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CAPF Bill: किसी नए सशस्त्र बल का गठन करेगी केंद्र सरकार? जानें अदालत की पहुंच से क्यों बाहर रहेगा सीएपीएफ एक्ट
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सीएपीएफ बिल
- फोटो : एएनआई
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केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बुधवार को राज्यसभा में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 पेश कर दिया है। बिल पर चर्चा के दौरान विपक्ष के कई सांसदों ने अपने तर्क देकर सीएपीएफ बिल का विरोध किया। इस बिल में कई प्रावधान ऐसे हैं, जिनकी मदद से सरकार, भविष्य में किसी नए 'सशस्त्र बल' का गठन कर सकती है। इतना ही नहीं, यह बिल अदालत की पहुंच से बाहर रहेगा। इन बलों में आईपीएस के अलावा आर्मी अफसरों का प्रतिनियुक्ति पर आना, 'सीएपीएफ बिल 2026' में जारी रहेगा। गृह राज्य मंत्री राय ने कहा, इस बिल से कोई भी न्यायिक निर्णय समाप्त नहीं होगा।
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संतुलन बिगाड़ने का खतरनाक प्रयास
इस बिल के पेश होने पर कांग्रेस सांसद अजय माकन ने कहा, ये बिल न्याय पालिका की मर्यादा को दरकिनार करने और लोकतंत्र के स्तंभों के बीच के संतुलन को बिगाड़ने का एक खतरनाक प्रयास है। ये गैरकानूनी है, बेसिक स्ट्रक्चर के खिलाफ है, इसलिए हम इसका विरोध करते हैं। डीएमके सांसद तिरुचि शिवा ने बिल का विरोध करते हुए कहा, सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि सीएपीएफ में आईजी स्तर के पदों को दो साल में एक चरणबद्ध तरीके से किया जाए। सरकार ने सर्वोच्च अदालत का आदेश नहीं माना, बल्कि उसे समाप्त करने के लिए 'वैधानिक हस्तक्षेप' का सहारा लिया। कांग्रेस सांसद विवेक के. तन्खा ने भी बिल का विरोध किया। सुप्रीम कोर्ट में सरकार की एसएलपी डिसमिस हुई। रिव्यू पीटिशन भी खारिज हो गई। अवमानना याचिका पर सरकार को नोटिस हुआ। अब सीएपीएफ बिल लाकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटा जा रहा है।
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क्या सरकार की मंशा 'नया सशस्त्र बल'
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 के सेक्शन 4 (1) (ए) में लिखा है कि सरकार चाहे तो लोक हित में एक नोटिफिकेशन के द्वारा सीएपीएफ एक्ट की प्रथम अनुसूची (शेड्यूल) में कोई नया ऐसा एक्ट जोड़ सकती है, जो वर्तमान बल से संबंधित हो। वह संघ के किसी नए सशस्त्र बल से संबंधित हो सकता है। जानकारों के मुताबिक, सीएपीएफ बिल के सेक्शन 4 (1) (ए) से प्रतीत होता है कि भविष्य में सरकार की मंशा कोई नया सशस्त्र बल खड़ा करने की हो सकती है।
आईपीएस/आर्मी अफसर आते रहेंगे
सीएपीएफ बिल के सेक्शन 2 (ई) में 'ग्रुप ए सामान्य ड्यूटी अफसर' की परिभाषा दी गई है। इसमें लिखा है कि आईपीएस, आर्मी अफसर और दोबारा से रोजगार पाने वाले व्यक्ति, सीएपीएफ में प्रतिनियुक्ति पर आ सकते हैं। दूसरे अफसर जो तय नियमों के अनुसार भर्ती होते हैं, वे भी इन बलों में प्रतिनियुक्ति ले सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश दरकिनार करना
सीएपीएफ बिल के सेक्शन 3 में कहा गया है कि न्यायालय का फैसला, डिक्री या कोई अन्य आदेश, जो समय समय पर जारी होता है, उसका कोई असर इस एक्ट पर नहीं पड़ेगा। केंद्र सरकार, नोटिफिकेशन के द्वारा सीएपीएफ के लिए रूल बना सकती है। अफसरों की भर्ती, पदोन्नति, प्रतिनियुक्ति या सेवा की शर्तें, सरकार इन्हें नोटिफिकेशन द्वारा तय कर सकती है। यह निर्णय, किसी भी अदालती फैसले या डिक्री से प्रभावित नहीं होगा। यहां पर सुप्रीम कोर्ट की न्यायिक पुनरीक्षण की शक्ति भी काम नहीं करेगी।
संसद को सीएपीएफ पर कानून बनाने का अधिकार
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इस बिल को पेश करने के बाद कहा, संसद को सीएपीएफ पर कानून बनाने का अधिकार है। भारत की संचित निधि से कोई व्यय नहीं होगा। इससे सीएपीएफ की प्रचलित व्यवस्था प्रभावित नहीं होगी। सीएपीएफ बिल पर विपक्षी सांसदों की आपत्ति, तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। यह बिल, किसी भी न्यायिक निर्णयों को समाप्त नहीं करता।
पूर्व कैडर अफसरों ने बताया 'काला नियम'
बीएसएफ के पूर्व डीआईजी जेएस भल्ला ने सीएपीएफ (सामान्य प्रशासन) बिल 2026 को काला नियम बताया है। उन्होंने कहा, सरकार इसके जरिए कैडर अफसरों के साथ भेदभाव कर रही है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश को खत्म करने के लिए सरकार ये 'काला नियम' ला रही है। पूर्व डीआईजी धमेंद्र पारिख ने कहा, सीएपीएफ में लगभग 12 लाख कार्मिक और 17 लाख रिटायर्ड पर्सन हैं। इनके परिजन भी हैं। इस बिल के खिलाफ देशभर में आंदोलन चलेगा। सरकार को सुप्रीम कोर्ट का 23 मई 2025 को दिया फैसला मानना चाहिए।