फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Dead Internet Theory: Are Bots And AI Taking Over the Internet?

डेड इंटरनेट थ्योरी: एआई कंटेंट, फर्जी अकाउंट और बॉट्स, क्या बदल रही है इंटरनेट की असली दुनिया?

Fri, 16 Oct 2026 08:31 AM IST
संकल्प प्रकाश सिंह स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: संकल्प प्रकाश सिंह Updated Fri, 16 Oct 2026 08:31 AM IST
विज्ञापन
सार
इंटरनेट पर बढ़ते एआई कंटेंट और बॉट्स ने डेड इंटरनेट थ्योरी की एक नई बहस छेड़ दी है। आखिर ये थ्योरी है क्या आइए जानते हैं इसके बारे में
loader
Dead Internet Theory: Are Bots And AI Taking Over the Internet?
Dead Internet Theory - फोटो : Amar Ujala AI Generated

विस्तार

इंटरनेट आने के बाद पूरी दुनिया में एक क्रांतिकारी बदलाव आया है। आज के समय इंटरनेट पर हर दिन लाखों नई तस्वीरें, वीडियो, पोस्ट और जानकारियां साझा हो रही हैं। हालांकि, इस बीच एक सवाल तेजी से ध्यान खींच रहा है। क्या इंटरनेट पर होने वाली हर गतिविधि के पीछे कोई असली इंसान मौजूद है? इसको लेकर कई तकनीकी विशेषज्ञ एक खास तरह के नए सिद्धांत पर चर्चा कर रहे हैं, जिसे डेड इंटरनेट थ्योरी के नाम से जाना जाता है।


इस थ्योरी के मुताबिक इंटरनेट पर बॉट्स और ऑटोमेटेड अकाउंट्स की भूमिका लगातार बढ़ रही है। कई पोस्ट एआई की मदद से तैयार हो रही हैं और इनका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर फेक इंगेजमेंट और आर्टिफिशियल लोकप्रियता हासिल करने के लिए भी किया जा रहा है।


ऐसे में इंटरनेट पर सक्रियता तो दिखाई देती है, लेकिन उसके पीछे वास्तविक इंसानी भागीदारी कितनी है यह पहचानना अब मुश्किल होता जा रहा है। एआई और बॉट्स के बढ़ते इस्तेमाल ने ऑनलाइन दुनिया की विश्वसनीयता को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि डेड इंटरनेट थ्योरी आखिर क्या कहती है?

क्या है डेड इंटरनेट थ्योरी?

डेड इंटरनेट थ्योरी के मुताबिक, इंटरनेट पर इंसानों की असली गतिविधियों की जगह धीरे-धीरे एआई से तैयार कंटेंट और बॉट्स लेते जा रहे हैं। इस थ्योरी के अनुसार सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाले कई पोस्ट, कमेट और लाइक्स के पीछे वास्तविक लोग नहीं, बल्कि ऑटोमेटेड अकाउंट्स हो सकते हैं। इसके अलावा इंटरनेट पर एक जैसे कंटेंट की बढ़ती संख्या और एल्गोरिदम के जरिए लोगों की पसंद को प्रभावित करने की कोशिशें भी इस बहस का हिस्सा हैं। इस थ्योरी का दावा है कि इंटरनेट पर मौजूद बड़ी मात्रा में कंटेंट और सोशल मीडिया से जुड़ी गतिविधियां अब इंसानों के बजाय एआई मॉडल्स और बॉट्स के जरिए संचालित हो रही हैं।

इंटरनेट पर बढ़ती बॉट्स की गतिविधियां

इंटरनेट पर इंसानों के मुकाबले बॉट्स की गतिविधियां बढ़ने को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट सामने आई हैं। क्लाउडफ्लेयर के मुताबिक जून में बॉट्स ने वेबपेज से जुड़ी कुल रिक्वेस्ट में 57.5 फीसदी हिस्सेदारी दर्ज की। वहीं डाटा सुरक्षा से जुड़ी फ्रांसीसी कंपनी थेल्स की रिपोर्ट के मुताबिक बॉट ट्रैफिक 2023 में लगभग 50 फीसदी था। वहीं उसकी 2026 की रिपोर्ट में यह हिस्सेदारी 53 फीसदी बताई गई है। हालांकि, इन आंकड़ों में अंतर होने की वजह भी है। इंटरनेट पर बॉट्स की गतिवधियों को मापने का कोई एक समान तरीका नहीं है।

