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West Bengal Polls: 'तीन से ज्यादा चरण में न हो मतदान', चुनाव आयोग के पैनल से मुलाकात कर भाजपा ने की मांग

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, कोलकाता Published by: एन अर्जुन Updated Mon, 09 Mar 2026 01:55 PM IST
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सार

पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल गरमा गया है। भाजपा के प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से मुलाकात कर मांग की कि चुनाव अधिकतम तीन चरणों में कराए जाएं।  इतना ही नहीं पार्टी ने हिंसा-मुक्त और निष्पक्ष चुनाव के लिए सख्त सुरक्षा इंतजाम की भी मांग की।

BJP demands meeting Election Commission panel Bengal Polls Voting should not be held more than three phases
चुनाव आयोग की बैठक - फोटो : एक्स@ANI
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विस्तार

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर जारी सियासी टकराव के बीच सोमवार को कोलकाता में चुनाव आयोग की फुल बेंच ने विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ अहम बैठक की। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में हुई इस बैठक में भाजपा, तृणमूल कांग्रेस, वाम दलों और कांग्रेस ने अपने-अपने मुद्दे और आपत्तियां आयोग के सामने रखीं। बैठक के बाद सभी दलों ने चुनाव प्रक्रिया, सुरक्षा व्यवस्था और मतदाता सूची को लेकर अलग-अलग मांगें और आरोप लगाए, जिससे राज्य की राजनीति और गरमा गई है।

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भाजपा ने रखीं 16 सूत्रीय मांगें
बैठक में भाजपा के प्रतिनिधिमंडल ने आयोग को 16 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा। पार्टी की ओर से जगन्नाथ सरकार, शिशिर बाजोरिया और तापस रॉय शामिल हुए। भाजपा नेताओं ने राज्य में केंद्रीय सुरक्षा बलों की प्रभावी तैनाती, भयमुक्त माहौल में मतदान और रिगिंग रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की। भाजपा ने यह भी सुझाव दिया कि चुनाव कई चरणों में कराने के बजाय एक या अधिकतम तीन चरणों में कराए जाएं, ताकि सुरक्षा व्यवस्था बेहतर ढंग से संभाली जा सके। पार्टी ने तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी के कथित ‘उंगली काटने’ वाले बयान पर भी आपत्ति जताते हुए इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने की मांग की।
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जगन्नाथ सरकार ने दी जानकारी
भाजपा नेता जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने बताया कि पार्टी ने आयोग से कहा है कि चुनाव एक, दो या अधिकतम तीन चरणों में कराए जाएं। उन्होंने कहा कि इससे ज्यादा चरणों में चुनाव कराने की जरूरत नहीं है। इसके साथ ही भाजपा ने राज्य में तैनात लगभग 400 कंपनियों की केंद्रीय सुरक्षा बलों को लेकर भी चिंता जताई।

पार्टी का आरोप है कि इन बलों का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं हो रहा है और राज्य पुलिस ही उन्हें निर्देश दे रही है। भाजपा नेताओं का कहना है कि अगर राज्य में डर-मुक्त माहौल बनाना है तो चुनाव आयोग को ऐसे पुलिस और सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए, जो मतदाताओं को स्वतंत्र रूप से वोट डालने से रोकते हैं।

शिशिर बाजोरिया ने लगाए गंभीर आरोप
भाजपा नेता शिशिर बाजोरिया ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्रीय बलों की रूट मार्च संवेदनशील इलाकों के बजाय शांत इलाकों में कराई जा रही है। उनके अनुसार, कई जगह रूट मार्च ऐसी सड़कों पर हो रहा है जहां लोग नहीं रहते, सिर्फ गाड़ियां गुजरती हैं। उन्होंने कहा कि यह चुनाव आयोग के नियमों के खिलाफ है। भाजपा ने चुनाव आयोग से यह भी अनुरोध किया कि चुनाव प्रक्रिया की अवधि कम की जाए।

पार्टी का कहना है कि सात या आठ चरणों में चुनाव कराने की जरूरत नहीं है। इतना ही नहीं भाजपा ने आयोग से संवेदनशील मतदान केंद्रों (सेंसिटिव बूथ) की पहचान के नियमों में बदलाव की मांग की। पार्टी का सुझाव है कि जिन बूथों पर 85 प्रतिशत से ज्यादा मतदान होता है या जहां पहले चुनावों में हिंसा हुई है, उन्हें अपने आप संवेदनशील माना जाए और वहां अतिरिक्त सुरक्षा दी जाए।

वाम दलों ने उठाए एसआईआर पर सवाल
वाममोर्चा के प्रतिनिधियों ने भी आयोग से मुलाकात कर एसआईआर की प्रक्रिया पर कड़ी आपत्ति जताई। वाम नेताओं की ओर से मोहम्मद सलीम ने कहा कि उनकी पार्टी एक चरण में चुनाव कराने के पक्ष में है, हालांकि अधिकतम दो चरणों में मतदान कराने पर भी उन्हें आपत्ति नहीं होगी। उन्होंने आरोप लगाया किमतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया में लोगों को अनावश्यक रूप से परेशानकिया जा रहा है और चुनाव आयोग को अपनी निष्पक्षता बनाए रखनी चाहिए।

कांग्रेस ने सुरक्षा को बताया प्राथमिकता
कांग्रेस नेता प्रदीप भट्टाचार्य ने बैठक के बाद कहा कि चुनाव कितने चरणों में होंगे, यह उतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना कि मतदान की सुरक्षा।उन्होंने कहा कि आयोग को निष्पक्ष और सुरक्षित मतदान सुनिश्चित करना चाहिए।

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आयोग से नाराज दिखी तृणमूल
वहीं तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने भी आयोग से मुलाकात की। बैठक के बाद राज्य की मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि एसआईआर को लेकर सवाल पूछने पर आयोग बार-बार यह कहकर जवाब दे रहा था कि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। उन्होंने यह भी कहा कि बैठक के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ने उन्हें ऊंची आवाज में बोलने से रोका, जिससे वे असंतुष्ट हैं। उनके मुताबिक मतदाता सूची से नाम हटने के मामलों में आयोग को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

कालीघाट मंदिर में पूजा के दौरान विरोध
इससे पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कोलकाता पहुंचने के बाद दक्षिण कोलकाता स्थित प्रसिद्ध कालीघाट मंदिर में पूजा-अर्चना की। इस दौरान कुछ लोगों ने काले झंडे दिखाकर विरोध भी जताया, हालांकि पुलिस ने स्थिति को  तुरंत नियंत्रित कर लिया। बंगाल में एसआईआर को लेकर पहले से जारी राजनीतिक विवाद के बीच चुनाव आयोग की इस बैठक ने राज्य की चुनावी राजनीति को और तेज कर दिया है। आगामी चुनावों को देखते हुए सभी दल चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर अपनी-अपनी रणनीति तय करने में जुटे हैं।

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