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'यह अमित शाह का खेल': TMC में टूट के बाद कांग्रेस ने लगाया आरोप, जयराम रमेश बोले-खतरे में है सांविधानिक नियम
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Mon, 15 Jun 2026 06:12 PM IST
सार
टीएमसी के 20 बागी सांसदों ने त्रिपुरा की एक छोटी पार्टी 'एनसीपीआई' में अपने विलय का एलान कर दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि गृह मंत्री अमित शाह ने एनडीए को दो-तिहाई बहुमत दिलाने के लिए यह अवैध दलबदल कराया है। अब बागी गुट टीएमसी के असली चुनाव चिह्न पर भी दावा करने की तैयारी में है।
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जयराम रमेश, कांग्रेस सांसद
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों ने एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। इन सभी सांसदों ने 'नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (एनसीपीआई) में शामिल होने का एलान कर दिया है। इस घटना के बाद दिल्ली से लेकर बंगाल तक की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस पार्टी ने इस कदम को पूरी तरह से गैरकानूनी बताया है। कांग्रेस का सीधा आरोप है कि इस पूरे खेल के पीछे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का हाथ है।
शाह की रणनीति और विपक्ष का तीखा हमला
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने इस मामले पर केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक बड़ा बयान जारी किया। रमेश ने आरोप लगाया कि गृह मंत्री अमित शाह लोकसभा में एनडीए के लिए दो-तिहाई बहुमत चाहते हैं। इसी दो-तिहाई बहुमत को पाने के लिए उन्होंने यह पूरी योजना बनाई है। कांग्रेस नेता ने अमित शाह के काम करने के तरीके पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शाह के पद पर रहते हुए देश के सांविधानिक नियम और मर्यादाएं खतरे में हैं।
यह भी पढ़ें: TMC की टूट पर किसने-क्या कहा?: रामगोपाल बोले- कूड़ेदान से उठाए लोग दे रहे धोखा, गहलोत ने भाजपा पर साधा निशाना
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गुमनाम पार्टी का सहारा और एनडीए का नया गणित
इस पूरे विवाद के बीच 'नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया'(एनसीपीआई) का नाम सामने आया है। यह त्रिपुरा की एक छोटी राजनीतिक पार्टी है। यह चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड है, लेकिन इसे मान्यता नहीं मिली है। इस पार्टी का जमीन पर कोई खास जनाधार नहीं है। साल 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में इस पार्टी ने केवल दो सीटों पर चुनाव लड़ा था। वहां भी इसके उम्मीदवारों को नोटा से कम या बहुत ही कम वोट मिले थे। जयराम रमेश ने इस पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि यह बहुत अजीब बात है। अब यह छोटी पार्टी एनडीए के अंदर टीडीपी और जेडीयू जैसी पुरानी और बड़ी पार्टियों से भी ज्यादा ताकतवर बनने जा रही है।
असली टीएमसी की जंग और कानून का पेच
इधर, बागी गुट के सांसद अरूप चक्रवर्ती ने सोमवार को अपना पक्ष रखा। उन्होंने साफ किया कि वे अपनी मूल पार्टी को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। बागी सांसदों ने अब ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के असली चुनाव चिह्न पर भी अपना दावा ठोकने की बात कही है। दूसरी तरफ, ममता बनर्जी की मूल तृणमूल कांग्रेस इस बगावत के खिलाफ खड़ी हो गई है। टीएमसी ने कहा है कि यह पूरा दलबदल कानूनन गलत है। यह दलबदल विरोधी कानून के तहत अवैध है। इससे पहले, रविवार को इन 20 बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की थी। उन्होंने स्पीकर को एनसीपीआई में अपने विलय की लिखित जानकारी दी थी। आने वाले दिनों में यह कानूनी लड़ाई और तेज होगी।
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शाह की रणनीति और विपक्ष का तीखा हमला
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने इस मामले पर केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक बड़ा बयान जारी किया। रमेश ने आरोप लगाया कि गृह मंत्री अमित शाह लोकसभा में एनडीए के लिए दो-तिहाई बहुमत चाहते हैं। इसी दो-तिहाई बहुमत को पाने के लिए उन्होंने यह पूरी योजना बनाई है। कांग्रेस नेता ने अमित शाह के काम करने के तरीके पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शाह के पद पर रहते हुए देश के सांविधानिक नियम और मर्यादाएं खतरे में हैं।
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गुमनाम पार्टी का सहारा और एनडीए का नया गणित
इस पूरे विवाद के बीच 'नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया'(एनसीपीआई) का नाम सामने आया है। यह त्रिपुरा की एक छोटी राजनीतिक पार्टी है। यह चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड है, लेकिन इसे मान्यता नहीं मिली है। इस पार्टी का जमीन पर कोई खास जनाधार नहीं है। साल 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में इस पार्टी ने केवल दो सीटों पर चुनाव लड़ा था। वहां भी इसके उम्मीदवारों को नोटा से कम या बहुत ही कम वोट मिले थे। जयराम रमेश ने इस पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि यह बहुत अजीब बात है। अब यह छोटी पार्टी एनडीए के अंदर टीडीपी और जेडीयू जैसी पुरानी और बड़ी पार्टियों से भी ज्यादा ताकतवर बनने जा रही है।
असली टीएमसी की जंग और कानून का पेच
इधर, बागी गुट के सांसद अरूप चक्रवर्ती ने सोमवार को अपना पक्ष रखा। उन्होंने साफ किया कि वे अपनी मूल पार्टी को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। बागी सांसदों ने अब ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के असली चुनाव चिह्न पर भी अपना दावा ठोकने की बात कही है। दूसरी तरफ, ममता बनर्जी की मूल तृणमूल कांग्रेस इस बगावत के खिलाफ खड़ी हो गई है। टीएमसी ने कहा है कि यह पूरा दलबदल कानूनन गलत है। यह दलबदल विरोधी कानून के तहत अवैध है। इससे पहले, रविवार को इन 20 बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की थी। उन्होंने स्पीकर को एनसीपीआई में अपने विलय की लिखित जानकारी दी थी। आने वाले दिनों में यह कानूनी लड़ाई और तेज होगी।