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'वयस्कों को जीवनसाथी चुनने का अधिकार': अंतरधार्मिक विवाह पर कलकत्ता हाईकोर्ट का फैसला, कहा- पुलिस दे सुरक्षा

Tue, 28 Jul 2026 04:17 PM IST
Devesh Tripathi पीटीआई, कोलकाता
पीटीआई, कोलकाता Published by: Devesh Tripathi Updated Tue, 28 Jul 2026 04:17 PM IST
सार

कलकत्ता हाईकोर्ट ने अंतरधार्मिक विवाह करने जा रहे एक वयस्क जोड़े की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पश्चिम बंगाल पुलिस को आवश्यक इंतजाम करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बालिग नागरिक अपनी पसंद से विवाह करने के लिए स्वतंत्र हैं और उनके इस अधिकार की रक्षा करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। स्थानीय विरोध की आशंका को देखते हुए पुलिस को समारोह के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी तरह की बाधा रोकने के निर्देश दिए गए हैं।

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कलकत्ता हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI

विस्तार

कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल पुलिस को बुधवार को हावड़ा में होने वाले एक अंतरधार्मिक विवाह के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि "इस देश के वयस्क नागरिकों को अपना जीवनसाथी चुनने का अधिकार है।"
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यह टिप्पणी न्यायालय ने अलग-अलग धर्मों से संबंध रखने वाले एक युवक और युवती की याचिका पर सुनवाई के दौरान की। दोनों ने विवाह कराने के लिए पुलिस सुरक्षा की मांग की थी। उनके वकील ने अदालत को बताया कि विवाह के फैसले का स्थानीय स्तर पर विरोध हो रहा है।
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हाईकोर्ट ने पुलिस को क्यों दिए सुरक्षा उपलब्ध कराने के निर्देश? 
हावड़ा (ग्रामीण) के पुलिस अधीक्षक अमित वर्मा ने मंगलवार को कहा कि हाईकोर्ट के आदेश का पालन करते हुए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की जा रही है। याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने सोमवार को पुलिस को निर्देश दिया कि बुधवार को होने वाले विवाह के दौरान याचिकाकर्ताओं को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
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न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कहा, "अदालत को अंतरधार्मिक विवाह होने के मामले में कोई बाधा नहीं दिखती है। याचिकाकर्ता इस देश के वयस्क नागरिक हैं और उन्हें अपना जीवनसाथी चुनने का अधिकार है।" अदालत ने पुलिस को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि विवाह समारोह के दौरान कोई अप्रिय घटना न हो।

अंतरधार्मिक विवाह पर विरोध का माहौल
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने हावड़ा के उलुबेरिया थाने के प्रभारी निरीक्षक को विवाह संपन्न होने के सात दिन के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त को होगी। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास रंजन भट्टाचार्य ने अदालत को बताया कि विवाह के फैसले को लेकर इलाके में विरोध का माहौल है। इससे युवक और युवती को आशंका है कि उन्हें विवाह करने से रोका जा सकता है।


राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने अदालत में उलुबेरिया थाने के प्रभारी निरीक्षक की ओर से भेजा गया पत्र पेश किया। इसमें बताया गया कि इलाके में शांति बनाए रखने के लिए प्रशासन ने आवश्यक कदम उठाए हैं।
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