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Biomedical Waste: अस्पताल का कचरा बना बड़ा खतरा: यूपी समेत 17 राज्य नियमों में हुए फेल, क्या होगी कार्रवाई?
Mon, 10 Aug 2026 06:44 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Mon, 10 Aug 2026 06:44 AM IST
सार
बायोमेडिकल कचरे के निपटान को लेकर देश के 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नियमों की अनदेखी सामने आई है। सीपीसीबी ने एनजीटी को बताया कि 9,178 स्वास्थ्य केंद्रों में सिर्फ 5,715 ही तय नियमों के मुताबिक मिले। उत्तर प्रदेश और राजस्थान के सभी संबंधित केंद्र नियमों का पालन करते नहीं पाए गए। अब सवाल है कि आठ सप्ताह में सुधार नहीं हुआ तो सरकार क्या कार्रवाई करेगी? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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आठ सप्ताह में सुधार नहीं हुआ तो क्या कार्रवाई होगी?
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
बायोमेडिकल यानी अस्पतालों से निकलने वाले कचरे के निपटान को लेकर देश के कई राज्यों में गंभीर लापरवाही सामने आई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण को बताया है कि 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बायोमेडिकल कचरे के निपटान से जुड़े नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। मामला अस्पतालों में कचरे को जमीन में गहराई तक दबाकर निपटाने यानी ‘डीप बरीअल’ से जुड़ा है। इस व्यवस्था में नियमों की अनदेखी पर्यावरण और भूजल के लिए खतरा पैदा कर सकती है। खास बात यह है कि उत्तर प्रदेश के सभी 111 और राजस्थान के सभी 33 संबंधित स्वास्थ्य केंद्र नियमों का पालन करते नहीं मिले।
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9,178 स्वास्थ्य केंद्रों में कितने नियमों के मुताबिक मिले?
सीपीसीबी की रिपोर्ट के मुताबिक देश में 9,178 स्वास्थ्य केंद्र बायोमेडिकल कचरे के लिए ‘डीप बरीअल’ व्यवस्था का इस्तेमाल कर रहे थे। इनमें केवल 5,715 स्वास्थ्य केंद्र ही तय मानकों के अनुरूप पाए गए। यानी बड़ी संख्या में केंद्रों पर नियमों का पालन नहीं हो रहा था। सबसे बड़ी खामी 477 स्वास्थ्य केंद्रों में मिली, जहां कचरा दबाने वाली जगह और भूजल स्तर के बीच कम से कम छह मीटर की दूरी बनाए रखने के नियम का पालन नहीं किया गया। इसके अलावा 341 स्वास्थ्य केंद्रों के पास संबंधित प्राधिकरण की जरूरी मंजूरी भी नहीं थी। यह स्थिति बताती है कि कचरे के निपटान में सिर्फ व्यवस्था की कमी नहीं, बल्कि जरूरी अनुमति और सुरक्षा मानकों की भी अनदेखी हुई है।
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