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सीआईएसएफ की डिजिटल छलांग: 2.2 लाख जवानों को राहत, अब एक जगह होगी लाइव ट्रैकिंग; मोबाइल पर भी मिलेंगे अलर्ट
Tue, 03 Nov 2026 08:51 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Tue, 03 Nov 2026 08:51 PM IST
सार
सीआईएसएफ ने अपने 2.2 लाख जवानों के प्रशासनिक कामकाज को आसान बनाने के लिए डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन से समझौता किया है। अगले दो साल में अलग-अलग पोर्टल एक सिस्टम से जुड़ेंगे। जवानों को मोबाइल पर अलर्ट मिलेंगे और काम की लाइव ट्रैकिंग होगी। डेटा का नियंत्रण सीआईएसएफ के पास रहेगा। लेकिन इस डिजिटल बदलाव से जवानों की रोजमर्रा की जिंदगी और अधिकारियों के कामकाज में कितना बड़ा बदलाव आएगा? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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जवानों को एकीकृत सिस्टम से कैसे मिलेगी राहत?
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
देश के महत्वपूर्ण औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा करने वाले केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के करीब 2.2 लाख जवानों के लिए प्रशासनिक कामकाज आसान होने जा रहा है। बल ने अपने डिजिटल सिस्टम को एक साथ जोड़ने और आधुनिक बनाने की तैयारी की है। इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत आने वाले डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन (डीआईसी) के साथ समझौता किया गया है। इस दो वर्षीय योजना के बाद जवानों को अलग-अलग पोर्टल पर बार-बार जानकारी नहीं भरनी होगी। उनकी सेवाएं एक ही जगह उपलब्ध होंगी। काम की लाइव ट्रैकिंग होगी और मोबाइल पर अपने आप अलर्ट मिलेंगे।
समझौते और योजना की मुख्य बातें क्या हैं?
समझौते पर किन अधिकारियों ने हस्ताक्षर किए?
यह समझौता सीआईएसएफ महानिदेशक प्रवीर रंजन और डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी अखिल कुमार की मौजूदगी में हुआ। सीआईएसएफ की ओर से आईजी (तकनीक) सोनिया नारंग ने हस्ताक्षर किए। वहीं, डीआईसी की ओर से मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी देवव्रत नायक ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस योजना में डीआईसी रणनीतिक प्रौद्योगिकी भागीदार के रूप में काम करेगा। उसका काम मौजूदा सिस्टम को अपग्रेड करना और सभी सेवाओं को एक साथ जोड़ना होगा। इससे जवानों को छुट्टी, शिकायत और दूसरी प्रशासनिक जरूरतों के लिए अलग-अलग व्यवस्था पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
सीआईएसएफ ने पहले से कौन-कौन से डिजिटल सिस्टम बनाए?
सीआईएसएफ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में तकनीक के इस्तेमाल के मामले में आगे रहा है। बल ने अपनी जरूरतों के हिसाब से 40 से अधिक ऐप और 30 से ज्यादा मॉड्यूल तैयार किए हैं। इनमें ई-कार्यालय के जरिए अधिकारी कहीं से भी फाइल और डाक का काम कर सकते हैं। ई-ग्रीवांस पोर्टल पर जवान अपनी शिकायत सीधे वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा सकते हैं। सितंबर 2016 से अब तक इस पोर्टल पर 55,046 शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें से 53,043 का समाधान किया जा चुका है। ई-अनुरोध और ई-सर्विस बुक के जरिए जवान छुट्टी, साप्ताहिक अवकाश और ड्यूटी में बदलाव जैसी 40 से 50 तरह की अर्जियां मोबाइल से भेज सकते हैं। इसके अलावा आयुष्मान, मेस फीडबैक, वेलफेयर लोन और डीजी स्कॉलरशिप जैसे पोर्टल भी चल रहे हैं।
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जवानों को एकीकृत सिस्टम से कैसे मिलेगी राहत?
अभी सीआईएसएफ की कई डिजिटल सेवाएं अलग-अलग बनाई गई हैं। इसलिए जवानों को अलग-अलग पोर्टल पर अपनी जानकारी देनी पड़ती है। नई योजना में इन सभी सेवाओं को आपस में जोड़ा जाएगा। इससे एक ही जगह पर जवानों की जरूरी जानकारी उपलब्ध होगी। उन्हें बार-बार एक जैसी जानकारी भरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। छुट्टी या किसी दूसरी अर्जी की स्थिति भी देखी जा सकेगी। मोबाइल पर अपने आप अलर्ट मिलेंगे। बल का लीव मैनेजमेंट सिस्टम अब तक 95 लाख से अधिक लेनदेन पूरे कर चुका है। नए सिस्टम में इस तरह की सेवाओं को और बेहतर तरीके से जोड़ा जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मौजूदा डिजिटल सेवाएं भी बिना रुकावट चलती रहेंगी।
अधिकारियों को लाइव ट्रैकिंग और डैशबोर्ड से क्या फायदा होगा?
