अर्थव्यवस्था की असल हकीकत छिपाई जा रही?: बजट से पहले कांग्रेस ने सरकार के आंकड़ों पर उठाए सवाल, लगाए ये आरोप
Congress Report On Economy: बजट से पहले कांग्रेस ने अर्थव्यवस्था की हालत पर बड़ा सवाल खड़ा किया है। पार्टी का आरोप है कि देश में असमानता बढ़ रही है, उद्योग और रोजगार कमजोर हो रहे हैं और सरकार गलत आंकड़ों से सच्चाई छिपा रही है। कांग्रेस ने कहा कि आम लोग ज्यादा टैक्स दे रहे हैं, बचत घट रही है और मनरेगा जैसी योजनाएं खतरे में हैं।
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आर्थिक सर्वे और केंद्रीय बजट पेश होने से ठीक पहले कांग्रेस ने देश की अर्थव्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि देश में असमानता लगातार बढ़ रही है और कल्याणकारी योजनाएं पीछे हट रही हैं। पार्टी ने कहा कि सरकार जो आंकड़े पेश कर रही है, वे आम लोगों की असल जिंदगी को नहीं दिखाते। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी कर सरकार की नीतियों पर सीधा हमला बोला है।
सरकार के आंकड़ों पर कांग्रेस को क्यों शक है?
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के रिसर्च डिपार्टमेंट के चेयरमैन राजीव गौड़ा ने कहा कि मोदी सरकार के आंकड़ों पर भरोसा करना मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भारत के आंकड़ों को सी ग्रेड दिया है। गौड़ा ने कहा कि 0.5 प्रतिशत महंगाई दर आम लोगों की सच्चाई नहीं है। उनका आरोप है कि सकल घरेलू उत्पाद की वास्तविक स्थिति को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जा रहा है और वास्तविक विकास इससे काफी कम है।
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विकास दर और उद्योगों की स्थिति क्या बता रही है?
राजीव गौड़ा ने कहा कि वर्ष 2024 में सरकार ने जीडीपी वृद्धि दर 9.2 प्रतिशत बताई, जबकि खर्च के आधार पर यह 4.9 प्रतिशत रही। उन्होंने कहा कि 2025-26 की पहली छमाही में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की वृद्धि 8.4 प्रतिशत बताई गई, लेकिन आठ प्रमुख उद्योगों के सूचकांक में यह केवल 2.9 प्रतिशत रही। उन्होंने सवाल उठाया कि जब उद्योग कमजोर हैं, तो इतनी तेज वृद्धि कैसे दिखाई जा रही है।
रुपया, निवेश और रोजगार की हालत कैसी है?
- राजीव गौड़ा ने कहा कि 2025 में रुपया एशिया की सबसे कमजोर मुद्राओं में शामिल रहा।
- दस महीनों में से चार महीनों में शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नकारात्मक रहा।
- देश में आने से ज्यादा पैसा बाहर गया और भारतीय निवेश विदेशों में बढ़ा।
- मैन्युफैक्चरिंग में काम करने वाले मजदूरों की हिस्सेदारी 12.1 प्रतिशत से घटकर 11.4 प्रतिशत रह गई।
- रोजगार का बड़ा हिस्सा असंगठित और गिग इकॉनमी में सिमट गया।
असमानता क्यों बनती जा रही है बड़ा मुद्दा?
कांग्रेस ने दावा किया कि देश की कुल आय का 58 प्रतिशत सिर्फ शीर्ष 10 प्रतिशत लोगों के पास है, जबकि निचले आधे हिस्से को केवल 15 प्रतिशत ही मिलता है। पार्टी का कहना है कि देश की 65 प्रतिशत संपत्ति शीर्ष 10 प्रतिशत के पास है और निचले आधे हिस्से के पास केवल 6.4 प्रतिशत संपत्ति है। राजीव गौड़ा ने कहा कि पांच में से चार भारतीय रोजाना 200 रुपये से भी कम में गुजारा कर रहे हैं और एक तिहाई आबादी 100 रुपये प्रतिदिन से कम पर जीवन जी रही है।
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कर, बचत और मनरेगा पर कांग्रेस का क्या आरोप है?
कांग्रेस नेता अमिताभ दुबे ने कहा कि ऐसा विकास, जो कुछ लोगों को ही फायदा दे, सफलता नहीं बल्कि चेतावनी है। उन्होंने कहा कि आम लोग अब कंपनियों से ज्यादा टैक्स दे रहे हैं। घरेलू बचत 50 साल के निचले स्तर पर पहुंच गई है और कर्ज लगातार बढ़ रहा है। दुबे ने मनरेगा को गरीबों का सबसे बड़ा सहारा बताते हुए कहा कि मोदी सरकार इस योजना पर हमला कर रही है। कांग्रेस ने मांग की कि सरकार देश के सामने असली आंकड़े रखे, न कि ऐसे आंकड़े जो लोगों को गुमराह करें।
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