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तमिलनाडु: सीएम पर DMK का हमला, मुखपत्र में अभिनेत्री को सलामी से लेकर कानून-व्यवस्था तक क्या-क्या सवाल उठाए?
Tue, 18 Aug 2026 01:02 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई।
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 18 Aug 2026 01:02 PM IST
सार
द्रमुक के मुखपत्र 'मुरासोली' ने कई मुद्दों को लेकर तमिलनाडु की विजय जोसफ सरकार पर निशाना साधा है। संपादकीय में सीएम की कार्यशैली से लेकर अपराध, नशे और मंत्रियों-विधायकों पर लगे आरोपों तक सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में पढ़िए साथ ही अभिनेत्री को सलामी देने के मुद्दे पर भी क्या-क्या कहा गया?
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सी. विजय जोसेफ, मुख्यमंत्री, तमिलनाडु
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) के मुखपत्र 'मुरासोली' ने मंगलवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. विजय जोसेफ और उनकी सरकार पर तीखा हमला बोला है। अखबार के संपादकीय में मुख्यमंत्री की कार्यशौली, प्रशासनिक फैलों, कानून-व्यवस्था और उनकी पार्टी से जुड़े नेताओं पर लगे आरोपों को लेकर निशाना साधा गया है।
तमिल भाषा में लिखे इसे संपादकीय में लिखा गया, स्वतंत्रता दिवस पर ध्वज फहराने वाले मुख्यमंत्री विजय की इज्जत की हवा निकल गई। उन्हें न शर्म थी और न झिझक। उन्होंने एक अभिनेत्री को सामने की पंक्ति में बैठाया और दोनों ने बारी-बारी से एक-दूसरे को सलामी दी। यह दृश्य उन लोगों से भी बर्दाश्त नहीं हुआ, जिन्होंने विजय को वोट दिया था। इस तरह की अश्लील और शर्मनाक हरकत को सही ठहराने की कोशिश करने वाले विजय आज तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने हैं।
इसमें आगे लिखा गया, सिर्फ तीन महीने में ही उन्हें डर लगने लगा है कि उनका प्रभाव और उनका पद टिकेगा या नहीं। उनके भाषण से भी यह डर साफ दिखाई देता है। ध्वज फहराने के बाद मुख्यमंत्री विजय ने कहा- आप सभी ने हमें वोट दिया है। विजय को जिताकर मुख्यमंत्री बना दिया है। इसलिए ऐसा कोई न सोचे कि उसका काम अब पूरा हो गया। तभी मैं आपके लिए जिन-जिन अच्छी योजनाओं के बारे में सोच रहा हूं, उन्हें लागू कर पाऊंगा।
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संपादकीय में कहा गया है कि विजय यह बात कहते हुए रोने और शिकायत करने जैसी मुद्रा में दिखाई दिए। आखिर इस रोने और शिकायत की वजह क्या है? जिन लोगों ने विजय पर भरोसा करके उन्हें वोट दिया था, वे अब कह रहे हैं कि हमने गलती कर दी। इसमें कोयंबटूर की 10 साल की बच्ची के साथ हुई यौन हिंसा का जिक्र करते हुए आरोप लगाया गया है कि विजय सरकार इस घटना को छिपाने की कोशिश कर रही है।
एक महिला के हवाले से लिखा गया है- 'आप तो एक्शन हीरो हैं। हमने यह सोचकर आपको वोट दिया था कि अगर कोई गलत काम होगा तो आप कार्रवाई करेंगे'। ऐसी बातें कहकर कई लोग अपना दुख और गुस्सा जाहिर कर रहे हैं।
फिल्म बनाने वालों को पद देने का आरोप
संपादकीय में तंज कसते हुए कहा गया है कि जिन लोगों ने चुनाव से पहले विजय के लिए पैसा खर्च किया, उन्हें अब पद मिल रहे हैं। क्या विजय यह सोचते हैं कि जनता हर बात पर सिर हिलाकर इसे स्वीकार कर लेगी?
