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CJI: 'कानूनी सुधार और न्यायिक अनुशासन से मजबूत हुई मध्यस्थता', सीजेआई सूर्यकांत ने विवाद समाधान पर कही ये बात

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Himanshu Singh Chandel Updated Sun, 08 Mar 2026 12:30 AM IST
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सार

सीजेआई सूर्यकांत ने चंडीगढ़ में कहा कि पिछले दस वर्षों में विधायी सुधार और न्यायिक अनुशासन ने मिलकर भारत की मध्यस्थता प्रणाली को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता और सुलह अधिनियम में संशोधनों से समय सीमा और निष्पक्षता के मानक मजबूत हुए हैं।

CJI Surya Kant on dispute resolution says Legal reforms and judicial discipline have strengthened mediation
सूर्यकांत, भारत के मुख्य न्यायाधीश - फोटो : पीटीआई
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विस्तार

भारत के सीजेआई न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि पिछले एक दशक में देश में विधायी सुधार और न्यायिक अनुशासन ने मिलकर मध्यस्थता प्रणाली को मजबूत बनाया है। उन्होंने कहा कि कानून में किए गए बदलाव और अदालतों के संतुलित रवैये से भारत में विवाद समाधान की प्रक्रिया अधिक भरोसेमंद बनी है। सीजेआई न्यायाधीश ने यह बात चंडीगढ़ में चंडीगढ़ अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र के उद्घाटन के दौरान कही।

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पिछले दस वर्षों में क्या बदलाव हुए हैं?
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि बीते दस वर्षों में मध्यस्थता और सुलह अधिनियम में कई अहम संशोधन किए गए हैं। इन बदलावों से समय सीमा को सख्त बनाया गया है और निष्पक्षता के मानकों को भी मजबूत किया गया है। उन्होंने कहा कि इन सुधारों से यह स्पष्ट हुआ है कि अदालतें मध्यस्थता प्रक्रिया में केवल आवश्यक होने पर ही हस्तक्षेप करेंगी।
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अदालतों की भूमिका को कैसे बताया गया?
सीजेआई ने कहा कि अदालतों ने बार-बार यह सिद्धांत दोहराया है कि मध्यस्थता में न्यूनतम हस्तक्षेप होना चाहिए। हालांकि जहां प्राकृतिक न्याय की आवश्यकता होती है, वहां अदालतें सतर्क रहती हैं। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता तभी सफल हो सकती है जब उसे स्वतंत्रता मिले, लेकिन अगर पूरी तरह नियंत्रण से बाहर छोड़ दिया जाए तो मनमानी का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

भारत की मध्यस्थता प्रणाली पर पहले क्या सवाल उठे थे?
सीजेआई ने कहा कि एक समय ऐसा भी था जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की मध्यस्थता प्रणाली को लेकर कई सवाल उठते थे। लोगों को देरी, अत्यधिक हस्तक्षेप और अनिश्चितता की चिंता रहती थी। उन्होंने कहा कि अब स्थिति धीरे-धीरे बदल रही है और भारत एक भरोसेमंद मध्यस्थता केंद्र के रूप में उभर रहा है। इसके लिए संस्थागत मध्यस्थता को मजबूत करना और पेशेवर क्षमता बढ़ाना जरूरी है।

चंडीगढ़ अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र की क्या भूमिका होगी?
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि चंडीगढ़ अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र भारत में अंतरराष्ट्रीय स्तर के विवाद समाधान को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि यह केंद्र केवल एक प्रशासनिक संस्था बनकर न रह जाए। इसे पूरी निष्पक्षता, दक्षता और पारदर्शिता के साथ काम करना होगा। यदि ऐसा हुआ तो भारत अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के भरोसेमंद केंद्र के रूप में अपनी पहचान और मजबूत कर सकेगा।


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