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महात्मा फुले की 200वीं जयंती: दो साल के राष्ट्रव्यापी समारोह का आगाज, PM की अध्यक्षता में समिति करेगी निगरानी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nirmal Kant
Updated Sun, 12 Apr 2026 02:17 AM IST
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सार
सरकार ने महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती के अवसर पर 2026 से 2028 तक चलने वाले दो साल के राष्ट्रव्यापी समारोह का आगाज कर दिया है। इस पूरे आयोजन की निगरानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति करेगी, जिसमें देश की प्रमुख राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक हस्तियां शामिल हैं। पढ़िए रिपोर्ट-
समाज सुधारक ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले की प्रतिमा (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
सरकार ने समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती के उपलक्ष्य में दो साल तक चलने वाले राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम की शुरुआत कर दी है। यह आयोजन वर्ष 2027 में उनकी जयंती पूरी होने तक चलेगा। सरकार ने बताया कि इस राष्ट्रीय स्तर के आयोजन की निगरानी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है। यह समिति पूरे कार्यक्रम की दिशा और नीति तय करेगी।
समिति में कौन-कौन शामिल हैं?
इस 126 सदस्यीय समिति में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रतिभा पाटिल, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत कई राज्यपाल, मुख्यमंत्री, सांसद, शिक्षाविद, न्यायविद, आध्यात्मिक नेता और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं।
11 अप्रैल 2026 से 11 अप्रैल 2028 तक चलेगा समारोह
यह राष्ट्रव्यापी समारोह 11 अप्रैल 2026 से 11 अप्रैल 2028 तक चलेगा। इसे गृह मंत्री की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय कार्यान्वयन समिति (एनआईसी) ने मंजूरी दी है। इसकी औपचारिक शुरुआत नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में 'फुले एक्रॉस इंडिया' नाम से सांस्कृतिक कार्यक्रम के जरिये की गई। इसे सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने आयोजित किया।
सांस्कृतिक प्रस्तुति में दिखी भारत की विविधता
कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की विविधता को दिखाया गया, जो फुले के जीवन, विचारों और समाज सुधार आंदोलनों से प्रेरित थीं। इस दौरान फुले के योगदान पर आधारित एक विशेष फिल्म भी दिखाई गई, जिसमें उनके सामाजिक न्याय, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और समानता के कार्यों को दिखाया गया।
ये भी पढ़ें: भारत-भूटान रिश्तों में नई ऊर्जा: पुनात्सांगछू-1 परियोजना का काम फिर शुरू, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल का दौरा
समिति करेगी आयोजन की निगरानी
सरकार ने कहा कि उच्च स्तरीय समिति कार्यक्रमों की नीति, रूपरेखा और समय-सीमा तय करेगी तथा पूरे आयोजन की निगरानी करेगी। इस पूरे आयोजन में मंत्रालयों, राज्य सरकारों, शैक्षणिक संस्थानों, सांस्कृतिक संगठनों और नागरिक समाज की भागीदारी होगी। इसमें सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनी, सेमिनार, युवा सहभागिता और शैक्षणिक चर्चाएं शामिल होंगी।
महात्मा ज्योतिबा फुले का जन्म 1827 में हुआ था और उन्होंने अपना जीवन समाज के वंचित वर्गों के उत्थान और शिक्षा के प्रसार के लिए समर्पित किया। सरकार ने कहा कि यह दो साल का आयोजन फुले की विरासत को सम्मान देने और युवाओं को समानता, शिक्षा और सामाजिक न्याय के उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करने का प्रयास है।
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समिति में कौन-कौन शामिल हैं?
इस 126 सदस्यीय समिति में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रतिभा पाटिल, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत कई राज्यपाल, मुख्यमंत्री, सांसद, शिक्षाविद, न्यायविद, आध्यात्मिक नेता और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं।
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11 अप्रैल 2026 से 11 अप्रैल 2028 तक चलेगा समारोह
यह राष्ट्रव्यापी समारोह 11 अप्रैल 2026 से 11 अप्रैल 2028 तक चलेगा। इसे गृह मंत्री की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय कार्यान्वयन समिति (एनआईसी) ने मंजूरी दी है। इसकी औपचारिक शुरुआत नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में 'फुले एक्रॉस इंडिया' नाम से सांस्कृतिक कार्यक्रम के जरिये की गई। इसे सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने आयोजित किया।
सांस्कृतिक प्रस्तुति में दिखी भारत की विविधता
कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की विविधता को दिखाया गया, जो फुले के जीवन, विचारों और समाज सुधार आंदोलनों से प्रेरित थीं। इस दौरान फुले के योगदान पर आधारित एक विशेष फिल्म भी दिखाई गई, जिसमें उनके सामाजिक न्याय, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और समानता के कार्यों को दिखाया गया।
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समिति करेगी आयोजन की निगरानी
सरकार ने कहा कि उच्च स्तरीय समिति कार्यक्रमों की नीति, रूपरेखा और समय-सीमा तय करेगी तथा पूरे आयोजन की निगरानी करेगी। इस पूरे आयोजन में मंत्रालयों, राज्य सरकारों, शैक्षणिक संस्थानों, सांस्कृतिक संगठनों और नागरिक समाज की भागीदारी होगी। इसमें सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदर्शनी, सेमिनार, युवा सहभागिता और शैक्षणिक चर्चाएं शामिल होंगी।
महात्मा ज्योतिबा फुले का जन्म 1827 में हुआ था और उन्होंने अपना जीवन समाज के वंचित वर्गों के उत्थान और शिक्षा के प्रसार के लिए समर्पित किया। सरकार ने कहा कि यह दो साल का आयोजन फुले की विरासत को सम्मान देने और युवाओं को समानता, शिक्षा और सामाजिक न्याय के उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करने का प्रयास है।