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डिजिटल अरेस्ट: सीबीआई-जज बनकर ऐंठे थे 7 करोड़, बंगाल का अख्तर विदेशियों को देता था म्यूल अकाउंट

Thu, 01 Oct 2026 05:46 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी डिजिटल ब्यूरो ,अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो ,अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Thu, 01 Oct 2026 05:46 PM IST
सार

ईडी ने पश्चिम बंगाल में तीन जगहों पर छापेमारी कर एसपी ओसवाल के डिजिटल अरेस्ट मामले में सोहेल अख्तर उर्फ राजू को गिरफ्तार किया। जांच में सात करोड़ रुपये की ठगी, म्यूल बैंक खातों, फर्जी कंपनियों और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए रकम विदेश भेजने का खुलासा हुआ। मामले में अब तक तीन गिरफ्तारियां हुई हैं।
 

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Digital Arrest ₹7 crore extorted by CBI officials judges Bengal Akhtar provided mule accounts to foreigners.
डिजिटल अरेस्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जालंधर जोनल ऑफिस ने पश्चिम बंगाल में तीन जगहों पर छापेमारी की है। एसपी ओसवाल के 'डिजिटल अरेस्ट' से जुड़े मामले में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत कोलकाता से सोहेल अख्तर उर्फ राजू को गिरफ्तार किया गया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सोहेल अख्तर उर्फ़ राजू को विशेष पीएमएलए कोर्ट, जालंधर के सामने पेश करने के लिए 28 सितंबर को को ट्रांजिट रिमांड की मंजूरी दी। अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश ने उसे छह अक्तूबर यानी सात दिनों के लिए ईडी की कस्टडी में भेज दिया है। सोहेल अख्तर, डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराध के मामलों का एक्सपर्ट था और विदेशियों को म्यूल खाते मुहैया कराता था। 

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ईडी की जांच लुधियाना के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में बीएनएसएस 2023 के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। जांच में इसी ग्रुप से जुड़े 'डिजिटल अरेस्ट' साइबर क्राइम के नौ और केस भी शामिल किए गए। ईडी की जांच से पता चला कि एसपी ओसवाल के 'डिजिटल अरेस्ट' के दौरान, धोखाधड़ी करने वालों ने सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन और न्यायपालिका के अधिकारी बनकर उनसे सात करोड़ रुपये ऐंठ लिए थे। 
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अपराध से हुई कमाई, शुरू में रिग्लो वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड और फ्रोजनमैन वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स के बैंक खातों में जमा की गई थी। फ्रोजनमैन वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स के बैंक खातों को गुवाहाटी के आरोपी रूमी कलिता और कानपुर के अर्पित राठौर कंट्रोल करते थे। आरोपियों ने अपराध से हुई कमाई को तेज़ी से इधर-उधर करने के लिए 'AMMFORWARD' नाम के APK एप्लिकेशन का इस्तेमाल किया था। अर्पित राठौर ने कंबोडिया, वियतनाम आदि के लोगों को कई 'म्यूल' बैंक खाते उपलब्ध कराए थे। उसे अपने 'बिनेंस' जो एक डिजिटल क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज है, खाते में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (क्रिप्टो-करेंसी) के रूप में कमीशन मिलता था। 
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इस मामले में आरोपी रूमी कलिता और अर्पित राठौर को गत वर्ष गिरफ्तार किया गया था। आगे की जांच से पता चला है कि Rigglo Ventures Private Limited के बैंक अकाउंट्स को सोहेल अख्तर उर्फ़ राजू कंट्रोल और ऑपरेट करता था। वह मुख्य व्यक्ति था जो लोगों और संस्थाओं के 'म्यूल बैंक अकाउंट्स' (दूसरे के नाम पर खोले गए अकाउंट्स जिनका इस्तेमाल गलत कामों के लिए होता है) का इंतज़ाम करने के लिए लोगों को भर्ती करता था। पता चला कि ऐसे मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल किया गया, जिनमें पहले से APK फ़ाइलें डाउनलोड थीं। इनमें Rigglo Ventures Private Limited और दूसरी संस्थाओं के बैंक अकाउंट्स से जुड़े सिम कार्ड डाले गए। 

इसके बाद इन मोबाइल फ़ोन पर APK फ़ाइलें एक्टिवेट की गईं, जिससे नेपाल में बैठे उनके साथियों को अपने मोबाइल डिवाइस पर ओटीपी और दूसरे एसएमएस मैसेज मिल सकें। इस तरीके से अपराध से मिली रकम को इन बैंक अकाउंट्स के ज़रिए तेज़ी से इधर-उधर भेजना आसान हो गया। सोहेल अख्तर उर्फ़ राजू ने विदेश में बैठे लोगों को कई 'म्यूल बैंक अकाउंट्स' उपलब्ध कराए और इसके बदले वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (क्रिप्टो-करेंसी) के रूप में कमीशन लिया, जो उसके 'बिनेंस' या उसके साथियों के अकाउंट्स में जमा हुआ।

इसके बाद अपराध से मिली रकम को एक व्यवस्थित तरीके से कई 'म्यूल बैंक अकाउंट्स' में ट्रांसफ़र किया गया, जिससे साइबर-क्राइम से मिली रकम को दूसरी जगह भेजने और छिपाने में आसानी हुई। आगे के अकाउंट्स का इस्तेमाल दूसरे साइबर-क्राइम और 'अकोमोडेशन एंट्रीज़' (फर्ज़ी एंट्रीज़) के लिए किया गया। कई अपराधों से जुड़ी करोड़ों की रकम जो इन अकाउंट्स में आई थी, उसे 'शेल एंटिटीज़' (फर्ज़ी कंपनियों) के ज़रिए कई लेयर्स में घुमाया गया। ट्रेड-बेस्ड मनी लॉन्ड्रिंग के तरीकों से भारत के बाहर भेजा गया। 

अपराध से मिली बाकी रकम को 2 से 5 लाख रुपये की छोटी-छोटी किश्तों में कई 'म्यूल बैंक अकाउंट्स' में ट्रांसफ़र किया गया और इन बैंक अकाउंट्स से तुरंत कैश निकाल लिया गया। इस कैश का इस्तेमाल वर्चुअल डिजिटल एसेट्स खरीदने के लिए किया गया। कमीशन काटने के बाद ये वर्चुअल डिजिटल एसेट्स विदेशी नागरिकों के अकाउंट्स में जमा कर दिए गए। ये 'म्यूल अकाउंट्स' आर्थिक रूप से कमज़ोर लोगों को लोन दिलाने या नौकरी देने का झूठा वादा करके खुलवाए गए थे। 

रकम के ट्रांसफर को दिखाने वाला फ्लो चार्ट ... 

ईडी की जांच से यह भी पता चला है कि विदेश में मौजूद साथियों के साथ 'म्यूल बैंक अकाउंट' की जानकारी शेयर करने के लिए 'एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड प्राइवेट मोबाइल मैसेजिंग ऐप्स' का इस्तेमाल किया गया। अब तक हुई जांच के नतीजतन तीन लोगों - सोहेल अख्तर उर्फ राजू (28.09.2026), रूमी कलिता (23.12.2025) और अर्पित राठौर (31.12.2025) - को गिरफ्तार किया गया है। 1.76 करोड़ रुपये की संपत्ति को अस्थायी रूप से जब्त करने का आदेश 14.02.2026 को जारी किया गया। रूमी कलिता, अर्पित राठौर, आनंद चौधरी, अतानु चौधरी तथा उनकी फर्म फ्रोज़नमैन वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स के खिलाफ इस साल 19 फरवरी को अभियोजन शिकायत दायर की गई। 

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