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चीन की औद्योगिक ताकत से कैसे मुकाबला करेगा भारत?: राहुल बोले- पड़ोसी देश की प्रणाली बेजोड़, लेकिन अलोकतांत्रिक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
Published by: Nirmal Kant
Updated Sat, 07 Mar 2026 03:57 PM IST
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कांग्रेस सांसद राहुल गांधी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को कहा कि चीन ने दुनिया में एक बेहतरीन और बेजोड़ औद्योगिक प्रणाली बनाई है। लेकिन, पड़ोसी देश की व्यवस्था दबाव डालने वाली और अलोकतांत्रिक है। यह बात उन्होंने तिरुवनंतपुरम में आईटी पेशेवरों से बातचीत के दौरान कही।
राहुल गांधी टेक्नोपार्क में आईटी क्षेत्र से जुड़े लोगों से संवाद कर रहे थे। इस दौरान सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, चीन ने औद्योगिक उत्पादन के क्षेत्र पर कब्जा कर लिया है। जबकि अमेरिका, भारत और दुनिया के कई देश केवल खपत (कंजम्प्शन) ही कर रहे हैं। उन्होंने कहा, असली रोजगार औद्योगिक उत्पादन के क्षेत्र में होता है, न केवल खपत में। कांग्रेस नेता ने कहा, निराश करने वाली बात यह है कि भारत ने चीन को औद्योगिक उत्पादन के क्षेत्र पर पूरी तरह कब्जा करने दिया।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा, चीन ने एक शानदार औद्योगिक प्रणाली खड़ी की है, जिसका मुकाबला दुनिया में कोई नहीं कर सकता। भारत को चीन की दबाव वाली व्यवस्था पसंद नहीं है। वहां (चीन) लोकतंत्र नहीं है। उन्होंने आगे कहा, अगर भारत अपने लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखते हुए मजबूत औद्योगिक उत्पादन प्रणाली खड़ी कर लेता है, तो यह भारत और दुनिया के लिए बहुत बड़ी सेवा होगी।
ये भी पढ़ें: भारत ने ईरान के IRIS लावन युद्धपोत को क्यों दी थी शरण? विदेश मंत्री जयशंकर ने बताई असली वजह
राहुल गांधी ने एक और चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आजकल सैन्य ताकत तेजी से इलेक्ट्रिक मोटर और बैटरी की तकनीक ओर बढ़ रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध व पश्चिम एशिया के मौजूदा संघर्ष में भी यह देखा जा सकता है। उन्होंने कहा, इस तकनीक पर अभी चीन का दबदबा है, न कि भारत, अमेरिका या यूरोप का और यह एक बड़ी समस्या है।
उन्होंने कहा, भारत अकेला ऐसा देश है, जो ईंधन से चलने वाले इंजन से बैटरी से चलने वाली इलेक्ट्रिक मोटर की दिशा में बड़े पैमाने पर बदलाव कर सकता है। इस बदलाव को करने के लिए भारत के पास जरूरी पैमाना है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक मोटर आधारित सर्कुलर मोबिलिटी के मामले में अमेरिका और यूरोप अब चीन से प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते।
उन्होंने कहा कि अगर सही नीतियां और सही दृष्टि अपनाई जाए, तो भारत चीन के साथ इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा कर सकता है। अगर ऐसा हुआ तो देश में बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होंगे। राहुल गांधी ने कहा कि फिलहाल चीन इस क्षेत्र में बिना किसी बड़ी चुनौती के आगे बढ़ रहा है। मैं चाहता हूं कि इस क्षेत्र में भारत के आगे आने से चीन को भी चिंता हो।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत में बहुत कम कंपनियां औद्योगिक उत्पादन के क्षेत्र में काम कर रही हैं। राहुल गांधी ने कहा कि कई बड़ी कंपनियां, जैसे गौतम अदाणी और मुकेश अंबानी के समूह, खुद उत्पादन नहीं करते, बल्कि ऐसे उत्पाद बेचते हैं, जो स्थानीय उत्पादन को नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि देश में उत्पादन को बढ़ावा देने वाली सोच विकसित करने की जरूरत है।
राहुल गांधी ने कहा कि मौजूदा वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की व्यवस्था इस तरह बनाई गई है कि इससे उत्पादन करने वाले राज्यों को नुकसान होता है और खपत करने वाले राज्यों को फायदा मिलता है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच हुए समझौते के तहत देश का पूरा डाटा संसाधनों को अमेरिका को सौंप दिया गया है। लेकिन इस मुद्दे पर किसी ने आवाज नहीं उठाई। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि अगर उस समझौते में भारत कहता कि बाकी बातें ठीक हैं, लेकिन हमारा डाटा दुनिया का सबसे कीमती डाटा है, तो वह गारंटी दे सकते हैं कि न कृषि पर टैक्स लगता और न ही छोटे और मझोले कारोबार पर। उन्होंने कहा कि किसी भी बातचीत या समझौते में जाने से पहले यह समझना जरूरी होता है कि आपके पास क्या ताकत है।
