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Karnataka: 'पीएम की आलोचना और गारंटी का जिक्र होंगी राज्य बजट की मुख्य बातें', विपक्ष के नेता अशोक ने कसा तंज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू।
Published by: Nirmal Kant
Updated Thu, 05 Mar 2026 06:21 PM IST
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आर अशोक, नेता प्रतिपक्ष, कर्नाटक
- फोटो : X / @RAshokaBJP
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कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक ने गुरुवार को राज्य बजट पेश होने से पहले मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर तंज कसा। उन्होंने दावा किया सरकार करीब 1.15 लाख करोड़ रुपये कर्ज लेने वाली है और जनता पर नए कर (टैक्स) लगाए जा सकते हैं।
अशोक ने कहा कि बजट में कुछ नया नहीं होगा। उन्होंने कहा, बजट की मुख्य बातें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना और पांच गारंटी योजनाओं 'शक्ति', 'गृह लक्ष्मी', 'गृह ज्योति', 'युवा निधि' और 'अन्न भाग्य' का कई बार जिक्र होंगी। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया कल यानी 6 मार्च को 2026-27 का राज्य का बजट पेश करने वाले हैं। यह उनका रिकॉर्ड 17वां बजट होगा। उनके पास वित्त विभाग भी है।
अशोक ने कहा कि सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार का बजट शुक्रवार को पेश होगा। केंद्रीय बजट में जहां वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने करों का बोझ कम किया, वहीं सिद्धारमैया लोगों पर कर लगाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वह हर महीने करीब चार नए कर लगाते हैं और अब तक 36 कर लागू कर चुके हैं। अब और कर लगाने के तरीके ढूंढ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले लोगों से वादा किया था कि गारंटी योजनाएं बिना किसी अतिरिक्त बोझ के लागू की जाएंगी। अशोक ने दावा किया कि मुख्यमंत्री का कार्यकाल खत्म होने तक राज्य का कुल कर्ज संभवत: छह लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो जाएगा। उन्होंने कहा, सरकार पहले ही वित्तीय अनुशासन तोड़ चुकी है और किसी तरह हालात संभालने की कोशिश कर रही है। उन्होंने यह भी कहा, सिद्धारमैया ने जितना कर्ज लिया है, वह पिछले 12 या 13 मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में लिए गए कुल कर्ज के बराबर है।
ये भी पढ़ें: ईरान मुद्दे पर कांग्रेस-भाजपा आमने-सामने: राहुल गांधी के बयान पर सत्तारूढ़ पार्टी का पलटवार, चीन का दिया हवाला
विपक्ष के नेता ने कहा कि बजट ऐसा होना चाहिए, जिससे राजस्व के नए स्रोत बनें, लोगों पर बोझ न पड़े और राज्य को कर्ज से बाहर निकाला जा सके। उन्होंने कहा, यह काम केवल एक समझदार और कुशल वित्त मंत्री ही कर सकता है। उन्होंने कहा, कोई भी राज्य को कर्ज में डालकर सरकार चला सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सिद्धारमैया राज्य पर कर्ज बढ़ा रहे हैं और लोगों की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए हैं।
अशोक ने कहा, सिद्धारमैया हर बात के लिए पूर्ववर्ती भाजपा सकार को दोष देते हैं। पिछली भाजपा सरकार के दौरान मुख्यमंत्री रहे बसवराज बोम्मई ने बिना ज्यादा कर्ज लिए अधिशेष बजट पेश किया था। वित्तीय अनुशासन के दायरे में रहते हुए ज्यादा कर्ज लेने का मौका होने के बावजूद बोम्मई ने ऐसा नहीं किया, क्योंकि इससे जनता पर बोझ पड़ता। उन्होंने आरोप लगाया कि सिद्धारमैया हर साल करोड़ों रुपये का कर्ज ले रहे हैं।
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अशोक ने कहा कि सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार का बजट शुक्रवार को पेश होगा। केंद्रीय बजट में जहां वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने करों का बोझ कम किया, वहीं सिद्धारमैया लोगों पर कर लगाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वह हर महीने करीब चार नए कर लगाते हैं और अब तक 36 कर लागू कर चुके हैं। अब और कर लगाने के तरीके ढूंढ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले लोगों से वादा किया था कि गारंटी योजनाएं बिना किसी अतिरिक्त बोझ के लागू की जाएंगी। अशोक ने दावा किया कि मुख्यमंत्री का कार्यकाल खत्म होने तक राज्य का कुल कर्ज संभवत: छह लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो जाएगा। उन्होंने कहा, सरकार पहले ही वित्तीय अनुशासन तोड़ चुकी है और किसी तरह हालात संभालने की कोशिश कर रही है। उन्होंने यह भी कहा, सिद्धारमैया ने जितना कर्ज लिया है, वह पिछले 12 या 13 मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में लिए गए कुल कर्ज के बराबर है।
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विपक्ष के नेता ने कहा कि बजट ऐसा होना चाहिए, जिससे राजस्व के नए स्रोत बनें, लोगों पर बोझ न पड़े और राज्य को कर्ज से बाहर निकाला जा सके। उन्होंने कहा, यह काम केवल एक समझदार और कुशल वित्त मंत्री ही कर सकता है। उन्होंने कहा, कोई भी राज्य को कर्ज में डालकर सरकार चला सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सिद्धारमैया राज्य पर कर्ज बढ़ा रहे हैं और लोगों की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए हैं।
अशोक ने कहा, सिद्धारमैया हर बात के लिए पूर्ववर्ती भाजपा सकार को दोष देते हैं। पिछली भाजपा सरकार के दौरान मुख्यमंत्री रहे बसवराज बोम्मई ने बिना ज्यादा कर्ज लिए अधिशेष बजट पेश किया था। वित्तीय अनुशासन के दायरे में रहते हुए ज्यादा कर्ज लेने का मौका होने के बावजूद बोम्मई ने ऐसा नहीं किया, क्योंकि इससे जनता पर बोझ पड़ता। उन्होंने आरोप लगाया कि सिद्धारमैया हर साल करोड़ों रुपये का कर्ज ले रहे हैं।
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