एसिड अटैक के मामलों में 'सुप्रीम' आदेश: 'कितने मामले अभी लंबित और कितनों पर FIR?' राज्यों से मांगा पूरा ब्योरा
सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में एसिड अटैक मामलों को लेकर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से सालवार विस्तृत जानकारी मांगी है। कोर्ट ने चार्जशीट, निपटाए और लंबित मामलों, अपीलों के साथ पीड़ितों की शिक्षा, वैवाहिक स्थिति, इलाज, मुआवजा और पुनर्वास का पूरा ब्योरा तलब किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में एसिड अटैक मामलों को लेकर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से सालवार विस्तृत जानकारी मांगी है। कोर्ट ने चार्जशीट, निपटाए और लंबित मामलों, अपीलों के साथ पीड़ितों की शिक्षा, वैवाहिक स्थिति, इलाज, मुआवजा और पुनर्वास का पूरा ब्योरा तलब किया है।
विस्तार
देश में बढ़ते एसिड अटैक के मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को शीर्ष अदालत ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से एसिड अटैक से जुड़े मामलों की विस्तृत जानकारी देने को कहा है। कोर्ट ने साफ कहा है कि उसे साल-दर-साल दर्ज मामलों, उनकी अदालतों में स्थिति और पीड़ितों के पुनर्वास से जुड़ा पूरा ब्योरा चाहिए। मामले में सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति आर महादेवन और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने निर्देश दिया कि राज्य सरकारें यह बताएं कि कितने मामलों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।
कोर्ट ने आगे इस बात की भी जानकारी मांगी कि इन मामलों में ट्रायल कोर्ट में कितने मामलों का निपटारा हो चुका है और कितने मामले अभी लंबित हैं। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि एसिड अटैक के मामलों में हाईकोर्ट समेत अपीलीय अदालतों में कितनी अपीलें दायर की गई हैं। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह जानकारी चार सप्ताह के भीतर देने का निर्देश दिया गया है।
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सभी पीड़ित से जुड़ी जानकारी मांगी
इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने हर पीड़ित से जुड़ी संक्षिप्त जानकारी भी मांगी है। इसमें पीड़ित की शैक्षणिक योग्यता, रोजगार, वैवाहिक स्थिति, इलाज का विवरण और इलाज पर अब तक हुए या होने वाले खर्च की जानकारी शामिल है। अदालत ने यह भी जानना चाहा है कि राज्यों में एसिड अटैक पीड़ितों के लिए कौन-कौन सी पुनर्वास योजनाएं लागू हैं।
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एसिड पिलाए जाने के मामले में कोर्ट की सख्ती
इसके साथ ही कोर्ट ने उन मामलों का भी पूरा विवरण मांगा है, जिनमें पीड़ितों को जबरन एसिड पिलाया गया। ऐसे मामलों को लेकर अदालत ने गंभीर चिंता जताई है। मामले में मुख्य न्यायाधीश ने केंद्र सरकार से यह भी कहा है कि वह कानून में बदलाव पर विचार करे, ताकि एसिड अटैक जैसे जघन्य अपराधों में दोषियों को कड़ी और असाधारण सजा दी जा सके।
गौरतलब है कि यह सुनवाई शाहीन मलिक द्वारा दायर जनहित याचिका पर हो रही थी। शाहीन मलिक खुद एक एसिड अटैक पीड़िता हैं। उन्होंने याचिका में मांग की है कि कानून में दिव्यांगों की परिभाषा का दायरा बढ़ाया जाए, ताकि उन पीड़ितों को भी उचित मुआवजा, इलाज और अन्य राहत मिल सके, जिनके आंतरिक अंग एसिड जबरन पिलाने से गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
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