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World Media: 24 घंटे के अंदर दिल्ली के दो बड़े प्रदर्शनों को दुनिया ने कैसे कवर किया, मोदी सरकार पर क्या लिखा?
Wed, 22 Jul 2026 06:11 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Wed, 22 Jul 2026 06:11 PM IST
सार
आइये जानते हैं कि इन दो दिनों में दुनिया भर की मीडिया ने छात्रों के प्रदर्शन और इसके बाद विपक्षी दल के पीएम आवास के सामने प्रदर्शन को कैसे कवर किया? इसे लेकर क्या कहा गया? जमीन की स्थिति पर क्या बात की गई?
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20 जुलाई और 21 जुलाई के प्रदर्शन का वैश्विक मीडिया में कवरेज।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भारत में बीते 48 घंटे काफी हंगामेदार रहे। पहले 20 जुलाई (सोमवार) को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के जंतर-मंतर से संसद चलो मार्च के दौरान दिल्ली में युवाओं और छात्रों का पुलिस से टकराव हुआ। इसके बाद 21 जुलाई (मंगलवार) को कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष ने पीएम आवास के बाहर धरना दिया। महज चार-पांच घंटे चले इस धरने के दौरान टकराव की स्थिति देखने को मिली और राहुल गांधी, अखिलेश यादव, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। बाद में इन्हें छोड़ भी दिया गया। हालांकि, इन प्रदर्शनों के जरिए जो चिंगारी भड़की, उन्हें दुनियाभर में भी काफी करीबी निगाह से देखा गया।
आइये जानते हैं कि इन दो दिनों में दुनिया की मीडिया ने छात्रों के प्रदर्शन और इसके बाद विपक्षी दलों के पीएम आवास के सामने प्रदर्शन को कैसे कवर किया? इसे लेकर क्या कहा गया? जमीन की स्थिति पर क्या बात की गई?
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आइये जानते हैं कि इन दो दिनों में दुनिया की मीडिया ने छात्रों के प्रदर्शन और इसके बाद विपक्षी दलों के पीएम आवास के सामने प्रदर्शन को कैसे कवर किया? इसे लेकर क्या कहा गया? जमीन की स्थिति पर क्या बात की गई?
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ये भी पढ़ें: 'प्रधानमंत्री छात्रों से माफी मांगें', राहुल गांधी ने केंद्र सरकार के सामने रखीं तीन मांगे, प्रदर्शन को दिया समर्थन
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छात्रों-विपक्ष के प्रदर्शन पर वैश्विक मीडिया में क्या चर्चा हुई?
वैश्विक मीडिया ने भारत में छात्रों के नेतृत्व वाले आंदोलन को बड़े पैमाने पर कवर किया और इसे हाल के वर्षों में मोदी सरकार के खिलाफ सबसे बड़े विरोध प्रदर्शन के रूप में देखा है।1. बीबीसी
बीबीसी ने इस आंदोलन को हाल के वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ सार्वजनिक असंतोष की सबसे बड़ी और स्पष्ट अभिव्यक्तियों में से एक करार दिया। इसने तिरंगा लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और रास्तों को सील करने वाली पुलिस के बीच के तीखे अंतर को उजागर किया, जहां पुलिस कार्रवाई के बाद कई प्रदर्शनकारी सिर से खून बहते हुए या लंगड़ाते हुए वापस लौटे।
2. द न्यूयॉर्क टाइम्स
अखबार ने रिपोर्ट दी कि दिल्ली की सड़कों पर अराजक दृश्य देखने को मिले, जहां पुलिस ने आंसू गैस और लाठियों का इस्तेमाल किया। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया कि एक तरफ जहां संसद में 'मुस्कुराते हुए मोदी' शांति दिखाने की कोशिश कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ युवा सड़कों पर अपना गुस्सा जाहिर कर रहे थे। अखबार ने कहा है कि सरकार की ओर से युवाओं के इस भारी गुस्से को कम आंकने से मोदी की मजबूत नेता की छवि पर असर पड़ा है।
सीजेपी का प्रदर्शन।
- फोटो : अमर उजाला
3. फाइनेंशियल टाइम्स
