपचारिक विरोध-पत्र भी सौंपा गया।
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जायसवाल ने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं बंद होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत ने अमेरिका को स्पष्ट रूप से बताया है कि विवादों के समाधान का रास्ता संवाद और कूटनीति है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप होर्मुज जलडमरूमध्य से निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत ने अपने नागरिकों के जीवन, सुरक्षा और कल्याण को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट रूप से रखी है। विदेश मंत्रालय के अनुसार इन घटनाओं में शामिल तीनों जहाज विदेशी ध्वज वाले थे। इनमें से दो जहाज पलाऊ और एक गिनी-बिसाऊ के ध्वज के तहत संचालित हो रहा था। ये भारतीय स्वामित्व वाले जहाज नहीं थे। 

जलवीर पर मौजूद नाविक बचाए गए
पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने बताया कि जलवीर पर मौजूद नाविकों को निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि सेटेबेलो से शेष सभी 25 चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। इनमें 21 भारतीय, दो पाकिस्तानी, एक रूसी और एक यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं। मुकेश मंगल ने बताया कि मृतक नाविकों के परिवारों को सीमैन वेलफेयर फंड सोसायटी की ओर से 10-10 लाख रुपये की सहायता राशि देने को कहा गया है।

उन्होंने यह भी बताया कि खाड़ी क्षेत्र में 18 हजार से अधिक भारतीय नाविक मौजूद हैं। इनमें 13 भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर तैनात 562 चालक दल के सदस्य शामिल हैं। इनमें से 329 होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में और 233 ओमान की खाड़ी में स्थित जहाजों पर कार्यरत हैं। रणधीर जायसवाल ने कहा कि तीन में से दो जहाज अमेरिका के ट्रेजरी विभाग के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (ओएफएसी) द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के दायरे में थे, जबकि तीसरे जहाज को नियमों का अनुपालन नहीं करने वाला माना गया था।

अमेरिका ने माना, 'एमटी जलवीर पर ओमान की खाड़ी में दागीं मिसाइलें'
अमेरिका ने माना है कि उसने गिनी-बिसाऊ के झंडे वाले एमटी जलवीर को निशाना बनाया है। कथित तौर पर उनके निर्देशों का पालन न करने के कारण ओमान की खाड़ी में एक तेल टैंकर को निष्क्रिय किया गया।सेंटकॉम ने इसे लेकर बयान जारी किया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, जहाज ईरानी तेल के परिवहन की कोशिश कर रहा था और ईरान के खिलाफ लागू नाकाबंदी का उल्लंघन कर रहा था। इस सप्ताह अमेरिकी कार्रवाई का शिकार बनने वाला यह तीसरा वाणिज्यिक जहाज है।

यूनाइटेड नेशन्स सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने बताया कि उसने गिनी-बिसाऊ के झंडे वाले एमटी जलवीर के खिलाफ कार्रवाई की। अमेरिकी दावे के अनुसार, जहाज ईरान से तेल लेकर ओमान की खाड़ी के रास्ते आगे बढ़ने का प्रयास कर रहा था। जब चालक दल ने अमेरिकी बलों के निर्देशों का बार-बार पालन नहीं किया, तो एक अमेरिकी विमान ने जहाज के इंजन रूम को निशाना बनाते हुए दो हेलफायर मिसाइलें दागीं। सेंटकॉम के अनुसार, इससे पहले सोमवार और मंगलवार को क्रमशः पालाउ-ध्वज वाले एमटी मैरीवेक्स और एमटी सेट्टेबेलो को भी निशाना बनाया गया था। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि मैरीवैक्स ईरानी बंदरगाह की ओर जा रहा था, जबकि सेट्टेबेलो ईरानी तेल ले जा रहा था।

ओमान की खाड़ी में भारतीय नाविकों वाले जहाजों एमटी सेट्टेबेलो और एमटी जलवीर पर हुए हमलों को लेकर भारत ने अमेरिका के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। भारतीय जहाजों पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में 3 भारतीय नाविकों की मौत के बाद, भारत ने नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के उप-प्रमुख को तलब कर गहरी आपत्ति जताई है। 10 जून को एमटी सेट्टेबेलो पर किए गए हमले में भारत के तीन नाविकों की मौत हो गई। इससे पहले मंगलवार को एमटी मैरीवेक्स पर हमला हुआ था जिसके बाद 24 नाविकों को रेसेक्यू किया गया था। अमेरिकी सेना ने कहा कि 13 अप्रैल को नाकाबंदी शुरू होने के बाद से उसके बलों ने निर्देशों का पालन न करने वाले कुल नौ जहाजों को निष्क्रिय किया है। वहीं, 135 जहाजों को दिशा बदलने के लिए मजबूर किया गया, जबकि मानवीय सहायता से जुड़े 42 जहाजों को गुजरने की अनुमति दी गई।

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