अपराध और नशे को लेकर सरकार पर सवाल
मुरासोली में आगे कहा गया है कि ऐसा कोई दिन नहीं जाता जब यौन हिंसा की घटना सामने न आए। कोयंबटूर की घटना इसका उदाहरण है कि विजय सरकार घटनाओं को छिपाती है। आगे लिखा है कि नशीले पदार्थों के परिवहन पर भी कोई प्रभावी नियंत्रण नहीं है।
संपादकीय के मुताबिक, नशीले पदार्थों की आवाजाही की जानकारी देने के कारण कोयंबटूर के छात्र अमुधन की एक गिरोह ने पीट-पीटकर हत्या कर दी। इस घटना को छिपाने के लिए विधानसभा में मंत्री राजमोहन ने इसे 'दो गुटों के बीच झगड़े के कारण हुई मौत' बताया। पुलिस विभाग मुख्यमंत्री विजय के अधीन है, फिर भी उन्होंने इस मामले पर कुछ क्यों नहीं कहा?
मंत्रियों-विधायकों पर लगे आरोपों पर कार्रवाई क्यों नहीं?
द्रमुख के मुखपत्र में सवाल किया गया है कि क्या विजय ने अपने मंत्रियों या विधायकों के खिलाफ आई शिकायतों पर कोई कार्रवाई की है? तिरुवैकुंडम के विधायक सरवणन पर विजय की एक महिला प्रशंसक ने ही यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। उस महिला प्रशंसक को पार्टी से निकाल दिया गया, जबकि सरवणन को पुलिस सुरक्षा दे दी गई।
इसी तरह, सरकारी वकीलों की नियुक्ति में रिश्वत का आरोप लगाने वाले टीवीके के एक वकील को पार्टी से निकाल दिया गया। मंत्री सरतकुमार के खिलाफ विवाद होने के बावजूद वे अभी भी मंत्रिमंडल में हैं। इसके अलावा, करीब 100 करोड़ रुपये की मंदिर की संपत्ति हड़पने के मामले का भी जिक्र किया गया है और कहा गया है कि इसके बावजूद संबंधित व्यक्ति पद पर बना हुआ है।संपादकीय में पूछा गया कि विजय ने अब तक किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है।
सरकार की आलोचना करने पर गिरफ्तारी का आरोप
इसमें कहा गया है कि एक्स पर सरकार की आलोचना करने वाले लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है। अदालतें लगातार टीवीके सरकार के लोगों को फटकार लगा रही हैं। लेकिन उनमें कोई शर्म नहीं है। क्या विजय यह सोच रहे हैं कि सरकार इसी तरह चलती रहेगी और जनता सब कुछ सहती रहेगी?
ये भी पढ़ें: भाजपा ने तीन राज्यों के प्रभारियों का किया एलान, सतीश पूनिया को पंजाब की तो UP की इन्हें मिली जिम्मेदारी
स्वतंत्रता दिवस पर अभिनेत्री को सलामी देने पर सवाल
मुखपत्र में आगे कहा गया कि स्वतंत्रता दिवस समारोह में एक अभिनेत्री को बुलाकर उसे मुख्यमंत्री द्वारा सलामी देना विजय के अपने प्रशंसकों को भी स्वीकार नहीं हुआ। जब उनके प्रशंसक ही इसे स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं तो तमिलनाडु की जनता इसे कैसे स्वीकार करेगी? स्वतंत्रता दिवस पर आमतौर पर मीडिया आजादी की लड़ाई और स्वतंत्रता सेनानियों का इतिहास दिखाता है। लेकिन इस बार एक अभिनेत्री के साथ मुख्यमंत्री कितनी बार सार्वजनिक रूप से दिखाई दिए, इस तरह की बातें और तस्वीरें चर्चा में हैं और यह शर्मनाक स्थिति है।
क्या अभिनेता होने के कारण जनता सब स्वीकार कर लेगी?
