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'पारदर्शी नहीं है चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति': मणिशंकर अय्यर ने सीईसी पर उठाए सवाल, काम के तरीके पर क्या कहा?

Mon, 05 Oct 2026 12:24 PM IST
अमन मौर्या न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर Published by: अमन मौर्या Updated Mon, 05 Oct 2026 12:24 PM IST
सार

कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने मुख्य चुनाव आयुक्त के व्यवहार को 'शर्मनाक' बताते हुए उन्हें अब तक का सबसे खराब सीईसी करार दिया है। उन्होंने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।

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congress leader mani shankar aiyar statement on chief election commissioner
मणिशंकर अय्यर, पूर्व केंद्रीय मंत्री - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पाकिस्तान और सर्जिकल स्ट्राइक जैसे मुद्दों पर बयान देकर सुर्खियों में रहने वाले कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने अब मुख्य चुनाव आयुक्त पर भी बयान दिया है। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि मुख्य चुनाव आयुक्त का व्यवहार शर्मनाक रहा है। इस दौरान अय्यर ने दोनों चुनाव आयुक्तों को आड़े हाथों लिया है। उनका कहना है कि दो चुनाव आयुक्तों का व्यवहार भी ठीक नहीं रहा, क्योंकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से उन 14-15 नोटों का समर्थन नहीं किया, जो उन्होंने लिखे थे। इसलिए, मुझे सच में लगता है कि ये अब तक के सबसे खराब चुनाव आयुक्त रहे हैं।
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चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर क्या कहा?
वे आगे कहते हैं, 'मुझे लगता है कि हाल तक चुनाव आयोग पूरी तरह से स्वतंत्र रूप से काम कर रहा था। मुझे नहीं लगता कि किसी संवैधानिक संस्था को कानूनी तौर पर स्वतंत्र बनाना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट को स्वतंत्र नहीं कहा जाता; वह एक संवैधानिक संस्था है। इसलिए, इसे संवैधानिक संस्था बनाकर आप अपने आप यह सुनिश्चित कर लेते हैं कि यह स्वतंत्र होगी। लेकिन फिर इसमें गड़बड़ी की गई है। इन आयुक्तों और जजों की नियुक्ति का तरीका बिल्कुल भी पारदर्शी नहीं है।'
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भारत की कूटनीति को क्या बताया?
कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने कहा कि हमें पाखंडी माना जा रहा है क्योंकि हम दुनिया को बताते हैं कि यह युद्ध का दौर नहीं है और फिर हम पाकिस्तान के साथ युद्ध करते हैं। हम कहते हैं कि कूटनीति और बातचीत होनी चाहिए। पाकिस्तान ही एकमात्र ऐसा देश है जिसके साथ हमारी कोई कूटनीति या बातचीत नहीं है। हमने 'क्वाड' में शामिल होकर चीन को भी नाराज कर दिया है। अब तो अमेरिका भी कह रहा है कि 'क्वाड' का कोई महत्व नहीं है। तो यह किस तरह की कूटनीति है? इसका हमारी रणनीतिक स्वायत्तता से कोई लेना-देना नहीं है।


भारत-पाकिस्तान संबंधों पर क्या बोले?
इसके पहले कांग्रेस नेता ने भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दोनों देशों के बीच फिर से बातचीत शुरू करने की वकालत की थी। श्रीनगर में आयोजित पांचवे हल्ला बोल सम्मेलन में उन्होंने कहा कि भारत के पास पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करने का साहस है, तो दोनों देशों के बीच बातचीत करने का साहस क्यों नहीं है।

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सरकार को क्या सुझाव दिया?
अय्यर ने सुझाव दिया था कि दोनों देशों के बीच अटारी-वाघा सीमा पर भी बातचीत हो सकती है। उन्होंने कहा कि सीमा पर ही एक टेबल लगाकर दोनों देशों के प्रतिनिधि बातचीत कर सकते हैं जिससे कि संवाद के लिए किसी तीसरे पक्ष की जरूरत न पड़े। भारत-पाकिस्तान संबंधों को लेकर अय्यर ने कहा कि अतीत के विवादों को लेकर लगातार बहस करना विदेश नीति नहीं है। उनके अनुसार, किसी भी रचनात्मक समाधान तक पहुंचने का रास्ता बातचीत से ही निकलता है।
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