नई व्यवस्था का लाभ केवल जवानों तक सीमित नहीं रहेगा। वरिष्ठ अधिकारियों को भी रियल टाइम डैशबोर्ड मिलेगा। अभी कई जानकारियां हाथ से तैयार की गई रिपोर्ट के जरिए जुटाई जाती हैं। नए सिस्टम में जरूरी आंकड़े एक जगह उपलब्ध होंगे। इससे अधिकारी जवानों की संख्या, उनकी तैनाती, प्रशिक्षण और संसाधनों की स्थिति देख सकेंगे। जरूरत के हिसाब से मैनपावर और संसाधनों की योजना बनाना आसान होगा। लाइव ट्रैकिंग और ऑटोमेटेड अलर्ट से कामकाज की निगरानी भी बेहतर होगी। इससे फैसले लेने में लगने वाला समय कम हो सकता है।
जवानों के डेटा की सुरक्षा कैसे होगी?
सीआईएसएफ जैसे सुरक्षा बल के लिए डेटा की सुरक्षा सबसे अहम है। समझौते में स्पष्ट किया गया है कि पूरे डेटा का स्वामित्व और नियंत्रण सीआईएसएफ के पास ही रहेगा। डीआईसी सिस्टम को साइबर हमलों से सुरक्षित बनाने में तकनीकी मदद देगा। वह बल की टीम को नई तकनीक, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन भी देगा। हालांकि, पूरा काम सीआईएसएफ की अपनी तकनीकी टीम के साथ मिलकर किया जाएगा। इसका उद्देश्य एक सुरक्षित, एकीकृत और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप डिजिटल व्यवस्था तैयार करना है।
अधिकारियों ने इस योजना को लेकर क्या कहा?
सीआईएसएफ महानिदेशक प्रवीर रंजन ने कहा कि बल की इन-हाउस टीमों ने कई डिजिटल सिस्टम तैयार किए हैं। इनका इस्तेमाल जवान रोज करते हैं। अब इन सभी सिस्टम को एक साथ जोड़ने की जरूरत है। इससे जवानों का समय कागजी काम में बर्बाद नहीं होगा और अधिकारियों को सही समय पर जानकारी मिलेगी। डीआईसी के सीईओ अखिल कुमार ने कहा कि सीआईएसएफ ने मजबूत डिजिटल आधार तैयार किया है। उसके सिस्टम हर साल लाखों लेनदेन संभालते हैं। डीआईसी इन सिस्टम को जोड़ने, साइबर सुरक्षा बढ़ाने और भविष्य की जरूरतों के अनुसार तैयार करने में मदद करेगा। यह साझेदारी डिजिटल इंडिया के लक्ष्य से भी जुड़ी है। देश के अहम बुनियादी ढांचे की सुरक्षा करने वाले बल के लिए सुरक्षित और आधुनिक डिजिटल व्यवस्था अब बेहद जरूरी हो गई है।
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समझौते और योजना की मुख्य बातें क्या हैं?
- सीआईएसएफ और डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन के बीच दो साल के लिए समझौता हुआ है।
- डीआईसी बल के मौजूदा सूचना प्रौद्योगिकी ढांचे को आधुनिक बनाने में मदद करेगा।
- योजना तीन चरणों में पूरी की जाएगी।
- जवानों के प्रशासनिक कामकाज को पेपरलेस और पारदर्शी बनाया जाएगा।
- सभी डिजिटल पोर्टल और सेवाओं को एकीकृत सिस्टम से जोड़ा जाएगा।
- वरिष्ठ अधिकारियों को रियल टाइम डैशबोर्ड मिलेगा।
- इससे जवानों की तैनाती, प्रशिक्षण और संसाधनों की जानकारी एक जगह उपलब्ध होगी।
समझौते पर किन अधिकारियों ने हस्ताक्षर किए?
यह समझौता सीआईएसएफ महानिदेशक प्रवीर रंजन और डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी अखिल कुमार की मौजूदगी में हुआ। सीआईएसएफ की ओर से आईजी (तकनीक) सोनिया नारंग ने हस्ताक्षर किए। वहीं, डीआईसी की ओर से मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी देवव्रत नायक ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस योजना में डीआईसी रणनीतिक प्रौद्योगिकी भागीदार के रूप में काम करेगा। उसका काम मौजूदा सिस्टम को अपग्रेड करना और सभी सेवाओं को एक साथ जोड़ना होगा। इससे जवानों को छुट्टी, शिकायत और दूसरी प्रशासनिक जरूरतों के लिए अलग-अलग व्यवस्था पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
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सीआईएसएफ ने पहले से कौन-कौन से डिजिटल सिस्टम बनाए?