फाइनेंशियल टाइम्स ने छात्रों के इस प्रदर्शन को राजधानी में बीते वर्षों का सबसे बड़ा प्रदर्शन बताया। रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर बार-बार आंसू गैस के गोले दागे और उन्हें लाठियों व प्लास्टिक के डंडों से पीटा। अखबार के मुताबिक, हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों (जैसे पश्चिम बंगाल और असम) में सत्ताधारी भाजपा की जीत के बावजूद इस बड़े पैमाने के प्रदर्शन से मोदी सरकार के सामने एक व्यापक और गंभीर चुनौती खड़ी होने का खतरा पैदा हो गया है।
4. ब्लूमबर्ग
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस की सख्त कार्रवाई के एक दिन बाद भी प्रदर्शनकारियों ने पीछे हटने के बजाय अपना आंदोलन जारी रखने का संकल्प लिया, जिससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर दबाव काफी बढ़ गया। रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है कि सोमवार को दिल्ली में हुआ यह प्रदर्शन 2021 के किसान आंदोलन के बाद से राष्ट्रीय राजधानी में हुआ सबसे बड़ा प्रदर्शन था।
फाइनेंशियल टाइम्स ने छात्रों के इस प्रदर्शन को राजधानी में बीते वर्षों का सबसे बड़ा प्रदर्शन बताया। रिपोर्ट में बताया गया है कि दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर बार-बार आंसू गैस के गोले दागे और उन्हें लाठियों व प्लास्टिक के डंडों से पीटा। अखबार के मुताबिक, हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों (जैसे पश्चिम बंगाल और असम) में सत्ताधारी भाजपा की जीत के बावजूद इस बड़े पैमाने के प्रदर्शन से मोदी सरकार के सामने एक व्यापक और गंभीर चुनौती खड़ी होने का खतरा पैदा हो गया है।
4. ब्लूमबर्ग
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस की सख्त कार्रवाई के एक दिन बाद भी प्रदर्शनकारियों ने पीछे हटने के बजाय अपना आंदोलन जारी रखने का संकल्प लिया, जिससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर दबाव काफी बढ़ गया। रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है कि सोमवार को दिल्ली में हुआ यह प्रदर्शन 2021 के किसान आंदोलन के बाद से राष्ट्रीय राजधानी में हुआ सबसे बड़ा प्रदर्शन था।
रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही भाजपा ने हाल ही में राज्य चुनावों में जीत हासिल की हो, लेकिन यह आंदोलन उस पनपते हुए असंतोष का संकेत दे रहा है, जो आगामी चुनावों में मोदी की भाजपा के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित होगा। इसमें विशेष रूप से भारत के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश का जिक्र किया गया है, जहां अगले साल चुनाव होने वाले हैं।
5. द गार्डियन
ब्रिटिश अखबार द गार्डियन ने कहा है कि इस अभूतपूर्व विरोध प्रदर्शन में 50,000 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया, जिनमें मुख्य रूप से छात्र और जेन-जेड पीढ़ी के युवा शामिल थे। अखबार ने लिखा कि दिल्ली की सड़कों पर गुस्सा साफ महसूस किया जा सकता था, जहां प्रदर्शनकारियों ने मोदी सरकार और सत्तारूढ़ भाजपा पर देश के युवाओं को विफल करने का आरोप लगाया। अखबार ने चश्मदीदों के हवाले से बताया कि पुलिस ने बिना उकसावे के महिलाओं और बच्चों तक पर हमला किया, जिससे करीब 60 लोग घायल हो गए।
5. द गार्डियन
ब्रिटिश अखबार द गार्डियन ने कहा है कि इस अभूतपूर्व विरोध प्रदर्शन में 50,000 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया, जिनमें मुख्य रूप से छात्र और जेन-जेड पीढ़ी के युवा शामिल थे। अखबार ने लिखा कि दिल्ली की सड़कों पर गुस्सा साफ महसूस किया जा सकता था, जहां प्रदर्शनकारियों ने मोदी सरकार और सत्तारूढ़ भाजपा पर देश के युवाओं को विफल करने का आरोप लगाया। अखबार ने चश्मदीदों के हवाले से बताया कि पुलिस ने बिना उकसावे के महिलाओं और बच्चों तक पर हमला किया, जिससे करीब 60 लोग घायल हो गए।
द गार्डियन में दिल्ली के प्रदर्शन का कवरेज।