क्या सिर्फ इसलिए कि विजय अच्छा डांस करते हैं, जनता बढ़ा हुआ बिजली बिल स्वीकार कर लेगी? क्या सिर्फ इसलिए कि विजय खूबसूरत मुस्कुराते हैं, तमिलनाडु के लोग कहेंगे कि जितना चाहो उतना संपत्ति कर बढ़ा दो?
सोशल मीडिया पर लोगों की नाराजगी का दावा
इसमें कहा गया है कि सोशल मीडिया पर लोग विजय की जमकर आलोचना कर रहे हैं। वहां ऐसे वीडियो ज्यादा वायरल हो रहे हैं जिनमें लोग कह रहे हैं- हमने आपको ही वोट दिया था। आपको वोट देने पर हमें अब पछतावा हो रहा है। इसी वजह से विजय लोगों से भावनात्मक अपील करते हुए कह रहे हैं- मेरे साथ रहिए, मुझे छोड़कर मत जाइए।
विधानसभा में सीएम विजय ने क्यों मांगी माफी?
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने सोमवार को विधानसभा में माफी मांगी। यह माफी एक मंत्री की उस टिप्पणी के बाद मांगी गई, जिसमें उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि का नाम बिना पारंपरिक सम्मानजनक संबोधन के लिया था। विजय ने कहा, मैं उनकी ओर से माफी मांगता हूं। इसके साथ ही विधानसभा में चल रहा तनाव खत्म हो गया।
तमिलनाडु के वन मंत्री आरवी रंजीत कुमार ने द्रमुक के वरिष्ठ नेता करुणानिधि का जिक्र सिर्फ 'करुणानिधि' के नाम से किया। उन्होंने उनके नाम के साथ आमतौर पर इस्तेमाल होने वाला 'कलैग्नर' यानी विद्वान या 'पूर्व मुख्यमंत्री' संबोधन नहीं लगाया। इसके तुरंत बाद विपक्षी द्रमुक के सदस्यों ने इस पर आपत्ति जताई।
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तमिल भाषा में लिखे इसे संपादकीय में लिखा गया, स्वतंत्रता दिवस पर ध्वज फहराने वाले मुख्यमंत्री विजय की इज्जत की हवा निकल गई। उन्हें न शर्म थी और न झिझक। उन्होंने एक अभिनेत्री को सामने की पंक्ति में बैठाया और दोनों ने बारी-बारी से एक-दूसरे को सलामी दी। यह दृश्य उन लोगों से भी बर्दाश्त नहीं हुआ, जिन्होंने विजय को वोट दिया था। इस तरह की अश्लील और शर्मनाक हरकत को सही ठहराने की कोशिश करने वाले विजय आज तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने हैं।
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इसमें आगे लिखा गया, सिर्फ तीन महीने में ही उन्हें डर लगने लगा है कि उनका प्रभाव और उनका पद टिकेगा या नहीं। उनके भाषण से भी यह डर साफ दिखाई देता है। ध्वज फहराने के बाद मुख्यमंत्री विजय ने कहा- आप सभी ने हमें वोट दिया है। विजय को जिताकर मुख्यमंत्री बना दिया है। इसलिए ऐसा कोई न सोचे कि उसका काम अब पूरा हो गया। तभी मैं आपके लिए जिन-जिन अच्छी योजनाओं के बारे में सोच रहा हूं, उन्हें लागू कर पाऊंगा।
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संपादकीय में कहा गया है कि विजय यह बात कहते हुए रोने और शिकायत करने जैसी मुद्रा में दिखाई दिए। आखिर इस रोने और शिकायत की वजह क्या है? जिन लोगों ने विजय पर भरोसा करके उन्हें वोट दिया था, वे अब कह रहे हैं कि हमने गलती कर दी। इसमें कोयंबटूर की 10 साल की बच्ची के साथ हुई यौन हिंसा का जिक्र करते हुए आरोप लगाया गया है कि विजय सरकार इस घटना को छिपाने की कोशिश कर रही है।
