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Naveen Parmuwal

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शब्दों के पीछे का चेहरा
जनवरी 2026 से अमर उजाला डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, अपराध, राजनीति, धर्म-अध्यात्म, शिक्षा, उभरती तकनीक और समसामयिक मुद्दों पर लगातार लेखन और रिपोर्टिंग। प्रिंट पत्रकारिता के दौरान घटनास्थल तक पहुंचकर तथ्यों के आधार पर खबर जुटाना और उसे पाठकों तक जिम्मेदारी के साथ पहुंचाना हमेशा प्राथमिकता रही। जटिल विषयों को आसान भाषा में समझाना पसंद। सिर्फ खबर बताने तक सीमित नहीं, बल्कि उसके पीछे की वजह, असर और पूरी तस ... ...और पढ़ें

शब्दों के पीछे का चेहरा
जनवरी 2026 से अमर उजाला डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, अपराध, राजनीति, धर्म-अध्यात्म, शिक्षा, उभरती तकनीक और समसामयिक मुद्दों पर लगातार लेखन और रिपोर्टिंग। प्रिंट पत्रकारिता के दौरान घटनास्थल तक पहुंचकर तथ्यों के आधार पर खबर जुटाना और उसे पाठकों तक जिम्मेदारी के साथ पहुंचाना हमेशा प्राथमिकता रही। जटिल विषयों को आसान भाषा में समझाना पसंद। सिर्फ खबर बताने तक सीमित नहीं, बल्कि उसके पीछे की वजह, असर और पूरी तस्वीर पाठकों के सामने रखने में विश्वास।

मेरी कहानी, मेरी बुनियाद
शिक्षा नगरी और खाटू नगरी सीकर (राजस्थान) से ताल्लुक। शुरुआती शिक्षा कॉमर्स बैकग्राउंड से पूरी की। हालांकि, आंकड़ों और व्यापार की दुनिया से कहीं ज्यादा लगाव शब्दों, समाज और जनसरोकारों से रहा। यही झुकाव पत्रकारिता की राह तक ले आया। कम बोलना, ज्यादा सुनना। हर माहौल में शांत रहना पसंद। तकनीक से खास लगाव। कंप्यूटर का बिना इंजीनियरिंग डिग्री वाला जुगाड़ू मास्टर। एआई टूल्स के साथ नए-नए प्रयोग करना और उनसे कुछ नया बनाना पसंद है। कीवर्ड कूटने से लेकर कैमरे का शटर दबाने तक, कंटेंट की दुनिया का लगभग हर काम करने में दिलचस्पी। 

शब्दों की लय
पत्रकारिता के सफर में किए गए काम को समय-समय पर सराहना मिली। साल 2019 में डिजिटल पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रतिष्ठित पंडित झाबरमल शर्मा पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित। साल 2020 में प्रिंट मीडिया में बेहतरीन ग्राउंड रिपोर्टिंग के लिए गणतंत्र दिवस पर जिला स्तरीय सम्मान। पत्रकारिता में तथ्यों को सबसे ऊपर रखना पसंद। खबर चाहे कितनी भी तेज हो, फैक्ट-चेकिंग से समझौता नहीं। तेजी से बदलती डिजिटल पत्रकारिता के साथ खुद को लगातार अपडेट रखना और हर दिन कुछ नया सीखना आज भी आदत का हिस्सा।

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