सीआईएसएफ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में तकनीक के इस्तेमाल के मामले में आगे रहा है। बल ने अपनी जरूरतों के हिसाब से 40 से अधिक ऐप और 30 से ज्यादा मॉड्यूल तैयार किए हैं। इनमें ई-कार्यालय के जरिए अधिकारी कहीं से भी फाइल और डाक का काम कर सकते हैं। ई-ग्रीवांस पोर्टल पर जवान अपनी शिकायत सीधे वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा सकते हैं। सितंबर 2016 से अब तक इस पोर्टल पर 55,046 शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें से 53,043 का समाधान किया जा चुका है। ई-अनुरोध और ई-सर्विस बुक के जरिए जवान छुट्टी, साप्ताहिक अवकाश और ड्यूटी में बदलाव जैसी 40 से 50 तरह की अर्जियां मोबाइल से भेज सकते हैं। इसके अलावा आयुष्मान, मेस फीडबैक, वेलफेयर लोन और डीजी स्कॉलरशिप जैसे पोर्टल भी चल रहे हैं।
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जवानों को एकीकृत सिस्टम से कैसे मिलेगी राहत?
अभी सीआईएसएफ की कई डिजिटल सेवाएं अलग-अलग बनाई गई हैं। इसलिए जवानों को अलग-अलग पोर्टल पर अपनी जानकारी देनी पड़ती है। नई योजना में इन सभी सेवाओं को आपस में जोड़ा जाएगा। इससे एक ही जगह पर जवानों की जरूरी जानकारी उपलब्ध होगी। उन्हें बार-बार एक जैसी जानकारी भरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। छुट्टी या किसी दूसरी अर्जी की स्थिति भी देखी जा सकेगी। मोबाइल पर अपने आप अलर्ट मिलेंगे। बल का लीव मैनेजमेंट सिस्टम अब तक 95 लाख से अधिक लेनदेन पूरे कर चुका है। नए सिस्टम में इस तरह की सेवाओं को और बेहतर तरीके से जोड़ा जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मौजूदा डिजिटल सेवाएं भी बिना रुकावट चलती रहेंगी।
अधिकारियों को लाइव ट्रैकिंग और डैशबोर्ड से क्या फायदा होगा?
नई व्यवस्था का लाभ केवल जवानों तक सीमित नहीं रहेगा। वरिष्ठ अधिकारियों को भी रियल टाइम डैशबोर्ड मिलेगा। अभी कई जानकारियां हाथ से तैयार की गई रिपोर्ट के जरिए जुटाई जाती हैं। नए सिस्टम में जरूरी आंकड़े एक जगह उपलब्ध होंगे। इससे अधिकारी जवानों की संख्या, उनकी तैनाती, प्रशिक्षण और संसाधनों की स्थिति देख सकेंगे। जरूरत के हिसाब से मैनपावर और संसाधनों की योजना बनाना आसान होगा। लाइव ट्रैकिंग और ऑटोमेटेड अलर्ट से कामकाज की निगरानी भी बेहतर होगी। इससे फैसले लेने में लगने वाला समय कम हो सकता है।
जवानों के डेटा की सुरक्षा कैसे होगी?
सीआईएसएफ जैसे सुरक्षा बल के लिए डेटा की सुरक्षा सबसे अहम है। समझौते में स्पष्ट किया गया है कि पूरे डेटा का स्वामित्व और नियंत्रण सीआईएसएफ के पास ही रहेगा। डीआईसी सिस्टम को साइबर हमलों से सुरक्षित बनाने में तकनीकी मदद देगा। वह बल की टीम को नई तकनीक, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन भी देगा। हालांकि, पूरा काम सीआईएसएफ की अपनी तकनीकी टीम के साथ मिलकर किया जाएगा। इसका उद्देश्य एक सुरक्षित, एकीकृत और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप डिजिटल व्यवस्था तैयार करना है।
अधिकारियों ने इस योजना को लेकर क्या कहा?
सीआईएसएफ महानिदेशक प्रवीर रंजन ने कहा कि बल की इन-हाउस टीमों ने कई डिजिटल सिस्टम तैयार किए हैं। इनका इस्तेमाल जवान रोज करते हैं। अब इन सभी सिस्टम को एक साथ जोड़ने की जरूरत है। इससे जवानों का समय कागजी काम में बर्बाद नहीं होगा और अधिकारियों को सही समय पर जानकारी मिलेगी। डीआईसी के सीईओ अखिल कुमार ने कहा कि सीआईएसएफ ने मजबूत डिजिटल आधार तैयार किया है। उसके सिस्टम हर साल लाखों लेनदेन संभालते हैं। डीआईसी इन सिस्टम को जोड़ने, साइबर सुरक्षा बढ़ाने और भविष्य की जरूरतों के अनुसार तैयार करने में मदद करेगा। यह साझेदारी डिजिटल इंडिया के लक्ष्य से भी जुड़ी है। देश के अहम बुनियादी ढांचे की सुरक्षा करने वाले बल के लिए सुरक्षित और आधुनिक डिजिटल व्यवस्था अब बेहद जरूरी हो गई है।