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तेलंगाना वोटर लिस्ट विवाद: 73 लाख नाम हटाने पर भड़के CM रेड्डी, चुनाव आयोग को लिखी चिट्ठी; बवाल की वजह क्या?

Sat, 29 Aug 2026 08:31 PM IST
राकेश कुमार एएनआई, पीटीआई/ नई दिल्ली।
एएनआई, पीटीआई/ नई दिल्ली। Published by: राकेश कुमार Updated Sat, 29 Aug 2026 08:31 PM IST
सार

तेलंगाना में एसआईआर के दौरान लगभग 73.39 लाख मतदाताओं के नाम संदिग्ध श्रेणी में डाले जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने चुनाव आयोग से शिकायत करते हुए आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया से करीब एक-तिहाई मतदाताओं का नाम कटने का खतरा पैदा हो गया है। क्या है पूरा मामला? जानिए... 
 

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telangana cm revanth reddy letter to cec voter list deletion controversy
रेवंत रेड्डी, मुख्यमंत्री तेलंगाना - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

तेलंगाना में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान को लेकर बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है। राज्य की कुल मतदाता सूची में से लगभग एक-तिहाई यानी करीब 73 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम काटने या संदिग्ध श्रेणी (एएसडीडी- अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृतक और डुप्लीकेट) में डाले जाने के बाद कांग्रेस सरकार ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का दरवाजा खटखटाया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की चिट्ठी को सार्वजनिक किया है। 
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हटाए गए वोटर लिस्ट से करीब एक-तिहाई नाम 
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को भेजी अपनी चिट्ठी में आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 10 जून 2026 तक राज्य में कुल 3.38 करोड़ पंजीकृत मतदाता थे। हालांकि, नए एसआईआर अभियान के दौरान इनमें से 73.39 लाख (21.7 प्रतिशत) नामों को अनुपस्थित, शिफ्टेड, मृतक या डुप्लीकेट की श्रेणी में डाला गया है। इसके अलावा, अब तक डिजिटाइज किए गए 2.65 करोड़ फॉर्मों में से 60.50 लाख फॉर्म त्रुटिपूर्ण पाए गए हैं, जबकि 32.36 लाख फॉर्म का पिछला लिंक नहीं मिल रहा है। इन सब आंकड़ों को जोड़ दिया जाए तो करीब 92.86 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी होने की नौबत आ गई है, जो कुल मतदाता आबादी का एक-तिहाई हिस्सा है।
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अस्थायी प्रवास को माना स्थाई!
चिट्ठी में तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग की सत्यापन प्रक्रिया में गंभीर खामियों की ओर इशारा किया है। उन्होंने कहा कि आयोग की वर्तमान प्रणाली में यह तय करने का कोई स्पष्ट तंत्र नहीं है कि मतदाता केवल कुछ समय के लिए बाहर गया है या हमेशा के लिए शिफ्ट हो गया है। जो लोग रोजगार, शादी या अन्य वजहों से थोड़े समय के लिए दूसरी जगह गए हैं, उनके नाम बिना उचित प्रक्रिया के हटाए जा रहे हैं। सीएम ने अंदेशा जताया है कि यदि इसमें सुधार नहीं हुआ तो लाखों जायज नागरिक चुनाव के दिन जब पोलिंग बूथ पर पहुंचेंगे, तब उन्हें पता चलेगा कि उनका वोट देने का अधिकार ही छीन लिया गया है।
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इन तीन जिलों में गहराया संकट
सीएम रेवंत रेड्डी ने बताया कि यह समस्या पूरे राज्य में एक समान नहीं है, बल्कि हैदराबाद, मेडचल-मलकाजगिरि और रंगारेड्डी जिलों पर इसका सबसे बुरा असर पड़ा है। राज्य की एक-तिहाई आबादी वाले इन तीन शहरी जिलों में ही पूरे राज्य के कुल एएसडीडी मामलों के 58.6 प्रतिशत और सत्यापन नोटिसों के 41.9 प्रतिशत मामले केंद्रित हैं। शहरी क्षेत्रों में किराएदार और कामकाजी लोग अक्सर अपने घर बदलते रहते हैं, ऐसे में उनसे लगातार एक ही पते का निवास प्रमाण पत्र मांगना पूरी तरह से व्यावहारिक नहीं है।

रेवंत रेड्डी ने आयोग के सामने रखीं ये बड़ी मांगें
चिट्ठी में मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग को स्पष्ट सुझाव दिए हैं कि प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और मतदाता-अनुकूल बनाया जाए:-

आपत्ति दर्ज कराने का समय बढ़े: 17 अगस्त से 16 सितंबर तक तय की गई समय-सीमा को कम से कम 4 सप्ताह और आगे बढ़ाया जाए। साथ ही अंतिम मतदाता सूची प्रकाशन की 19 अक्टूबर की तारीख को भी आगे खिसकाया जाए।

नोटिस का जवाब देने को मिले पर्याप्त समय: दैनिक मजदूरों और प्रवासियों को नोटिस का जवाब देने के लिए 1 हफ्ते की जगह 3 से 4 सप्ताह का वक्त मिले।


ग्राम सभा और वार्ड बैठकें हों: ड्राफ्ट रोल को पढ़कर सुनाने के लिए कम से कम दो बार ग्राम सभा और वार्ड समितियों की बैठकें बुलाई जाएं।

दस्तावेजों की सूची आसान हो: सरकारी आदेश (GO 172) के तहत मिलने वाले परिवार पंजीकरण प्रमाणपत्र और मंडल स्तर पर आसानी से उपलब्ध अन्य कागजातों को आयोग मान्यता प्रदान करे।

अतिरिक्त अधिकारी नियुक्त हों: हैदराबाद जैसे बड़े क्षेत्रों में चुनावी पंजीकरण अधिकारियों (ERO) की भारी कमी को दूर करने के लिए नीचे के स्तर पर अतिरिक्त अधिकारी तैनात किए जाएं।

राज्य सरकार हर संभव मदद को तैयार: रेवंत रेड्डी
मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग को आश्वासन दिया है कि तेलंगाना सरकार मतदाता सूची के शुद्धिकरण के खिलाफ नहीं है, लेकिन किसी भी योग्य नागरिक का नाम नहीं छूटना चाहिए। चूंकि राज्य में हाल-फिलहाल कोई चुनाव प्रस्तावित नहीं है, इसलिए प्रक्रिया को जल्दबाजी में निपटाने के बजाय पर्याप्त समय देकर पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य प्रशासन आयोग की मदद के लिए हेल्पडेस्क स्थापित करने, ग्राम सभाएं आयोजित करने और ढांचागत सहयोग देने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
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