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Explainer: मध्य प्रदेश में भाजपा राज्यसभा की तीनों सीट जीती, अब मीनाक्षी नटराजन के पास बचे हैं कौन से विकल्प?

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Thu, 11 Jun 2026 06:42 PM IST
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सार

मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवारों को आज ही जीत का प्रमाण पत्र दे दिया गया। दरअसल, नाम वापसी की समय-सीमा खत्म होने के बाद और केवल तीन पदों के लिए तीन ही नामांकन शेष रहने के चलते सभी उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं। हालांकि, मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के मामले पर अभी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई बाकी है। ऐसे में आगे मध्य प्रदेश में घोषित हुए चुनाव नतीजों का क्या होगा, इस पर देश की नजर बनी हुई है। 

Madhya Pradesh BJP Candidates in Rajya Sabha Election Commission Meenakshi Natarajan Congress Supreme Court wa
मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा उम्मीदवार के तौर पर नामांकन खारिज होने पर विवाद। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मध्य प्रदेश में चुनावी सरगर्मियां तेज हैं। दरअसल, दो दिन पहले ही राज्य में राज्यसभा चुनाव के लिए पर्चा भरने वाली मीनाक्षी नटराजन का नामांकन इसलिए खारिज कर दिया गया, क्योंकि उनके हलफनामे में तेलंगाना में चल रहे एक केस की जानकारी नहीं दी गई थी। इस मामले में भाजपा की शिकायत पर मध्य प्रदेश में रिटर्निंग ऑफिसर ने नटराजन का नामांकन खारिज कर दिया था। इसके चलते तीनों राज्यसभा सीटों पर भाजपा की जीत तय हो गई। गुरुवार को रिटर्निंग अफसर ने तीनों भाजपा उम्मीदवारों को प्रमाणपत्र भी सौंप दिया। 


गौरतलब है कि राज्यसभा चुनाव के लिए आज 11 जून को दोपहर 3 बजे तक नाम वापसी की अंतिम समय-सीमा तय है। लेकिन कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद स्थिति यह बन गई कि तीन सीटों के मुकाबले केवल तीन ही उम्मीदवार मैदान में रह गए, जिससे चुनाव निर्विरोध हो गया। हालांकि, दूसरी तरफ कांग्रेस नेतृत्व ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन के खारिज होने के खिलाफ न सिर्फ चुनाव आयोग से शिकायत की है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को भी उठाया है। ऐसे में अब अदालत के दखल के बाद ही यह तय होगा कि मीनाक्षी की तरफ से अपने चुनावी हलफनामे में एक केस में नोटिस मिलने की बात का जिक्र न करना सही था या नहीं और इसके आधार पर चुनाव आयोग के फैसले की वैधता क्या है।
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इस विषय को लेकर हमने बात की सुप्रीम कोर्ट के वकील और सांविधानिक मामलों के विशेषज्ञ विराग गुप्ता से और आठ सवालों के जरिए उनसे जाना कि यह पूरा मुद्दा क्या है और अब आगे क्या होगा...


सवाल-1: नामांकन के साथ आपराधिक मामले की जानकारी देना क्यों जरुरी है?

जवाब: राजनीति के अपराधीकरण को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2003 में पीयूसीएल मामले में और सितम्बर 2018 में लोक प्रहरी मामले में अहम फैसले दिये थे। उनके अनुसार प्रत्याशियों सभी आपराधिक मामलों का खुलासा करना जरुरी है। चुनाव आयोग की गाइडलाइंस के अनुसार सभी प्रकार के लम्बित आपराधिक मामले और जिनमें सजा हो गई है उनका पूरा विवरण रिटर्निंग ऑफिसर को देना जरुरी है। कैंडिडेट्स की सूचना के आधार पर पार्टी को भी अपनी वेबसाइट में इन विवरणों को सार्वजनिक करने के साथ टीवी और अखबार में विज्ञापन देना चाहिए।
 

सवाल-2: भाजपा ने रिटर्निंग आफिसर के सामने क्या आपत्ति की थी?

जवाब: भाजपा उम्मीदवार महेश केवट और महासचिव राहुल कोठारी की आपत्ति पर निर्वाचन अधिकारी ने आदेश दिया है कि मीनाक्षी नटराजन ने हैदराबाद की अदालत की अक्टूबर 2025 का नोटिस का जबाब दिया था। लेकिन उस आपराधिक मामले का नामांकन पत्र के साथ दाखिल फार्म-26 में विवरण नहीं दिया। इसके जवाब में कांग्रेस नेताओं का तर्क था कि उस आपराधिक मामले में अदालत ने संज्ञान नहीं लिया। इसलिए उसका विवरण देने की जरुरत नहीं थी। लेकिन यह तर्क और बचाव कानून सम्मत नहीं है।


सवाल-3: आपराधिक मुकदमे का कोर्ट ने संज्ञान नहीं लिया तो क्या जानकारी देना जरूरी नहीं है ?