- फोटो : अमर उजाला
द गार्डियन ने विपक्ष के प्रदर्शन पर भी विस्तृत रिपोर्ट छापी। अखबार ने कहा कि पुलिस ने राहुल गांधी को हाथ और पैर से पकड़कर जबरन भीड़ से निकाला और एक बस में डाल दिया, जब वह प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना दे रहे थे। राहुल ने पीएम मोदी पर भारत के युवाओं का भविष्य तबाह करने का आरोप लगाया।
6. सीएनएन
अमेरिकी न्यूज नेटवर्क सीएनएन ने इन प्रदर्शनों को दिल्ली की सड़कों पर उबलता राजनीतिक गुस्सा करार दिया है। सीएनएन ने बताया कि मुख्य रूप से युवा प्रदर्शनकारियों को आंसू गैस और पुलिस के डंडों का सामना करना पड़ा। सोमवार को हुई हिंसा में करीब 150 प्रदर्शनकारी घायल होकर अस्पताल पहुंचे और पुलिस की बर्बरता के वीडियो वायरल होने के बाद सरकार की ओर से इंटरनेट बंद करने के आदेश से लोगों का आक्रोश और भड़क गया।
6. सीएनएन
अमेरिकी न्यूज नेटवर्क सीएनएन ने इन प्रदर्शनों को दिल्ली की सड़कों पर उबलता राजनीतिक गुस्सा करार दिया है। सीएनएन ने बताया कि मुख्य रूप से युवा प्रदर्शनकारियों को आंसू गैस और पुलिस के डंडों का सामना करना पड़ा। सोमवार को हुई हिंसा में करीब 150 प्रदर्शनकारी घायल होकर अस्पताल पहुंचे और पुलिस की बर्बरता के वीडियो वायरल होने के बाद सरकार की ओर से इंटरनेट बंद करने के आदेश से लोगों का आक्रोश और भड़क गया।
भारत में प्रदर्शनों पर सीएनएन का कवरेज।
- फोटो : अमर उजाला
रिपोर्ट में कहा गया है कि मोदी सरकार आलोचकों के निशाने पर है, जिनका मानना है कि इस सरकार ने अपने एक दशक से अधिक के शासन में लगातार असहमति को बेरहमी से कुचला है। सीएनएन ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के मुख्य न्यायाधीश की ओर से बेरोजगार युवाओं की तुलना कथित तौर पर कॉकरोच से किए जाने के बाद जो आंदोलन एक मजाक के रूप में शुरू हुआ था, वह अब लाखों युवाओं की हताशा को व्यक्त करने वाली एक बड़ी राजनीतिक ताकत बन गया है।
रिपोर्ट में प्रमुख कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से जबरन हटाकर अस्पताल ले जाने और प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर उनके आवास के बाहर धरना दे रहे विपक्षी नेताओं को लेकर भी बात की गई है।
7. द वॉल स्ट्रीट जर्नल और एजेंसी फ्रांस प्रेस (एएफपी)
द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने छात्रों के इस आंदोलन पर टिप्पणी करते हुए इसे उन सबसे बड़े प्रदर्शनों में से एक बताया है जिसका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले कई वर्षों में सामना किया है।
रिपोर्ट में प्रमुख कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से जबरन हटाकर अस्पताल ले जाने और प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर उनके आवास के बाहर धरना दे रहे विपक्षी नेताओं को लेकर भी बात की गई है।
7. द वॉल स्ट्रीट जर्नल और एजेंसी फ्रांस प्रेस (एएफपी)
द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने छात्रों के इस आंदोलन पर टिप्पणी करते हुए इसे उन सबसे बड़े प्रदर्शनों में से एक बताया है जिसका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले कई वर्षों में सामना किया है।
दूसरी तरफ एएफपी समाचार एजेंसी ने भारत में चल रहे छात्रों के इस आंदोलन को पिछले पांच साल का ऐसा सबसे बड़ा प्रदर्शन करार दिया, जो हिंसक हो गया। इसमें भीड़ की तरफ से पथराव किए जाने और पुलिस द्वारा आंसू गैस व लाठियों का इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है, जिसमें 60 नागरिक और 118 पुलिसकर्मी घायल हुए। एजेंसी ने सोशल मीडिया से उपजे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के इस आंदोलन को 2024 में मोदी के तीसरी बार सत्ता में आने के बाद उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती करार दिया है।