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कोरोना के नए वेरिएंट ने बढ़ाई चिंता: क्या वैक्सीन हो जाएगी बेअसर? भारत में अब तक कोई मामला नहीं
Mon, 13 Jul 2026 03:55 AM IST
अमन तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Mon, 13 Jul 2026 03:55 AM IST
सार
कोरोना वायरस का नया BA 3.2 वैरिएंट वैज्ञानिकों की निगरानी में है। इसमें 70 से अधिक म्यूटेशन पाए गए हैं, जिससे प्रतिरक्षा से बच निकलने की आशंका जताई जा रही है। भारत में अभी इसका कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन आंध्र प्रदेश में कोविड संक्रमण और मौतों के बाद सतर्कता बढ़ा दी गई है।
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कोरोना का अलर्ट
- फोटो : Amarujala.com/AI
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विस्तार
दुनिया में कोरोना वायरस के एक नए वैरिएंट बीए 3.2 ने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस वैरिएंट में इतने अधिक आनुवंशिक बदलाव (म्यूटेशन) हैं कि यह पहले संक्रमण या वैक्सीन से बनी प्रतिरक्षा (इम्युनिटी) को आंशिक रूप से चकमा देने की क्षमता रखता है। हालांकि, अभी तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है कि यह अन्य वैरिएंट की तुलना में अधिक गंभीर है। अभी तक भारत में इसका कोई मामला देखने को नहीं मिला है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बीए 3.2 में मौजूदा कोविड वैक्सीन की आधारशिला माने जाने वाले जेएन.1 वैरिएंट की तुलना में स्पाइक प्रोटीन में करीब 70 से 75 म्यूटेशन और डिलीशन पाए गए हैं। नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच डेनमार्क, जर्मनी और नीदरलैंड में सीक्वेंस किए गए करीब 30 फीसदी मामलों में यही वैरिएंट मिला।
अमेरिका के 25 राज्यों में मरीजों के नमूनों, अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की जांच और वेस्टवॉटर (सीवेज) निगरानी में पाया जा चुका है, जिससे इसकी मौजूदगी की पुष्टि हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस वैरिएंट में प्रतिरक्षा से बच निकलने की क्षमता हो सकती है, इसलिए इसकी निगरानी बेहद जरूरी है। वैज्ञानिक लगातार इसके नए उप-स्वरूप बीए 3.2.1 और बीए 3.2.2 पर भी नजर रख रहे हैं। उनका मानना है कि जीनोमिक सीक्वेंसिंग और वेस्टवॉटर सर्विलांस जैसी निगरानी प्रणालियां भविष्य में नए वैरिएंट का समय रहते पता लगाने में अहम भूमिका निभाएंगी। हालांकि, वैज्ञानिकों ने ये भी साफ कहा है कि इससे फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है।
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आंध्र प्रदेश में कोरोना से दो मौतों के बाद बढ़ी निगरानी
आंध्र प्रदेश के कडप्पा जिले में कोरोना वायरस से दो लोगों की मौत हो गई और 8 अन्य लोग पॉजिटिव पाए गए हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों ने निगरानी और तैयारी के उपाय तेज कर दिए हैं। सूत्रों ने बताया कि कडप्पा वायरोलॉजी लैब में आरटी-पीसीआर जांच के दौरान 4 लोग कोविड पॉजिटिव पाए गए। ये चारों मामले कडप्पा के अलग-अलग इलाकों से हैं।
इन लोगों ने कोविड-19 वैक्सीन की दो डोज भी ली थीं, जबकि उनमें से एक ने बूस्टर डोज भी ली थी। सूत्रों ने बताया कि पॉजिटिव पाए गए चार लोगों में से तीन होम आइसोलेशन में हैं, जबकि चौथे व्यक्ति में हल्के लक्षण हैं और उसे कडप्पा के एक स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मरीज का इलाज अस्पताल के कोविड-19 विशेष वार्ड में किया जा रहा है। चार और एक्टिव केस पाए गए हैं।
ये भी पढ़ें: खास उपहारों में दिखी सांस्कृतिक झलक: PM मोदी ने लक्सन को दी हॉकी स्टिक, अल्बनीज-सुबियांतो को दिया क्या तोहफा?