जवाब: अगर किसी मामले में चार्जशीट नहीं हुई हो या कोर्ट ने संज्ञान नहीं लिया, तो भी प्रत्याशियों को मामले का पूरा विवरण देना जरुरी है। इस मामले में एफआईआर, चार्जशीट या सजा की बातें ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं हैं। चुनाव आयोग ने 19 मार्च 2019 को सभी राजनीतिक दलों को पत्र लिखकर एफएक्यू जारी किया था। उसके सवाल नं-8 के जवाब के अनुसार जिन मामलों में सिर्फ एफआईआर दर्ज हुई हो उनका फार्म-26 के आइटम-5 में पूरा विवरण देना जरुरी है।
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सवाल-4: क्या उस मामले की जानकारी नहीं देने पर रिटर्निंग ऑफिसर नामांकन रद्द कर सकते हैं?

जवाब: सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार चुनाव आयोग ने अनेक आदेश जारी किये हैं। चुनाव आयोग द्वारा 19 मार्च 2019 को जारी एफएक्यू में सवाल-12 के जवाब के अनुसार रिटर्निंग ऑफिसर को विवरण की सत्यता की पुष्टि करना जरुरी नहीं है। एफएक्यू में सवाल-14 में दिये गये जवाब के अनुसार अगर किसी प्रत्याशी ने सही या पूरी जानकारी नहीं दी तो चुनाव के परिणाम के बाद हाईकोर्ट में उनके खिलाफ चुनाव याचिका दायर हो सकती है। गलत या अधूरी जानकारी के मामलों में चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट भेज सकता है, जिससे प्रत्याशी के खिलाफ कोर्ट के कंटेंम्ट का मामला चलाया जा सके।

सवाल-5: क्या मामले की जानकारी नहीं देने से मीनाक्षी के खिलाफ अयोग्यता का मामला बनता है?

जवाब: आपराधिक मुकदमें दर्ज होने से कोई अपराधी नहीं होता। चार्जशीट के बाद लोकसेवकों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। जबकि आपराधिक मामले में 2 साल से ज्यादा सजा हो तो फिर उन्हें अयोग्य घोषित किया जा सकता है। प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के अनुसार पूरा विवरण नहीं देने के मामलों में शो कॉज नोटिस जारी करके  प्रत्याशी के जवाब के बाद ही चुनाव अधिकारी को निर्णय लेना चाहिए। लेकिन सिर्फ गलत या अधूरी जानकारी देने के आरोप में नामांकन को खारिज करने के लिए रिटर्निंग ऑफिसर को अधिकार नहीं है। 

सवाल-6: जानकारी नहीं देने पर मीनाक्षी के खिलाफ क्या कार्रवाई हो सकती है?

जवाब: चुनाव आयोग के एफएक्यू में दिए गए कानूनी प्रावधानों के अनुसार मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ आईपीसी की धारा-171-जी या बीएनएस की धारा- 175 के अनुसार मुकदमा दर्ज हो सकता है। जनप्रतिनिधित्व कानून-1951 की धारा 123 (4) के अनुसार गलत या अधूरी जानकारी देने के लिए भ्रष्ट आचरण के मामले में मीनाक्षी के खिलाफ चुनाव याचिका दायर की जा सकती है। पीयूसीएल और लोकप्रहरी मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अनुसरण नहीं करने के लिए मीनाक्षी के खिलाफ कंटेम्पट का मामला शुरु करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग अर्जी लगा सकता है।  


सवाल-7: सुप्रीम कोर्ट में याचिका की सुनवाई में क्या हुआ?

जवाब: मध्य प्रदेश से राज्यसभा सीट के लिए मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 11 जून की सुबह 1:48 बजे डिजिटल माध्यम से याचिका दायर हुई थी। याचिका के अनुसार रिटर्निंग ऑफिसर  ने गैर-कानूनी, मनमाने और पक्षपातपूर्ण तरीके से नामांकन रद्द किया है, जिसे स्थगित करने की जरुरत है। जस्टिस पी. के. मिश्रा और जस्टिस अतुल चन्द्रूकर की पीठ के सामने सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने मीनाक्षी की तरफ से पेश होकर अर्जेंट सुनवाई और अंतरिम स्थगन आदेश जारी करने की मांग की। चुनाव आयोग की तरफ से पेश सीनियर एडवोकेट डी. एस. नायडू ने कहा कि उन्हें याचिका की कापी नहीं दी गई है और उसे पढ़ने के लिए समय की जरुरत है। जजों ने मौखिक तौर पर टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई की वैधता पर सवाल खड़े किये। चुनाव याचिकाओं का निर्धारण हाई कोर्ट में होता है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट जाने का निर्देश दे सकती है।

सवाल-8: परिणाम की घोषणा के बाद क्या याचिका में बदलाव करना होगा?

