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RTI विवाद: लोकसभा सचिवालय को CIC का आदेश, ₹1.7 करोड़ इलेक्ट्रॉनिक खरीद के बिल जारी करें या दें कारण

पीटीआई, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Fri, 15 May 2026 05:08 PM IST
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सार

केंद्रीय सूचना आयोग ने लोकसभा सचिवालय को 2021-22 में ₹1.7 करोड़ की इलेक्ट्रॉनिक खरीद के बिल जारी करने या RTI के तहत जानकारी न देने का कारण स्पष्ट करने का निर्देश दिया है।

CIC Order Lok Sabha Secretariat to Either Release Bills Justify Denial of RTI on 1.7 Crore Electronic Purchase
केंद्रीय सूचना आयोग - फोटो : cic.gov.in
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विस्तार

सूचना के अधिकार (RTI) से जुड़े एक अहम मामले में केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने लोकसभा सचिवालय को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने कहा है कि 2021-22 में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की ₹1.7 करोड़ की खरीद से जुड़े बिल या तो आवेदक को उपलब्ध कराए जाएं या फिर उन्हें जारी न करने का ठोस कारण स्पष्ट किया जाए। यह मामला उस आरटीआई आवेदन से जुड़ा है, जिसमें संसद भवन परिसर में कंप्यूटर हार्डवेयर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर हुए खर्च की विस्तृत जानकारी मांगी गई थी।

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₹1.7 करोड़ की खरीद का हुआ खुलासा, लेकिन बिल नहीं दिए गए
लोकसभा सचिवालय ने आरटीआई के जवाब में बताया था कि इस अवधि में कुल ₹1,70,06,897 खर्च किए गए थे। इस राशि से लैपटॉप, डेस्कटॉप, प्रिंटर, स्कैनर, यूपीएस सिस्टम और टैबलेट जैसे उपकरण खरीदे गए। हालांकि, जब आवेदक ने इन खरीदों से जुड़े इनवॉइस और बिल की प्रतियां मांगीं, तो सचिवालय ने उन्हें देने से इनकार कर दिया। तर्क दिया गया कि इन दस्तावेजों के सार्वजनिक होने से तीसरे पक्ष यानी विक्रेताओं की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को नुकसान पहुंच सकता है।
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CIC ने असंतोष जताया, कहा- कारण पर्याप्त नहीं
मुख्य सूचना आयुक्त राज कुमार गोयल ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि लोकसभा सचिवालय पहले ही खर्च का पूरा विवरण साझा कर चुका है, लेकिन बिलों को रोकने का कारण पर्याप्त रूप से स्पष्ट नहीं किया गया है। आयोग ने कहा कि सूचना का अधिकार कानून की धारा 8(1)(डी) का हवाला देकर जानकारी रोकना उचित नहीं ठहराया जा सकता, जब तक कि ठोस कारण और प्रक्रिया पूरी न की गई हो।

तीसरे पक्ष की राय जरूरी, लेकिन पारदर्शिता भी अनिवार्य
CIC ने अपने आदेश में यह भी कहा कि सार्वजनिक संस्था को निर्णय लेने से पहले तीसरे पक्ष यानी विक्रेताओं की प्रतिक्रिया भी लेनी चाहिए थी, जो कि RTI कानून की धारा 11 के तहत आवश्यक प्रक्रिया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि अगर जानकारी देने से किसी की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति प्रभावित होती है, तो उसका उचित मूल्यांकन जरूरी है, लेकिन पारदर्शिता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

आयोग ने लोकसभा सचिवालय को निर्देश दिया है कि वह इस मामले पर दोबारा विचार करे और या तो सभी बिल आवेदक को उपलब्ध कराए या फिर उन्हें न देने का विस्तृत और ठोस कारण बताए। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि आदेश का पालन नहीं किया गया, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले का भी हवाला
इस मामले में CIC ने दिल्ली हाईकोर्ट के एक फैसले (BSNL बनाम CIC) का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा था कि सरकार में पारदर्शिता और गोपनीयता के बीच संतुलन जरूरी है। मतलब यह कि जहां एक ओर जनता को जानकारी देने का अधिकार है, वहीं दूसरी ओर यदि किसी तीसरे पक्ष को गंभीर नुकसान होने की आशंका हो, तो उसका भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

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