कोई भी कंपनी पूरे इंटरनेट के ट्रैफिक पर नजर नहीं रखती। इसलिए अलग-अलग कंपनियों के आकड़े उनके डाटा और मापने के तरीकों के आधार पर बदल सकते हैं। इससे साफ है कि बॉट्स की बढ़ती गतिविधियां चिंता का विषय हैं। हालांकि, इन आंकड़ों को पूरे इंटरनेट की वास्तविक स्थिति का सटीक पैमाना नहीं माना जा सकता। साथ ही बॉट ट्रैफिक का मतलब यह भी नहीं है कि इंटरनेट पर होने वाली आधी से ज्यादा गतिविधियां फर्जी हैं क्योंकि कई बॉट्स वेबसाइटों के लिए जरूरी काम भी करते हैं।

Dead Internet Theory
Dead Internet Theory - फोटो : Amar Ujala AI Generated

एआई कंटेंट की बाढ़ से क्यों बढ़ रही है चिंता?

आज इंटरनेट एक अलग तरह के संकट से गुजर रहा है, जिसे तकनीकी विशेषज्ञ एआई स्लॉप के रूप में देख रहे हैं। जेनरेटिव एआई के दौर में चैटजीपीटी, मिडजर्नी, जेमिनी, गूगल फ्लो और कई दूसरे एआई वीडियो टूल्स आने के बाद इंटरनेट पर कंटेंट बनाने की लागत और समय काफी कम हो गया है। इसका नतीजा यह है कि हर दिन बड़ी संख्या में एआई से तैयार लेख, तस्वीरें और वीडियो इंटरनेट पर देखने को मिल रहे हैं।

कुछ ही मिनटों में ऐसा कंटेंट तैयार किया जा सकता है, जिसे बनाने में पहले बहुत समय और मेहनत लगती थी। इस बदलाव का असर अब इंटरनेट पर मौजूद ओरिजिनल कंटेंट पर भी दिखाई देने लगा है। पहले इंटरनेट पर लोग अपने अनुभव, विचारों और रचनत्मकता के आधार पर तस्वीरें, वीडियो, ब्लॉग और दूसरी जानकारियां साझा करते थे। वहीं अब एआई टूल्स की मदद से कम समय में बड़ी मात्रा में कंटेंट तैयार किया जा सकता है। इससे इंटरनेट पर एआई से बने कंटेंट की संख्या तेजी से बढ़ रही है। 

सोशल मीडिया पर ऐसे इस्तेमाल हो रहे हैं बॉट्स और एआई

सोशल मीडिया पर बॉट्स और एआई का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ रहा है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स और टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्म्स पर कई बॉट अकाउंट्स ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर की मदद से पोस्ट, कमेंट और लाइक करते हैं। इनकी मदद से नकली रिव्यू, ट्रेंड और कमेंट्स बड़ी संख्या में फैलाए जा सकते हैं। इससे किसी पोस्ट, वीडियो या प्रोडक्ट की लोकप्रियता वास्तविकता से ज्यादा दिखाई दे सकती है। कई बार यूजर्स को यह समझना मुश्किल हो जाता है कि किसी कंटेंट को मिल रहे लाइक्स और कमेंट्स के पीछे असली लोगों की दिलचस्पी है या ऑटोमेटेड गतिविधियां।

इसके अलावा एआई से बनाए गए वर्चुअल इन्फ्लुएंसर्स भी लोगों के बीच अपनी पहचान बना रहे हैं। ये डिजिटल किरदार सोशल मीडिया पर कंटेंट साझा करते हैं और उनके फॉलोअर्स भी होते हैं। हालांकि, ऐसे सभी अकाउंट्स फर्जी नहीं होते, लेकिन इनकी बढ़ती मौजूदगी इंसान और एआई के बीच अंतर को लेकर नए सवाल जरूर खड़े करती है।

यही वे पहलू हैं, जिनकी वजह से डेड इंटरनेट थ्योरी पर चर्चा तेज हुई है। हालांकि, इंटरनेट पर बॉट्स और एआई कंटेंट की बढ़ती मौजूदगी अपने आप में इस बात का सबूत नहीं है कि पूरा इंटरनेट इंसानों से खाली हो चुका है। असली सवाल यह है कि इंटरनेट पर दिखाई देने वाली गतिविधियों में इंसानों, बॉट्स और एआई की हिस्सेदारी कितनी है और ऑनलाइन दुनिया पर भरोसा बनाए रखने के लिए इन्हें पहचानना कितना जरूरी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

Followed