एक महिला के हवाले से लिखा गया है- 'आप तो एक्शन हीरो हैं। हमने यह सोचकर आपको वोट दिया था कि अगर कोई गलत काम होगा तो आप कार्रवाई करेंगे'। ऐसी बातें कहकर कई लोग अपना दुख और गुस्सा जाहिर कर रहे हैं।
फिल्म बनाने वालों को पद देने का आरोप
- द्रमुक के मुखपत्र ने आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री विजय ने अपनी फिल्म बनाने वाले फिल्म निर्माताओं को अहम पद देकर उनका सम्मान किया है।
- इसमें दावा किया गया है कि 'जननायकन' फिल्म बनाने वाले वेंकट नारायण को तमिलनाडु सरकार का दिल्ली में विशेष प्रतिनिधि बनाया गया है।
- मुखपत्र के मुताबिक, 'बिगिल' और 'द ग्रेटेस्ट ऑफ ऑल टाइम' जैसी फिल्मों की निर्माता अर्चना कल्पाथी को मंदिरों से जुड़े ट्रस्टियों के चयन की जिम्मेदारी देने की बात कही गई है।
- संपादकीय में कहा गया, 'लियो' फिल्म बनाने वाले जगदीश पलानीसामी को मुख्यमंत्री का निजी सचिव बनाया गया है।
संपादकीय में तंज कसते हुए कहा गया है कि जिन लोगों ने चुनाव से पहले विजय के लिए पैसा खर्च किया, उन्हें अब पद मिल रहे हैं। क्या विजय यह सोचते हैं कि जनता हर बात पर सिर हिलाकर इसे स्वीकार कर लेगी?
अपराध और नशे को लेकर सरकार पर सवाल
मुरासोली में आगे कहा गया है कि ऐसा कोई दिन नहीं जाता जब यौन हिंसा की घटना सामने न आए। कोयंबटूर की घटना इसका उदाहरण है कि विजय सरकार घटनाओं को छिपाती है। आगे लिखा है कि नशीले पदार्थों के परिवहन पर भी कोई प्रभावी नियंत्रण नहीं है।
संपादकीय के मुताबिक, नशीले पदार्थों की आवाजाही की जानकारी देने के कारण कोयंबटूर के छात्र अमुधन की एक गिरोह ने पीट-पीटकर हत्या कर दी। इस घटना को छिपाने के लिए विधानसभा में मंत्री राजमोहन ने इसे 'दो गुटों के बीच झगड़े के कारण हुई मौत' बताया। पुलिस विभाग मुख्यमंत्री विजय के अधीन है, फिर भी उन्होंने इस मामले पर कुछ क्यों नहीं कहा?
मंत्रियों-विधायकों पर लगे आरोपों पर कार्रवाई क्यों नहीं?
द्रमुख के मुखपत्र में सवाल किया गया है कि क्या विजय ने अपने मंत्रियों या विधायकों के खिलाफ आई शिकायतों पर कोई कार्रवाई की है? तिरुवैकुंडम के विधायक सरवणन पर विजय की एक महिला प्रशंसक ने ही यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। उस महिला प्रशंसक को पार्टी से निकाल दिया गया, जबकि सरवणन को पुलिस सुरक्षा दे दी गई।
इसी तरह, सरकारी वकीलों की नियुक्ति में रिश्वत का आरोप लगाने वाले टीवीके के एक वकील को पार्टी से निकाल दिया गया। मंत्री सरतकुमार के खिलाफ विवाद होने के बावजूद वे अभी भी मंत्रिमंडल में हैं। इसके अलावा, करीब 100 करोड़ रुपये की मंदिर की संपत्ति हड़पने के मामले का भी जिक्र किया गया है और कहा गया है कि इसके बावजूद संबंधित व्यक्ति पद पर बना हुआ है।संपादकीय में पूछा गया कि विजय ने अब तक किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की है।
सरकार की आलोचना करने पर गिरफ्तारी का आरोप
इसमें कहा गया है कि एक्स पर सरकार की आलोचना करने वाले लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है। अदालतें लगातार टीवीके सरकार के लोगों को फटकार लगा रही हैं। लेकिन उनमें कोई शर्म नहीं है। क्या विजय यह सोच रहे हैं कि सरकार इसी तरह चलती रहेगी और जनता सब कुछ सहती रहेगी?
