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'राम मंदिर चंदे की हेराफेरी पर पीएम मोदी चुप क्यों?': कांग्रेस ने भाजपा-आरएसएस को घेरा, कह दी ये बड़ी बात
Sun, 12 Jul 2026 03:43 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 12 Jul 2026 03:43 PM IST
सार
राम मंदिर में चंदे की चोरी के आरोपों पर कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी की घेराबंदी तेज कर दी है। विपक्ष ने इसे पीएम के संरक्षण में हुआ विश्वासघात बताते हुए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच और फॉरेंसिक ऑडिट की मांग की है, जबकि भाजपा ने इसे विपक्ष की विभाजनकारी राजनीति करार दिया है।
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जयराम रमेश, कांग्रेस महासचिव
- फोटो : @ANI/अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी को लेकर देश की सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर तीखे सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि राम मंदिर में चंदे की हेराफेरी पीएम के संरक्षण में हुई है। इस विश्वासघात के लिए देश भाजपा और आरएसएस को कभी माफ नहीं करेगा।
पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने इस मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि हर चीज का श्रेय लेने वाले प्रधानमंत्री जवाबदेही के वक्त चुप क्यों हैं? नए तथ्य लगातार सामने आ रहे हैं। इस मुद्दे ने अब तूल पकड़ लिया है।
क्या रसूखदारों को बचाने की हो रही है कोशिश?
जयराम रमेश का दावा है कि विशेष जांच दल भी रोजाना लाखों रुपये गायब होने की बात मान चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कुछ कर्मचारियों पर कार्रवाई करके बड़े गुनहगारों को बचाना चाहती है। जयराम रमेश ने यह भी कहा कि चंपत राय और अन्य ट्रस्टी कई गहरे राज छुपा रहे हैं। सरकार की ढिलाई से साफ है कि दोषियों को ऊपर से संरक्षण प्राप्त है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को आगामी संसद सत्र में उठाने का फैसला किया है। इसके लिए देश भर में 26 जगहों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई।
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क्या विपक्ष के आरोपों में है कोई दम?
मामले की गंभीरता को समझने के लिए इन पांच बड़ी बातों पर गौर करना जरूरी है:-
यह भी पढ़ें: राम मंदिर दान चोरी: 'दोषियों को मिले फांसी की सजा', केजरीवाल का हमला; AAP का देशव्यापी हस्ताक्षर अभियान शुरू
क्या संसद सत्र में घिरेगी सरकार?
कांग्रेस के बड़े नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस मुद्दे को शांत नहीं होने देंगे। विपक्षी दल संसद में प्रधानमंत्री से सीधे जवाब मांगेंगे। दूसरी तरफ, भाजपा ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग कभी राम मंदिर निर्माण के समर्थक नहीं थे, वे आज इस पर राजनीति कर रहे हैं। फिलहाल एसआईटी की जांच जारी है, लेकिन इस पर शुरू हुआ राजनीतिक घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है।
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पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने इस मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि हर चीज का श्रेय लेने वाले प्रधानमंत्री जवाबदेही के वक्त चुप क्यों हैं? नए तथ्य लगातार सामने आ रहे हैं। इस मुद्दे ने अब तूल पकड़ लिया है।
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क्या रसूखदारों को बचाने की हो रही है कोशिश?
जयराम रमेश का दावा है कि विशेष जांच दल भी रोजाना लाखों रुपये गायब होने की बात मान चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कुछ कर्मचारियों पर कार्रवाई करके बड़े गुनहगारों को बचाना चाहती है। जयराम रमेश ने यह भी कहा कि चंपत राय और अन्य ट्रस्टी कई गहरे राज छुपा रहे हैं। सरकार की ढिलाई से साफ है कि दोषियों को ऊपर से संरक्षण प्राप्त है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को आगामी संसद सत्र में उठाने का फैसला किया है। इसके लिए देश भर में 26 जगहों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई।
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क्या विपक्ष के आरोपों में है कोई दम?
मामले की गंभीरता को समझने के लिए इन पांच बड़ी बातों पर गौर करना जरूरी है:-
- जून में हुआ खुलासा: राम मंदिर के चढ़ावे में हेराफेरी का यह मामला पहली बार सात जून को सामने आया था।
- एसआईटी की जांच और एफआईआर: उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गठित एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट के बाद 25 जून को प्राथमिकी दर्ज की गई।
- आठ लोग गिरफ्तार: मंदिर के चंदा संकलन और गिनती प्रक्रिया से जुड़े आठ आरोपियों को पुलिस अब तक गिरफ्तार कर चुकी है।
- विपक्ष की चार मांगें: कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच, फॉरेंसिक ऑडिट, जवाबदेही तय करने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
- भाजपा का पलटवार: भाजपा का कहना है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। उसने विपक्ष पर हिंदुओं को बांटने की राजनीति करने का आरोप लगाया है।
यह भी पढ़ें: राम मंदिर दान चोरी: 'दोषियों को मिले फांसी की सजा', केजरीवाल का हमला; AAP का देशव्यापी हस्ताक्षर अभियान शुरू
क्या संसद सत्र में घिरेगी सरकार?
कांग्रेस के बड़े नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इस मुद्दे को शांत नहीं होने देंगे। विपक्षी दल संसद में प्रधानमंत्री से सीधे जवाब मांगेंगे। दूसरी तरफ, भाजपा ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग कभी राम मंदिर निर्माण के समर्थक नहीं थे, वे आज इस पर राजनीति कर रहे हैं। फिलहाल एसआईटी की जांच जारी है, लेकिन इस पर शुरू हुआ राजनीतिक घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है।