राहुल गांधी ने कहा कि भारत में बहुत बड़ी विविधता है, इसलिए यहां अलग-अलग नजरियों से कई चीजों को समझने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि दुनिया में सबसे बड़ा डाटा का भंडार भारत के पास है। साथ ही देश के पास बेहतरीन इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रतिभाएं भी हैं। उन्होंने कहा कि केरल दुनिया की बेहतरीन नर्सें तैयार करता है। इसलिए बातचीत करते समय यह साफ समझ होना चाहिए कि हमारे पास क्या ताकत है। उनके मुताबिक, बातचीत इसी तरीके से की जानी चाहिए।
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राहुल गांधी टेक्नोपार्क में आईटी क्षेत्र से जुड़े लोगों से संवाद कर रहे थे। इस दौरान सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, चीन ने औद्योगिक उत्पादन के क्षेत्र पर कब्जा कर लिया है। जबकि अमेरिका, भारत और दुनिया के कई देश केवल खपत (कंजम्प्शन) ही कर रहे हैं। उन्होंने कहा, असली रोजगार औद्योगिक उत्पादन के क्षेत्र में होता है, न केवल खपत में। कांग्रेस नेता ने कहा, निराश करने वाली बात यह है कि भारत ने चीन को औद्योगिक उत्पादन के क्षेत्र पर पूरी तरह कब्जा करने दिया।
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लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा, चीन ने एक शानदार औद्योगिक प्रणाली खड़ी की है, जिसका मुकाबला दुनिया में कोई नहीं कर सकता। भारत को चीन की दबाव वाली व्यवस्था पसंद नहीं है। वहां (चीन) लोकतंत्र नहीं है। उन्होंने आगे कहा, अगर भारत अपने लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखते हुए मजबूत औद्योगिक उत्पादन प्रणाली खड़ी कर लेता है, तो यह भारत और दुनिया के लिए बहुत बड़ी सेवा होगी।
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राहुल गांधी ने एक और चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आजकल सैन्य ताकत तेजी से इलेक्ट्रिक मोटर और बैटरी की तकनीक ओर बढ़ रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध व पश्चिम एशिया के मौजूदा संघर्ष में भी यह देखा जा सकता है। उन्होंने कहा, इस तकनीक पर अभी चीन का दबदबा है, न कि भारत, अमेरिका या यूरोप का और यह एक बड़ी समस्या है।
उन्होंने कहा, भारत अकेला ऐसा देश है, जो ईंधन से चलने वाले इंजन से बैटरी से चलने वाली इलेक्ट्रिक मोटर की दिशा में बड़े पैमाने पर बदलाव कर सकता है। इस बदलाव को करने के लिए भारत के पास जरूरी पैमाना है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक मोटर आधारित सर्कुलर मोबिलिटी के मामले में अमेरिका और यूरोप अब चीन से प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकते।
उन्होंने कहा कि अगर सही नीतियां और सही दृष्टि अपनाई जाए, तो भारत चीन के साथ इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा कर सकता है। अगर ऐसा हुआ तो देश में बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होंगे। राहुल गांधी ने कहा कि फिलहाल चीन इस क्षेत्र में बिना किसी बड़ी चुनौती के आगे बढ़ रहा है। मैं चाहता हूं कि इस क्षेत्र में भारत के आगे आने से चीन को भी चिंता हो।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत में बहुत कम कंपनियां औद्योगिक उत्पादन के क्षेत्र में काम कर रही हैं। राहुल गांधी ने कहा कि कई बड़ी कंपनियां, जैसे गौतम अदाणी और मुकेश अंबानी के समूह, खुद उत्पादन नहीं करते, बल्कि ऐसे उत्पाद बेचते हैं, जो स्थानीय उत्पादन को नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि देश में उत्पादन को बढ़ावा देने वाली सोच विकसित करने की जरूरत है।
राहुल गांधी ने कहा कि मौजूदा वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की व्यवस्था इस तरह बनाई गई है कि इससे उत्पादन करने वाले राज्यों को नुकसान होता है और खपत करने वाले राज्यों को फायदा मिलता है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच हुए समझौते के तहत देश का पूरा डाटा संसाधनों को अमेरिका को सौंप दिया गया है। लेकिन इस मुद्दे पर किसी ने आवाज नहीं उठाई। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि अगर उस समझौते में भारत कहता कि बाकी बातें ठीक हैं, लेकिन हमारा डाटा दुनिया का सबसे कीमती डाटा है, तो वह गारंटी दे सकते हैं कि न कृषि पर टैक्स लगता और न ही छोटे और मझोले कारोबार पर। उन्होंने कहा कि किसी भी बातचीत या समझौते में जाने से पहले यह समझना जरूरी होता है कि आपके पास क्या ताकत है।
राहुल गांधी ने कहा कि भारत में बहुत बड़ी विविधता है, इसलिए यहां अलग-अलग नजरियों से कई चीजों को समझने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि दुनिया में सबसे बड़ा डाटा का भंडार भारत के पास है। साथ ही देश के पास बेहतरीन इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रतिभाएं भी हैं। उन्होंने कहा कि केरल दुनिया की बेहतरीन नर्सें तैयार करता है। इसलिए बातचीत करते समय यह साफ समझ होना चाहिए कि हमारे पास क्या ताकत है। उनके मुताबिक, बातचीत इसी तरीके से की जानी चाहिए।
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