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टपकती छत, टूटी व्यवस्था और बदहाल स्कूल: अभिजीत दीपके बोले- मंत्रियों के कुत्तों को भी मिलती हैं बेहतर सुविधाएं

Thu, 20 Aug 2026 03:19 PM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, मुंबई
पीटीआई, मुंबई Published by: प्रशांत तिवारी Updated Thu, 20 Aug 2026 03:19 PM IST
सार

अभिजीत दीपके ने महाराष्ट्र के सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति को लेकर शिक्षा मंत्री दादा भुसे के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने बुनियादी सुविधाओं, सुरक्षित परिवहन और स्कूलों में सुरक्षा की कमी पर सरकार को घेरा तथा मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों से अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने की अपील की।  

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Deepak outraged condition of government schools says Even ministers dogs get better facilities
अभिजीत दीपके - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

कॉकरोच जनता पार्टी के संयोजक अभिजीत दीपके ने गुरुवार को महाराष्ट्र के स्कूल शिक्षा मंत्री दादा भुसे के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के सरकारी स्कूल बेहद दयनीय स्थिति में हैं और कई जगह छात्रों को बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। दीपके ने कहा कि जिन स्कूलों में बच्चे पढ़ रहे हैं, वहां की स्थिति देखकर ऐसा लगता है कि 'मंत्रियों के कुत्तों को भी इन छात्रों से बेहतर सुविधाएं मिलती हैं।' 

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सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव
दीपके के नेतृत्व में उनके संगठन ने पिछले सप्ताह ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू किया था। इसी अभियान के तहत उन्होंने लातूर जिले की औसा तहसील के उजनी गांव स्थित जिला परिषद स्कूल का दौरा किया। निरीक्षण के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि स्कूलों की बदहाली के लिए निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य के कई सरकारी स्कूल आज भी उचित कक्षाओं, बेंच, शौचालय और सुरक्षित संपर्क सड़कों जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।
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छात्रों की हालत पर उठाए सवाल
दीपके ने आरोप लगाया कि कुछ स्कूलों में छात्रों के साथ "जानवरों से भी बदतर" व्यवहार जैसी स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा, "यह छात्रों की जिंदगी का सवाल है। जब राजनीतिक नेता छात्रों के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं तो लोग उन्हें वोट क्यों दें? क्या लोग उन्हें सिर्फ इसलिए वोट देते हैं कि वे हेलीकॉप्टर में यात्रा कर सकें? लोगों को देखना चाहिए कि उनके बच्चे किन परिस्थितियों में पढ़ रहे हैं। इन मंत्रियों के कुत्तों को भी इससे बेहतर सुविधाएं मिलती हैं।"
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शिक्षा को प्राथमिकता देने की अपील
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने गांव में आने वाले हर राजनीतिक दल के नेता से पहले शिक्षा के लिए काम करने की मांग करें। दीपके ने कहा कि जब तक नेता शिक्षा के क्षेत्र में काम नहीं करते, तब तक लोगों को उनके घर के दरवाजे पर वोट मांगने नहीं देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस तरह राजनीति में जाति और समुदाय के झंडे लेकर लोग घरों से निकलते हैं, उसी तरह बच्चों के स्कूलों की समस्याओं के लिए भी लोगों को एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए।

धर्म के मुद्दे पर भी निशाना
दीपके ने राजनीतिक दलों के धर्म संबंधी बयानों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि नेता लगातार कहते रहते हैं कि धर्म खतरे में है। "इतने वर्षों में धर्म खत्म नहीं हुआ और अब आपके कार्यकाल में खत्म होने वाला है? धर्म कहीं नहीं जाएगा, लेकिन बच्चों का भविष्य जरूर प्रभावित हो सकता है," उन्होंने कहा।

मंत्रियों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने की मांग
दीपके ने कहा कि मंत्रियों और विधायकों को अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाना चाहिए, ताकि उन्हें वहां पढ़ने वाले छात्रों की वास्तविक परेशानियों का पता चल सके। दादा भुसे के शिक्षा मंत्री पद पर बने रहने के सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों की स्थिति देखकर उन्हें लगता है कि शिक्षा मंत्री को अपने पद पर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर सरकार वास्तव में सरकारी स्कूलों को सुधारने की गंभीरता समझना चाहती है तो मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों को अपने बच्चों को इन्हीं स्कूलों में पढ़ाना चाहिए।

10 साल में भी नहीं बदली तस्वीर
दीपके ने आरोप लगाया कि कई वर्षों से सत्ता में रहने के बावजूद सरकार सरकारी स्कूलों की स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं ला सकी है। उन्होंने कहा कि आज भी छात्र टपकती टिन की छतों के नीचे और पर्याप्त बेंचों के अभाव में पढ़ने को मजबूर हैं। उन्होंने सवाल किया कि यदि 10 वर्षों में ये बुनियादी समस्याएं भी दूर नहीं की जा सकीं तो सरकार बताए कि उसने आखिर क्या हासिल किया।

सांप के काटने की घटनाओं पर चिंता
उन्होंने कहा कि CJP और स्थानीय लोग स्कूलों की समस्याओं को लेकर सामूहिक रूप से आवाज उठाएंगे। साथ ही, कई किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाने वाले छात्रों के लिए सुरक्षित परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग सरकार के सामने रखी जाएगी। स्कूलों में सांप के काटने से बच्चों की कथित मौत की खबरों का हवाला देते हुए दीपके ने कहा कि ऐसी घटनाएं शिक्षा तक सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करने में प्रशासन की विफलता को उजागर करती हैं। उन्होंने स्कूल परिसर के पीछे जमा कबाड़ और कचरे पर भी चिंता जताई, जिससे सांपों के पनपने की स्थिति बनने का आरोप लगाया।

निरीक्षण के बाद शुरू हुआ काम
दीपके ने दावा किया कि CJP के निरीक्षण के बाद अधिकारियों ने कुछ स्कूलों में काम शुरू किया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए जनता की भागीदारी बेहद जरूरी है। उनके मुताबिक, लोगों ने फिर से अपनी आवाज उठानी शुरू कर दी है और लोकतंत्र में अधिक से अधिक संगठनों और आंदोलनों का सामने आना जरूरी है।

2029 में युवा मतदाता बनेंगे अहम
Gen Z की चिंताओं पर दीपके ने कहा कि 2029 के चुनाव तक युवा एक महत्वपूर्ण चुनावी ताकत बन जाएंगे और राजनीतिक दलों को उनके मुद्दों पर ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि स्कूलों में पढ़ रही युवा पीढ़ी के लिए भी सरकार को काम करना चाहिए। यदि युवाओं की चिंताओं को नजरअंदाज किया गया तो आने वाले समय में युवा मतदाता सरकारों से जवाब मांगेंगे। दीपके ने कहा कि यदि सरकार ने सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए कदम नहीं उठाए तो गांव-गांव से व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू हो सकते हैं।


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NEET पेपर लीक मामले में CBI जांच पर सवाल
लातूर में NEET पेपर लीक मामले की CBI जांच पर भी दीपके ने सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच का फोकस निचले स्तर के आरोपियों तक सीमित दिखाई दे रहा है, जबकि बड़े लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह विश्वास करना मुश्किल है कि वरिष्ठ अधिकारियों की संलिप्तता के बिना ऐसा मामला सामने आया होगा। उनके मुताबिक, केवल कुछ निचले स्तर के लोगों को गिरफ्तार कर कार्रवाई का दावा करना पर्याप्त नहीं है।

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