इन दो मौतों में से पहली मौत 28 जून को सीएमसी वेल्लोर में हुई थी। 60 वर्षीय मृतक (60) को डायबिटीज, किडनी की बीमारी और अन्य बीमारियां थीं। वहीं दूसरे मामले में, इलाज करा रहे 43 साल के एक मरीज की भी पॉजिटिव पाए जाने के बाद संक्रमण से मौत हो गई। सूत्र ने बताया कि मरीजों में दिखे लक्षणों के आधार पर संक्रमण के लिए ओमिक्रॉन वैरिएंट के जिम्मेदार होने का शक है। अधिकारियों ने प्रभावित इलाकों से 40 लोगों के सैंपल लिए। इनमें से 10 की रिपोर्ट निगेटिव आई है जबकि अन्य की रिपोर्ट का इंतजार है। जिला प्रभारी मंत्री सविता ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे कडप्पा में संक्रमण को और फैलने से रोकने के लिए तुरंत कदम उठाएं और जिन इलाकों में मामले मिले हैं, वहां कोविड-19 दिशानिर्देश सख्ती से लागू किया जाए।
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रिपोर्ट के मुताबिक, बीए 3.2 में मौजूदा कोविड वैक्सीन की आधारशिला माने जाने वाले जेएन.1 वैरिएंट की तुलना में स्पाइक प्रोटीन में करीब 70 से 75 म्यूटेशन और डिलीशन पाए गए हैं। नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच डेनमार्क, जर्मनी और नीदरलैंड में सीक्वेंस किए गए करीब 30 फीसदी मामलों में यही वैरिएंट मिला।
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अमेरिका के 25 राज्यों में मरीजों के नमूनों, अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की जांच और वेस्टवॉटर (सीवेज) निगरानी में पाया जा चुका है, जिससे इसकी मौजूदगी की पुष्टि हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस वैरिएंट में प्रतिरक्षा से बच निकलने की क्षमता हो सकती है, इसलिए इसकी निगरानी बेहद जरूरी है। वैज्ञानिक लगातार इसके नए उप-स्वरूप बीए 3.2.1 और बीए 3.2.2 पर भी नजर रख रहे हैं। उनका मानना है कि जीनोमिक सीक्वेंसिंग और वेस्टवॉटर सर्विलांस जैसी निगरानी प्रणालियां भविष्य में नए वैरिएंट का समय रहते पता लगाने में अहम भूमिका निभाएंगी। हालांकि, वैज्ञानिकों ने ये भी साफ कहा है कि इससे फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है।
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आंध्र प्रदेश में कोरोना से दो मौतों के बाद बढ़ी निगरानी
आंध्र प्रदेश के कडप्पा जिले में कोरोना वायरस से दो लोगों की मौत हो गई और 8 अन्य लोग पॉजिटिव पाए गए हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों ने निगरानी और तैयारी के उपाय तेज कर दिए हैं। सूत्रों ने बताया कि कडप्पा वायरोलॉजी लैब में आरटी-पीसीआर जांच के दौरान 4 लोग कोविड पॉजिटिव पाए गए। ये चारों मामले कडप्पा के अलग-अलग इलाकों से हैं।
इन लोगों ने कोविड-19 वैक्सीन की दो डोज भी ली थीं, जबकि उनमें से एक ने बूस्टर डोज भी ली थी। सूत्रों ने बताया कि पॉजिटिव पाए गए चार लोगों में से तीन होम आइसोलेशन में हैं, जबकि चौथे व्यक्ति में हल्के लक्षण हैं और उसे कडप्पा के एक स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मरीज का इलाज अस्पताल के कोविड-19 विशेष वार्ड में किया जा रहा है। चार और एक्टिव केस पाए गए हैं।
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इन दो मौतों में से पहली मौत 28 जून को सीएमसी वेल्लोर में हुई थी। 60 वर्षीय मृतक (60) को डायबिटीज, किडनी की बीमारी और अन्य बीमारियां थीं। वहीं दूसरे मामले में, इलाज करा रहे 43 साल के एक मरीज की भी पॉजिटिव पाए जाने के बाद संक्रमण से मौत हो गई। सूत्र ने बताया कि मरीजों में दिखे लक्षणों के आधार पर संक्रमण के लिए ओमिक्रॉन वैरिएंट के जिम्मेदार होने का शक है। अधिकारियों ने प्रभावित इलाकों से 40 लोगों के सैंपल लिए। इनमें से 10 की रिपोर्ट निगेटिव आई है जबकि अन्य की रिपोर्ट का इंतजार है। जिला प्रभारी मंत्री सविता ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे कडप्पा में संक्रमण को और फैलने से रोकने के लिए तुरंत कदम उठाएं और जिन इलाकों में मामले मिले हैं, वहां कोविड-19 दिशानिर्देश सख्ती से लागू किया जाए।