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TMC Bank Accounts: टीएमसी के बैंक खातों में ऐसा क्या? हाईकोर्ट ने मांगा पूरा हिसाब, डेबिट फ्रीज पर उठे सवाल
Thu, 02 Jul 2026 05:20 PM IST
प्रशांत तिवारी
पीटीआई, कोलकाता
पीटीआई, कोलकाता
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Thu, 02 Jul 2026 05:20 PM IST
सार
कलकत्ता हाईकोर्ट ने TMC के तीन बैंक खातों में मौजूद राशि का पूरा ब्योरा 7 जुलाई तक अदालत में पेश करने का निर्देश दिया है। अदालत ने पुलिस को जांच रिकॉर्ड प्रस्तुत करने की अनुमति भी दी है। मामले की अगली सुनवाई 8 जुलाई को होगी।
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कलकत्ता उच्च न्यायालय
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ कलकत्ता उच्च न्यायालय फोटो गैलरी
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विस्तार
तृणमूल कांग्रेस के ममता बनर्जी गुट की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए, जिसमें पार्टी के बैंक खातों से पैसे निकालने पर लगी रोक (डेबिट फ्रीज़) को चुनौती दी गई है, कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को संबंधित निजी बैंक को इन खातों में मौजूद राशि का पूरा ब्योरा अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया है। जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने बिधाननगर पुलिस को भी अनुमति दी कि वह अगली सुनवाई की तारीख पर शिकायत और उसके आधार पर दर्ज एफआईआर की जांच से जुड़े सभी रिकॉर्ड अदालत के समक्ष प्रस्तुत करे।
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कब तक देनी होगी बैंक खातों की जानकारी?
अदालत ने संबंधित निजी बैंक के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे 7 जुलाई तक TMC के तीनों बैंक खातों में उपलब्ध राशि का पूरा विवरण अदालत में दाखिल करें। मामले की अगली सुनवाई 8 जुलाई को होगी।
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किसने किया अंतरिम आदेश टालने का किया आग्रह?
बिधाननगर पुलिस की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से अनुरोध किया कि इस मामले में किसी भी प्रकार का अंतरिम आदेश कुछ दिनों के लिए टाल दिया जाए। मेहता ने कहा कि पुलिस इस मामले की जांच कर चुकी है और वह अदालत के समक्ष ऐसे रिकॉर्ड पेश करेंगे, जिनसे यह स्पष्ट होगा कि धन के गबन की कोशिश की जा रही थी। उन्होंने आगे कहा कि इस मामले का मूल प्रश्न यह है कि TMC के दो गुटों में से बैंक खातों का संचालन करने का वैध अधिकार किसके पास है। जस्टिस भट्टाचार्य ने कहा कि अदालत इस संभावना पर भी विचार कर रही है कि याचिका लंबित रहने तक इन तीनों खातों का संचालन अदालत द्वारा नियुक्त संयुक्त विशेष अधिकारियों, जो सेवानिवृत्त न्यायाधीश होंगे, की निगरानी में कराया जाए।
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'इतनी जल्दबाजी क्यों की गई?'
अदालत ने गौर किया कि एफआईआर 18 जून को शाम 6 बजे दर्ज की गई थी, जबकि अगले ही दिन बैंक ने ममता बनर्जी गुट को पत्र लिखकर सूचित किया कि उनके खातों से डेबिट लेन-देन पर रोक लगा दी गई है। जस्टिस भट्टाचार्य ने पूछा कि खाते फ्रीज़ करने में इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई और जांच एजेंसी के पास प्रथम दृष्टया ऐसे कौन-से सबूत थे, जिनके आधार पर यह कार्रवाई की गई। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वे अदालत के सामने ऐसे साक्ष्य पेश करेंगे, जो अदालत की अंतरात्मा को झकझोर देंगे।
याचिकाकर्ता की ओर से कौन हुआ पेश?
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने सवाल उठाया कि क्या किसी सक्रिय राजनीतिक दल के फंड को फ्रीज़ करके और समान अवसर (लेवल प्लेइंग फील्ड) को असमान बनाकर उसे प्रभावी ढंग से काम करने से रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि बैंक खातों को फ्रीज़ करना मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। सिंघवी ने दावा किया कि शिकायत अस्पष्ट है और उसमें ऐसे तथ्य नहीं हैं, जिनके आधार पर पुलिस कार्रवाई कर सके। उन्होंने आगे कहा कि इसी शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई और अगले ही दिन बैंक खातों को फ्रीज़ कर दिया गया। सिंघवी ने अदालत से कहा कि यह सही है कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला TMC गुट विधानसभा चुनाव हार गया और पार्टी के कई सदस्य भी उससे अलग हो गए, लेकिन सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल कर किसी पराजित राजनीतिक दल को पंगु नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने अदालत से अंतरिम आदेश जारी कर खातों से डेबिट लेन-देन की अनुमति देने की मांग की।
किसलिए दर्ज हुई शिकायत?
शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल ने याचिका की स्वीकार्यता पर सवाल उठाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को बैंक खातों तक पहुंच का दावा करने का कोई अधिकार नहीं है, क्योंकि पार्टी की नई राष्ट्रीय समिति का गठन हो चुका है। कौल ने कहा कि शिकायत इसलिए दर्ज कराई गई क्योंकि आशंका थी कि एक गुट गैरकानूनी लेन-देन के जरिए पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से खातों में धन भेजने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस इसी शिकायत की जांच कर रही है।
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'TMC का प्रतिनिधित्व करने का अधिकार किसके पास?'
नीरज किशन कौल ने अदालत से पूछा कि जब पार्टी के भीतर दो विरोधी गुट मौजूद हैं, तो याचिकाकर्ता किस अधिकार से स्वयं को तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधि बता रहा है। तृणमूल कांग्रेस के तीन बैंक खातों से डेबिट लेन-देन पर रोक पार्टी के बागी विधायकों द्वारा फंड के स्रोत की जांच की मांग वाली शिकायतों के बाद लगाई गई थी। TMC के ऋतब्रत बनर्जी गुट से जुड़े कुछ विधायकों ने बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट के साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए पार्टी के बैंक खातों की विस्तृत जांच की मांग की थी।