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Hindi News ›   India News ›   Digital Arrest: Fraudsters made victim transfer ₹2.6 crore to 'secret supervision accounts'; ED nabs three

डिजिटल अरेस्ट: ठगों ने पीड़ित से 'सीक्रेट सुपरविजन अकाउंट्स' में ट्रांसफर कराए ₹2.6 करोड़, ईडी ने तीन को दबोचा

Sat, 29 Aug 2026 06:42 PM IST
पवन पांडेय डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Sat, 29 Aug 2026 06:42 PM IST
सार

ईडी ने गोवा के ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर फ्रॉड मामले में तीन आरोपियों, भूषण सूर्यकांत मोये, विलास नारायण पवार और शैलेश दगडू चव्हाण, को गिरफ्तार किया है। तीनों को 1 सितंबर तक ईडी की हिरासत में भेजा गया है। आरोपियों ने एक गोवा निवासी को वीडियो कॉल पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर 2.60 करोड़ रुपये से ज्यादा रकम ‘सीक्रेट सुपरविजन अकाउंट्स’ में ट्रांसफर करने को मजबूर किया।

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Digital Arrest: Fraudsters made victim transfer ₹2.6 crore to 'secret supervision accounts'; ED nabs three
ED - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के पणजी जोनल ऑफिस ने गोवा के एक निवासी के साथ हुए 'डिजिटल अरेस्ट' साइबर फ्रॉड के मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये तीनों आरोपी एक सितंबर तक ईडी की हिरासत में भेजे गए हैं। इन्होंने पीड़ित व्यक्ति को वीडियो कॉल पर रखकर उसे 'सीक्रेट सुपरविजन अकाउंट्स' में दो करोड़ 60 लाख 33 हजार 634 रुपये ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया। बाद में इस रुपये को ऐसी कंपनियों में भेजा गया, जिनके डायरेक्टर कागजों पर तो ऐसे लोग थे, जिनके पास अपना कोई साधन नहीं था। उनके नाम पर खोले गए अकाउंट्स को कोई और चला रहा था। 
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इस मामले में अभी तक पांच गिरफ्तार
ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 की धारा 19 के तहत भूषण सूर्यकांत मोये, विलास नारायण पवार और शैलेश दगडू चव्हाण को गिरफ्तार किया है। इस मामले में गिरफ्तार लोगों की संख्या पांच हो गई है। इससे पहले फहीम मोइन हुसैन सैयद और नईम मुईन सैयद को 23 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। ईडी ने नॉर्थ गोवा के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में 9 जून 2025 को दर्ज एफआईआर संख्या 17/2025 के आधार पर इस मामले की जांच शुरू की थी। इस मामले में पीड़ित को वीडियो कॉल पर रखा गया और उसे यह विश्वास दिलाया गया कि वह आपराधिक जांच के दायरे में है। उसे मजबूर करके ढाई करोड़ रुपये से ज्यादा रकम 'सीक्रेट सुपरविजन अकाउंट्स' (गुप्त निगरानी खाते) में ट्रांसफर करा ली गई।
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विदेशी मुद्रा में बदलने का काम करता था
जांच से पता चला कि साइबर फ्रॉड से मिले पैसे एक ऐसे सिस्टम में गए जो बैंकिंग क्रेडिट के तौर पर पैसे लेने, उन्हें कैश में बदलने और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से 'फुल फ्लेज्ड मनी चेंजर' लाइसेंस वाली कंपनियों के जरिए विदेशी मुद्रा में बदलने का काम करता था। ये फंड चार सौ से ज्यादा फायदा उठाने वाले अकाउंट्स में बांटे गए। उसे ऐसी कंपनियों में भेजा गया, जिनके डायरेक्टर कागजों पर तो ऐसे लोग थे जिनके पास कोई साधन नहीं था, लेकिन अकाउंट्स कोई और चला रहा था। इसका मकसद, अपराध से हुई कमाई को साफ-सुथरा दिखाना था।
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20 से ज्यादा राज्यों में 330 शिकायतें, 163 केस दर्ज
इन कंपनियों के अकाउंट्स के खिलाफ 20 से ज्यादा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पीड़ितों की 330 शिकायतें व 163 एफआईआर दर्ज हैं। इनमें 417.49 करोड़ रुपये के नुकसान की बात कही गई है। इन अकाउंट्स से 27,850 करोड़ रुपये से ज्यादा के बैंकिंग ट्रांजैक्शन हुए हैं। एक चार्टर्ड अकाउंटेंट, भूषण सूर्यकांत मोये ने उन्हें दिए गए पहचान के दस्तावेजों के आधार पर नेटवर्क की 21 कंपनियां बनाईं। उन कंपनियों और उनके 43 डमी डायरेक्टरों को एक ग्रुप के तौर पर संभाला।


एक आरोपी ने आरटीजीएस एंट्री का इंतजाम किया
इस मामले में अलग-अलग काम के बजाय एक ही बार में उनके इनकम-टैक्स रिटर्न फाइल किए गए। विलास नारायण पवार ने आरटीजीएस एंट्रीज का इंतजाम किया, जिनसे गलत तरीके से कमाया गया पैसा नेटवर्क के अकाउंट्स तक पहुंचा। शैलेश दगडू चव्हाण ने उन ट्रांसफर के बदले कैश उपलब्ध कराया। ईडी ने इन तीनों आरोपियों के ठिकानों की तलाशी ली है। हैरानी की बात ये है कि मनी लॉन्ड्रिंग की गतिविधियां, आरोपियों की गिरफ्तारी से कुछ दिन पहले तक जारी रही। इसके चलते उन्हें गिरफ्तार करना और कस्टडी में पूछताछ करना जरूरी हो गया था। 
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