जवाब: मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटों के लिए नाम वापसी की आखिरी तारीख 11 जून थी। मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से स्थगन आदेश यानी स्टे नहीं मिला है तो भाजपा के तीनों उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिए गए हैं। चुनाव आयोग ने जो शेड्यूल जारी किया है उसके अनुसार मतदान की तारीख खत्म होने के बाद ही रिजल्ट की घोषणा होनी चाहिए। अब सुप्रीम कोर्ट में परिणामों को भी चुनौती देनी होगी, जिसके लिए याचिका में बदलाव करना होगा। मेंशनिंग के बाद याचिका लंबित है इसलिए तीसरी राज्यसभा सीट के परिणाम का निर्धारण सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के फैसले से होगा।
 

क्या है वह मामला, जिसे लेकर रद्द हुआ नटराजन का नामांकन?

क्या था मामला?
हैदराबाद की फोर्थ एडिशनल चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अदालत में कॉरपोरेटर ए. श्रीलता ने मीनाक्षी नटराजन सहित अन्य लोगों के खिलाफ एक परिवाद दायर किया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि शिव कुमार रेड्डी नामक व्यक्ति ने उनके साथ छेड़छाड़ की और मीनाक्षी नटराजन ने उसे संरक्षण दिया। शिकायत में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराएं 356, 61, 45, 46, 351(2), 3(5) और 79 के तहत कार्रवाई की मांग की गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस पूरे मामले की शुरुआत 2021 में ही हो गई थी। हैदराबाद (तारनाका) की एक पूर्व महिला नगर कॉर्पोरेटर, जो पहले तेदेपा में थीं और बाद में कांग्रेस में आईं, ने चतुर्थ अतिरिक्त मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट में निजी याचिका दायर की थी। उस महिला नेता का मुख्य विवाद तेलंगाना के ही एक अन्य कांग्रेस नेता से था। महिला ने आरोप लगाया था कि उनकी जान को खतरा है और कांग्रेस के नेता उन्हें परेशान कर रहे हैं।

इसमें मीनाक्षी नटराजन का नाम कैसे आया? 
चूंकि, मीनाक्षी नटराजन उस समय तेलंगाना कांग्रेस की प्रभारी थीं, शिकायतकर्ता महिला ने अदालत को बताया कि उन्होंने इस उत्पीड़न की शिकायत मीनाक्षी नटराजन और अन्य वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं से की थी। लेकिन कार्रवाई करने के बजाय, ये नेता कथित तौर पर उस महिला पर केस वापस लेने का दबाव बना रहे थे।

इस निजी शिकायत के आधार पर हैदराबाद की अदालत ने मीनाक्षी नटराजन को एक नोटिस जारी किया था कि वे अदालत में पेश होकर अपना पक्ष रखें। जब कोई व्यक्ति कोर्ट में प्राइवेट कम्प्लेंट करता है, तो कोर्ट सीधे उस शख्स को अपराधी नहीं मान लेती, जिसके खिलाफ शिकायत हो। कोर्ट पहले यह जांचने के लिए नोटिस भेजती है कि 'क्या इस शिकायत में कोई दम है?' कांग्रेस के मुताबिक, इस मामले में अदालत ने अब तक आरोप तय नहीं किए हैं और सुनवाई जारी है। 

मामले पर क्या बोलीं भाजपा-कांग्रेस?

1. भाजपा
भाजपा की ओर से प्रस्तुत आपत्ति में कहा गया है कि यह मामला न्यायालय में लंबित है और मीनाक्षी नटराजन इस प्रकरण में अपना जवाब भी दाखिल कर चुकी हैं। इसके बावजूद राज्यसभा चुनाव के लिए दाखिल शपथ पत्र में इस मामले का उल्लेख नहीं किया गया। भाजपा ने इसे तथ्यों को छिपाने का मामला बताते हुए नामांकन पर कार्रवाई और उसे निरस्त करने की मांग की है।

2. कांग्रेस
दूसरी ओर, कांग्रेस का तर्क है कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ किसी न्यायालय ने अभी तक आरोप तय नहीं किए हैं और न ही उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज है। इसलिए भाजपा की आपत्ति का कोई कानूनी आधार नहीं है।
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