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'दूसरे धर्मों के त्योहारों पर चुप रहते हैं': दीया मिर्जा-नसीरुद्दीन को भाजपा ने घेरा; क्या बोले गौरव भाटिया?
Tue, 03 Nov 2026 04:26 PM IST
निर्मल कांत
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 03 Nov 2026 04:26 PM IST
सार
अभिनेत्री दीया मिर्जा के दिवाली वीडियो पर विवाद के बीच भाजपा ने उन्हें और अभिनेता नसीरुद्दीन शाह को पर्यावरण के मुद्दे पर घेरा है। भाजपा ने आरोप लगाया कि दोनों दूसरे धर्मों के त्योहारों पर प्रदूषण के मुद्दे पर चुप रहते हैं। भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने क्या कुछ कहा? पढ़िए इस रिपोर्ट में।
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गाैरव भाटिया
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विस्तार
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मंगलवार को अभिनेत्री दीया मिर्जा और अभिनेता नसीरुद्दीन शाह पर पर्यावरण के मुद्दों को लेकर 'चुनिंदा विरोध' करने का आरोप लगाया। भाजपा ने कहा कि ये लोग दूसरे धर्मों के त्योहारों के दौरान प्रदूषण से जुड़े मुद्दों पर चुप रहते हैं। लेकिन हिंदू त्योहारों पर सवाल उठाते हैं।
भाजपा ने क्या आरोप लगाए?
भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा, संदेश देने में दोहरा रवैया है। आप कहते हैं कि लोगों को पर्यावरण का ध्यान रखना चाहिए। लेकिन जब ईद और बकरीद आती है और बकरों के काटे जाने से जल प्रदूषण होता है, तो नसीरुद्दीन शाह और दीया मिर्जा जैसे लोग एक शब्द भी नहीं बोलते।
भाटिया से बॉम्बे हाईकोर्ट की टिप्पणी के बारे में पूछा गया था। हाईकोर्ट ने बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के पर्यावरण के अनुकूल और पटाखा-मुक्त दिवाली अभियान के लिए दीया मिर्जा के वीडियो को लेकर हुए विवाद पर 'गहरा दुख और नाराजगी' जताई थी। साथ ही, नगर निकाय को उनका वीडियो दोबारा अपलोड करने का निर्देश दिया था।
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हिंदू त्योहारों पर ही चिंता क्यों जताते हैं?
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि उन्होंने हाईकोर्ट का आदेश नहीं देखा है। इसलिए वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि कुछ लोग हिंदू त्योहारों के दौरान पर्यावरण की सुरक्षा और ध्वनि प्रदूषण को लेकर चिंता जताते हैं। लेकिन दूसरे धर्मों के त्योहार मनाए जाने पर चुप रहते हैं।
भाटिया ने कहा, एक नागरिक हमेशा नागरिक होता है। अगर उसे पर्यावरण की चिंता है, तो उसे हमेशा चिंता होनी चाहिए। अगर उसे ध्वनि प्रदूषण की चिंता है, तो उसे हमेशा चिंता होनी चाहिए। ऐसा नहीं हो सकता कि आप हिंदू त्योहारों पर बयान दें, लेकिन दूसरे धार्मिक समुदायों के त्योहारों पर चुप रहें।
उन्होंने यह भी कहा, इस तरह चुनिंदा तरीके से चिंता जताने से इन मुद्दों को उठाने वाले लोगों की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। इसीलिए मैं कहूंगा कि इन लोगों में विश्वसनीयता की कमी है, उन्हें हिंदू समुदाय को कोई संदेश देने की जरूरत नहीं है।
अदालत के आदेश पर क्या बोले भाजपा प्रवक्ता?
भाटिया ने कहा कि देश कानून के अनुसार चलता है। नागरिकों को अदालत के आदेशों का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा, मेरा मानना है कि हिंदू धर्म को मानने वाले लोग सहिष्णु हैं और संविधान का भी सम्मान करते हैं। हमने अतीत में देखा है कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसलों को नागरिकों, खासकर हिंदुओं ने स्वीकार किया है और दिवाली मनाई है।
हाईकोर्ट ने वीडियो विवाद पर क्या कहा?
दीया मिर्जा के मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की पीठ ने मंगलवार को कहा कि कुछ लोगों की 'छोटी सोच' से उसे दुख पहुंचा है। खासकर ऐसे लोगों की सोच से, जो आम आदमी का प्रतिनिधित्व करते हैं।
पीठ ने कहा, यह 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण' है कि पर्यावरण, वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए बनाए गए वीडियो को इस तरह का रंग दिया गया। पीठ ने कहा, कोई भी व्यक्ति इस पर सवाल नहीं उठा सकता कि जागरूकता फैलाने के लिए अधिकारियों ने किसी खास हस्ती को क्यों चुना।
कैसे शुरू हुआ था पूरा विवाद?
बीएमसी के पर्यावरण के अनुकूल दिवाली अभियान के लिए दीया मिर्जा ने एक वीडियो बनाया था। सोमवार को इस वीडियो को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया।
ये भी पढ़ें: 'न्यायपालिका पर भरोसा बढ़ा': शरद पवार गुट ने अदालत के आदेश का किया स्वागत; दीया के वीडियो पर क्या था विवाद?
मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम की आपत्ति और महापौर ऋतु तावड़े की टिप्पणियों के बाद बीएमसी ने सोशल मीडिया से केवल दीया मिर्जा का वीडियो हटाया था। तावड़े ने उन्हें 'हिंदू विरोधी' बताया था।
दीया मिर्जा का वीडियो हटाया गया। लेकिन इसी अभियान के दूसरे वीडियो बीएमसी के एक्स और इंस्टाग्राम पेज पर मौजूद रहे। इनमें अभिनेत्री माधुरी दीक्षित और निशिगंधा वाड के साथ क्रिकेटर अजिंक्य रहाणे के वीडियो भी शामिल थे।
नसीरुद्दीन शाह का कौन सा वीडियो चर्चा में रहा?
अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने हाल ही में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के समर्थन में एक वीडियो जारी किया था। इसमें उन्होंने 'राष्ट्र-विरोधी' और 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' जैसे ठप्पों को स्वीकार किया था। उन्होंने कहा था, 'मैं एक दिमागी नक्सल हूं'। उनके इस बयान से विवाद शुरू हो गया था।
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भाजपा ने क्या आरोप लगाए?
भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा, संदेश देने में दोहरा रवैया है। आप कहते हैं कि लोगों को पर्यावरण का ध्यान रखना चाहिए। लेकिन जब ईद और बकरीद आती है और बकरों के काटे जाने से जल प्रदूषण होता है, तो नसीरुद्दीन शाह और दीया मिर्जा जैसे लोग एक शब्द भी नहीं बोलते।
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भाटिया से बॉम्बे हाईकोर्ट की टिप्पणी के बारे में पूछा गया था। हाईकोर्ट ने बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के पर्यावरण के अनुकूल और पटाखा-मुक्त दिवाली अभियान के लिए दीया मिर्जा के वीडियो को लेकर हुए विवाद पर 'गहरा दुख और नाराजगी' जताई थी। साथ ही, नगर निकाय को उनका वीडियो दोबारा अपलोड करने का निर्देश दिया था।
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हिंदू त्योहारों पर ही चिंता क्यों जताते हैं?
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि उन्होंने हाईकोर्ट का आदेश नहीं देखा है। इसलिए वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि कुछ लोग हिंदू त्योहारों के दौरान पर्यावरण की सुरक्षा और ध्वनि प्रदूषण को लेकर चिंता जताते हैं। लेकिन दूसरे धर्मों के त्योहार मनाए जाने पर चुप रहते हैं।
भाटिया ने कहा, एक नागरिक हमेशा नागरिक होता है। अगर उसे पर्यावरण की चिंता है, तो उसे हमेशा चिंता होनी चाहिए। अगर उसे ध्वनि प्रदूषण की चिंता है, तो उसे हमेशा चिंता होनी चाहिए। ऐसा नहीं हो सकता कि आप हिंदू त्योहारों पर बयान दें, लेकिन दूसरे धार्मिक समुदायों के त्योहारों पर चुप रहें।
उन्होंने यह भी कहा, इस तरह चुनिंदा तरीके से चिंता जताने से इन मुद्दों को उठाने वाले लोगों की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। इसीलिए मैं कहूंगा कि इन लोगों में विश्वसनीयता की कमी है, उन्हें हिंदू समुदाय को कोई संदेश देने की जरूरत नहीं है।
अदालत के आदेश पर क्या बोले भाजपा प्रवक्ता?
भाटिया ने कहा कि देश कानून के अनुसार चलता है। नागरिकों को अदालत के आदेशों का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा, मेरा मानना है कि हिंदू धर्म को मानने वाले लोग सहिष्णु हैं और संविधान का भी सम्मान करते हैं। हमने अतीत में देखा है कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसलों को नागरिकों, खासकर हिंदुओं ने स्वीकार किया है और दिवाली मनाई है।
हाईकोर्ट ने वीडियो विवाद पर क्या कहा?
दीया मिर्जा के मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की पीठ ने मंगलवार को कहा कि कुछ लोगों की 'छोटी सोच' से उसे दुख पहुंचा है। खासकर ऐसे लोगों की सोच से, जो आम आदमी का प्रतिनिधित्व करते हैं।
पीठ ने कहा, यह 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण' है कि पर्यावरण, वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए बनाए गए वीडियो को इस तरह का रंग दिया गया। पीठ ने कहा, कोई भी व्यक्ति इस पर सवाल नहीं उठा सकता कि जागरूकता फैलाने के लिए अधिकारियों ने किसी खास हस्ती को क्यों चुना।
कैसे शुरू हुआ था पूरा विवाद?
बीएमसी के पर्यावरण के अनुकूल दिवाली अभियान के लिए दीया मिर्जा ने एक वीडियो बनाया था। सोमवार को इस वीडियो को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया।
ये भी पढ़ें: 'न्यायपालिका पर भरोसा बढ़ा': शरद पवार गुट ने अदालत के आदेश का किया स्वागत; दीया के वीडियो पर क्या था विवाद?
मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम की आपत्ति और महापौर ऋतु तावड़े की टिप्पणियों के बाद बीएमसी ने सोशल मीडिया से केवल दीया मिर्जा का वीडियो हटाया था। तावड़े ने उन्हें 'हिंदू विरोधी' बताया था।
दीया मिर्जा का वीडियो हटाया गया। लेकिन इसी अभियान के दूसरे वीडियो बीएमसी के एक्स और इंस्टाग्राम पेज पर मौजूद रहे। इनमें अभिनेत्री माधुरी दीक्षित और निशिगंधा वाड के साथ क्रिकेटर अजिंक्य रहाणे के वीडियो भी शामिल थे।
नसीरुद्दीन शाह का कौन सा वीडियो चर्चा में रहा?
अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने हाल ही में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के समर्थन में एक वीडियो जारी किया था। इसमें उन्होंने 'राष्ट्र-विरोधी' और 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' जैसे ठप्पों को स्वीकार किया था। उन्होंने कहा था, 'मैं एक दिमागी नक्सल हूं'। उनके इस बयान से विवाद शुरू हो गया था।