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Bombay High Court: बहू को कालीन पर सुलाना, टीवी देखने से मना करना क्रूरता नहीं; कोर्ट ने पलटा पुराना फैसला

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: शुभम कुमार Updated Sun, 10 Nov 2024 04:41 AM IST
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सार

घरेलू हिंसा मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने अपना 20 साल पुराना फैसला बदल दिया है। औरंगाबाद पीठ ने एक व्यक्ति और उसके परिवार के खिलाफ दिए गए 20 साल पुराने फैसले को पलट दिया। जहां व्यक्ति पर आरोप था कि उसने अपनी दिवंगत पत्नी के साथ क्रूरता की थी।

Bombay High Court: Making daughter-in-law sleep on the carpet and forbidding her to watch TV is not cruelty
बॉम्बे हाईकोर्ट। - फोटो : ANI
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विस्तार

बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ ने एक व्यक्ति और उसके परिवार के खिलाफ दिए गए 20 साल पुराने फैसले को पलट दिया। व्यक्ति पर आरोप था कि उसने अपनी दिवंगत पत्नी के साथ क्रूरता की थी। अदालत ने पाया कि महिला को ताने देने, उसे टीवी न देखने देने, उसे अकेले मंदिर जाने से रोकने और कालीन पर सुलाने के आरोप भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 498ए के तहत गंभीर कृत्य नहीं हैं।
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अदालत ने पलटा निर्णय
अदालत ने इस बात पर गौर किया कि आरोप मुख्य रूप से घरेलू मुद्दों पर केंद्रित हैं और शारीरिक या मानसिक क्रूरता के स्तर के नहीं हैं। अपने फैसले में अदालत ने व्यक्ति, उसके माता-पिता और उसके भाई को बरी कर दिया। उन्हें निचली अदालत ने क्रूरता और आत्महत्या के लिए उकसाने के लिए आईपीसी की धारा 498ए और 306 के तहत दोषी पाया था। उच्च न्यायालय का यह फैसला निचली अदालत की सजा के खिलाफ उनकी अपील पर आया है। 
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ससुराल वालों पर थे ये सामान्य आरोप
17 अक्तूबर के आदेश में न्यायमूर्ति अभय एस वाघवासे की एकल-न्यायाधीश की पीठ ने अपीलकर्ताओं के खिलाफ मुख्य आरोपों का विवरण दिया। अपीलकर्ताओं पर आरोप लगाया गया था कि वह भोजन बनाने को लेकर बहू को ताने देते थे, उसके टीवी देखने पर भी प्रतिबंध लगाया था। उसे पड़ोसियों के पास या मंदिर जाने से रोका जाता था और कालीन पर सुलाया जाता था।

इसके साथ ही बहू को खुद ही कूड़ा फेंकने को कहा जाता था। परिवार के सदस्यों पर यह भी आरोप था कि वह आधी रात को बहू को पानी लाने के लिए भेजते थे। हालांकि, अदालत ने कहा कि गवाहों की गवाही से पता चलता है कि बहू और उसके ससुराल वाले वरनगांव में रहते थे। पानी आपूर्ति आमतौर पर आधी रात को ही होती थी और सभी घरों के लोग करीब डेढ़ बजे पानी भरते थे।
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