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भोजशाला परिसर: मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुनवाई करेगा शीर्ष कोर्ट; हाईकोर्ट ने बताया था मंदिर; क्या है विवाद?
Mon, 13 Jul 2026 06:39 PM IST
निर्मल कांत
एएनआई, नई दिल्ली।
एएनआई, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 13 Jul 2026 06:39 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला विवाद में मुस्लिम पक्ष की याचिकाओं को सूचीबद्ध करने की अनुमति दी है। मुस्लिम पक्ष ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर बताया गया था। पूरा मामला है क्या, पढ़िए रिपोर्ट-
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सहमति दी कि वह मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष की दायर कई याचिकाओं पर जल्द सुनवाई करेगा। चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने कहा कि मामले को जल्द ही सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हुजेफा अहमदी ने जल्द सुनवाई की मांग की थी।
मस्जिद की देखरेख करने वाले काजी मोइनुद्दीन और इस मामले में पक्षकार बने अन्य लोगों ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।
हाईकोर्ट ने क्या फैसला दिया था?
दोनों पक्षों ने दाखिल की याचिका
हिंदू समुदाय इस स्थान को भोजशाला यानी देवी सरस्वती का मंदिर बताता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में पहचानता है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद मामले से जुड़े मुस्लिम पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट में पहुंचकर इस आदेश को चुनौती दी। वहीं, फैसले को चुनौती दिए जाने की संभावना को देखते हुए हिंदू पक्षकारों ने भी सुप्रीम कोर्ट में पूर्व सूचना याचिका (कैविएट) दाखिल की है। इसमें मांग की गई है कि मामले में किसी भी याचिका पर फैसला सुनाने से पहले उनकी बात भी सुनी जाए।
ये भी पढ़ें: पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई की मांग, सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई जनहित याचिका
विवाद कहां से शुरू हुआ?
एएसआई की रिपोर्ट में क्या कहा गया?
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की सर्वे रिपोर्ट में कहा गया था कि यह स्मारक पहले के मंदिरों के अवशेषों से बनाया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा मस्जिद का ढांचा कई सदियों बाद बनाया गया। इसके लिए शिलालेखों, मूर्तियों के टुकड़ों और स्थापत्य अवशेषों को आधार बताया गया।
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मस्जिद की देखरेख करने वाले काजी मोइनुद्दीन और इस मामले में पक्षकार बने अन्य लोगों ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।
हाईकोर्ट ने क्या फैसला दिया था?
- मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 15 मई को फैसला सुनाते हुए कहा था कि विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर है।
- कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के सात अप्रैल 2003 के उस आदेश को भी रद्द कर दिया था, जिसमें मुस्लिम समुदाय को इस स्थान पर शुक्रवार की नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई थी।
- हाईकोर्ट ने मुस्लिम समुदाय को यह छूट दी थी कि वह राज्य सरकार से जिले में मस्जिद बनाने के लिए अलग जमीन आवंटित करने की मांग कर सकता है।
- कोर्ट ने यह भी कहा था कि भोजशाला परिसर के प्रशासन और प्रबंधन का फैसला केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण कर सकते हैं।
- हाईकोर्ट ने कहा था कि भोजशाला परिसर प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत 11वीं सदी का संरक्षित स्मारक है।
- कोर्ट ने कहा था कि विवादित परिसर का धार्मिक स्वरूप भोजशाला का है।
- कोर्ट ने कहा कि यह देवी वाग्देवी सरस्वती से जुड़ा मंदिर है, जिसका संबंध परमार शासक राजा भोज से माना जाता है। राजा भोज को धार को संस्कृत शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित करने का श्रेय दिया जाता है।
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दोनों पक्षों ने दाखिल की याचिका
हिंदू समुदाय इस स्थान को भोजशाला यानी देवी सरस्वती का मंदिर बताता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में पहचानता है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद मामले से जुड़े मुस्लिम पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट में पहुंचकर इस आदेश को चुनौती दी। वहीं, फैसले को चुनौती दिए जाने की संभावना को देखते हुए हिंदू पक्षकारों ने भी सुप्रीम कोर्ट में पूर्व सूचना याचिका (कैविएट) दाखिल की है। इसमें मांग की गई है कि मामले में किसी भी याचिका पर फैसला सुनाने से पहले उनकी बात भी सुनी जाए।
ये भी पढ़ें: पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई की मांग, सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई जनहित याचिका
विवाद कहां से शुरू हुआ?
- साल 2022 में एक हिंदू संगठन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
- संगठन ने भोजशाला के धार्मिक स्वरूप का पता लगाने के लिए वैज्ञानिक सर्वे कराने की मांग की थी।
- 11 मार्च 2024 को हाईकोर्ट ने एक एकड़ क्षेत्र में 22 मार्च से 30 जून तक सर्वे कराने का आदेश दिया था।
एएसआई की रिपोर्ट में क्या कहा गया?
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की सर्वे रिपोर्ट में कहा गया था कि यह स्मारक पहले के मंदिरों के अवशेषों से बनाया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा मस्जिद का ढांचा कई सदियों बाद बनाया गया। इसके लिए शिलालेखों, मूर्तियों के टुकड़ों और स्थापत्य अवशेषों को आधार बताया गया।