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PM-CM Removal Bill: क्या PM-CM बर्खास्तगी वाले बिल में विपक्ष के नेता का पद भी शामिल है? संसदीय पैनल पूछा सवाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: लव गौर
Updated Wed, 07 Jan 2026 05:38 PM IST
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सार
PM-CM Removal Bill: संसदीय समिति के सदस्यों ने बुधवार को सवाल पूछा क्या विपक्ष के नेता का पद, जो एक वैधानिक पद है, वो भी प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को हटाने वाले बिल (130वां संविधान संशोधन बिल 2025) की जांच के दायरे में आता है। इस बिल के तहत प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री या किसी भी मंत्री को गिरफ्तारी या 30 दिन तक हिरासत में रहने पर अपना पद छोड़ना होगा।
संसद की फाइल तस्वीर
- फोटो : ANI Photos
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विस्तार
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों को गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तारी के बाद एक महीने तक जमानत न मिलने की स्थिति में पद से हटाने से जुड़े प्रस्तावित कानून को लेकर संसदीय समिति में बुधवार को अहम सवाल उठे। समिति के कई सदस्यों ने जानना चाहा कि क्या नेता प्रतिपक्ष का पद भी इस कानून के दायरे में आएगा?
बैठक में तीन विधेयकों पर चर्चा
भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी की अध्यक्षता वाली संयुक्त संसदीय समिति संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश शासन (संशोधन) विधेयक की समीक्षा कर रही है। बैठक में विधि आयोग के अध्यक्ष दिनेश महेश्वरी, एनएलयू के कुलपति जी.एस. बाजपेयी और नालसार विश्वविद्यालय के कुलपति श्रीकृष्ण देव राव ने अपने विचार रखे।
नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर पूछा सवाल
सूत्रों के मुताबिक समिति के कुछ सदस्यों ने सवाल उठाया कि यदि कोई नेता प्रतिपक्ष गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार होता है और एक महीने के भीतर जमानत नहीं ले पाता, तो क्या उसे भी पद से हटाया जा सकेगा। गौरतलब है कि नेता प्रतिपक्ष का पद एक वैधानिक पद है। बैठक के दौरान विपक्ष के एक सदस्य ने यह मांग भी की है कि संयुक्त समिति का हिस्सा नहीं होने वाले राजनीतिक दलों के नेताओं को भी इन विधेयकों पर अपनी राय रखने के लिए बुलाया जाए। हालांकि, समिति के कुछ सदस्यों ने इस सुझाव से असहमति जताई।
ये भी पढ़ें: PM-CM Removal Bill: पीएम-सीएम की बर्खास्तगी वाले बिल पर सवाल, पैनल ने पूछा- दुनिया में ऐसे कानून का उदाहरण है
इन बड़ी पार्टियों का समिति से किनारा
31 सदस्यीय इस समिति में विपक्ष से केवल एनसीपी की सुप्रिया सुले, एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी, अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल और वाईएसआरसीपी के एस. निरंजन रेड्डी शामिल हैं। वहीं कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, शिवसेना-यूबीटी और आम आदमी पार्टी ने समिति में शामिल होने से इनकार कर दिया है। इन दलों का आरोप है कि प्रस्तावित विधेयक उस मूल कानूनी सिद्धांत का उल्लंघन करते हैं, जिसके तहत किसी व्यक्ति को दोषी साबित होने तक निर्दोष माना जाता है।
ये भी पढ़ें: Explained: क्या हैं वो विधेयक, जिनसे गंभीर अपराध में फंसे पीएम-सीएम को हटाया जा सकेगा, विपक्ष क्यों विरोध में?
विधेयकों पर लिखित सुझाव मांगे
समिति अध्यक्ष अपराजिता सारंगी ने पत्रकारों से कहा कि बुधवार को समिति के सामने पेश हुए सभी विशेषज्ञों से लिखित सुझाव और टिप्पणियां देने को कहा गया है, ताकि विधेयकों पर विस्तृत विचार किया जा सके। इससे पहले बीते साल 17 दिसंबर को बैठक के दौरानसंसदीय पैनल ने पीएम और सीएम को हटाने के मकसद वाले बिलों के संबंध में सबूतों के आधार पर स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही प्रस्तावित कानून के लिए सबूतों पर आधारित वजह पूछी, और पूछा कि क्या दुनिया में कहीं भी ऐसे कानूनों का कोई उदाहरण है?
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भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी की अध्यक्षता वाली संयुक्त संसदीय समिति संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश शासन (संशोधन) विधेयक की समीक्षा कर रही है। बैठक में विधि आयोग के अध्यक्ष दिनेश महेश्वरी, एनएलयू के कुलपति जी.एस. बाजपेयी और नालसार विश्वविद्यालय के कुलपति श्रीकृष्ण देव राव ने अपने विचार रखे।
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नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर पूछा सवाल
सूत्रों के मुताबिक समिति के कुछ सदस्यों ने सवाल उठाया कि यदि कोई नेता प्रतिपक्ष गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार होता है और एक महीने के भीतर जमानत नहीं ले पाता, तो क्या उसे भी पद से हटाया जा सकेगा। गौरतलब है कि नेता प्रतिपक्ष का पद एक वैधानिक पद है। बैठक के दौरान विपक्ष के एक सदस्य ने यह मांग भी की है कि संयुक्त समिति का हिस्सा नहीं होने वाले राजनीतिक दलों के नेताओं को भी इन विधेयकों पर अपनी राय रखने के लिए बुलाया जाए। हालांकि, समिति के कुछ सदस्यों ने इस सुझाव से असहमति जताई।
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इन बड़ी पार्टियों का समिति से किनारा
31 सदस्यीय इस समिति में विपक्ष से केवल एनसीपी की सुप्रिया सुले, एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी, अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल और वाईएसआरसीपी के एस. निरंजन रेड्डी शामिल हैं। वहीं कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, शिवसेना-यूबीटी और आम आदमी पार्टी ने समिति में शामिल होने से इनकार कर दिया है। इन दलों का आरोप है कि प्रस्तावित विधेयक उस मूल कानूनी सिद्धांत का उल्लंघन करते हैं, जिसके तहत किसी व्यक्ति को दोषी साबित होने तक निर्दोष माना जाता है।
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विधेयकों पर लिखित सुझाव मांगे
समिति अध्यक्ष अपराजिता सारंगी ने पत्रकारों से कहा कि बुधवार को समिति के सामने पेश हुए सभी विशेषज्ञों से लिखित सुझाव और टिप्पणियां देने को कहा गया है, ताकि विधेयकों पर विस्तृत विचार किया जा सके। इससे पहले बीते साल 17 दिसंबर को बैठक के दौरानसंसदीय पैनल ने पीएम और सीएम को हटाने के मकसद वाले बिलों के संबंध में सबूतों के आधार पर स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही प्रस्तावित कानून के लिए सबूतों पर आधारित वजह पूछी, और पूछा कि क्या दुनिया में कहीं भी ऐसे कानूनों का कोई उदाहरण है?
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