ये भी पढ़ें: भाजपा ने तीन राज्यों के प्रभारियों का किया एलान, सतीश पूनिया को पंजाब की तो UP की इन्हें मिली जिम्मेदारी
स्वतंत्रता दिवस पर अभिनेत्री को सलामी देने पर सवाल
मुखपत्र में आगे कहा गया कि स्वतंत्रता दिवस समारोह में एक अभिनेत्री को बुलाकर उसे मुख्यमंत्री द्वारा सलामी देना विजय के अपने प्रशंसकों को भी स्वीकार नहीं हुआ। जब उनके प्रशंसक ही इसे स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं तो तमिलनाडु की जनता इसे कैसे स्वीकार करेगी? स्वतंत्रता दिवस पर आमतौर पर मीडिया आजादी की लड़ाई और स्वतंत्रता सेनानियों का इतिहास दिखाता है। लेकिन इस बार एक अभिनेत्री के साथ मुख्यमंत्री कितनी बार सार्वजनिक रूप से दिखाई दिए, इस तरह की बातें और तस्वीरें चर्चा में हैं और यह शर्मनाक स्थिति है।
क्या अभिनेता होने के कारण जनता सब स्वीकार कर लेगी?
क्या सिर्फ इसलिए कि विजय अच्छा डांस करते हैं, जनता बढ़ा हुआ बिजली बिल स्वीकार कर लेगी? क्या सिर्फ इसलिए कि विजय खूबसूरत मुस्कुराते हैं, तमिलनाडु के लोग कहेंगे कि जितना चाहो उतना संपत्ति कर बढ़ा दो?
सोशल मीडिया पर लोगों की नाराजगी का दावा
इसमें कहा गया है कि सोशल मीडिया पर लोग विजय की जमकर आलोचना कर रहे हैं। वहां ऐसे वीडियो ज्यादा वायरल हो रहे हैं जिनमें लोग कह रहे हैं- हमने आपको ही वोट दिया था। आपको वोट देने पर हमें अब पछतावा हो रहा है। इसी वजह से विजय लोगों से भावनात्मक अपील करते हुए कह रहे हैं- मेरे साथ रहिए, मुझे छोड़कर मत जाइए।
विधानसभा में सीएम विजय ने क्यों मांगी माफी?
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने सोमवार को विधानसभा में माफी मांगी। यह माफी एक मंत्री की उस टिप्पणी के बाद मांगी गई, जिसमें उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि का नाम बिना पारंपरिक सम्मानजनक संबोधन के लिया था। विजय ने कहा, मैं उनकी ओर से माफी मांगता हूं। इसके साथ ही विधानसभा में चल रहा तनाव खत्म हो गया।
तमिलनाडु के वन मंत्री आरवी रंजीत कुमार ने द्रमुक के वरिष्ठ नेता करुणानिधि का जिक्र सिर्फ 'करुणानिधि' के नाम से किया। उन्होंने उनके नाम के साथ आमतौर पर इस्तेमाल होने वाला 'कलैग्नर' यानी विद्वान या 'पूर्व मुख्यमंत्री' संबोधन नहीं लगाया। इसके तुरंत बाद विपक्षी द्रमुक के सदस्यों ने इस पर आपत्ति जताई।