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Aviation: तेल संकट और डॉलर की मार से थमी घरेलू उड़ानों की रफ्तार, जानिए जून में क्यों घटेंगी फ्लाइट्स?

Tue, 26 May 2026 02:07 PM IST
Asmita Tripathi डिजिटल ब्यूरो ,अमर उजाला, नई दिल्ली।
डिजिटल ब्यूरो ,अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: Asmita Tripathi Updated Tue, 26 May 2026 02:07 PM IST
सार

भारतीय एयरलाइंस पर सबसे बड़ा दबाव एविएशन टर्बाइन फ्यूल की बढ़ती कीमतों का पड़ा है। एटीएफ किसी भी विमानन कंपनी की कुल परिचालन लागत का करीब 40 फीसदी हिस्सा होता है।

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Domestic flights have slowed down due to the oil crisis and the dollar; find out why flights will decrease in
विमान (सांकेतिक) - फोटो : एडॉब स्टॉक / अमर उजाला

विस्तार

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईंधन महंगा होने का असर अब भारतीय विमान सेवाओं पर भी दिखने लगा है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के साथ घरेलू हवाई सेवा भी प्रभावित हो रही है। आगामी जून के ताजा शेड्यूल के मुताबिक जून में घरेलू उड़ानों की संख्या करीब 7 फीसदी कमी देखने को मिल सकती है। जबकि पिछले वर्ष जून में एयरलाइंस ने 22,220 घरेलू उड़ानें संचालित की थींं जबकि इस बार यह संख्या घटकर 20,670 रहने का अनुमान है।

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सबसे बड़ी गिरावट किस एयरपोर्ट पर?
घरेलू उड़ानों में सबसे बड़ी गिरावट हैदराबाद एयरपोर्ट पर दर्ज होने की संभावना है। जीएमआर ग्रुप संचालित इस हवाई अड्डे से जून में साप्ताहिक घरेलू उड़ानों की संख्या पिछले साल के मुकाबले 371 कम रह सकती है। विमानन विश्लेषण फर्म सिरियम के आंकड़ों के मुताबिक, अगले महीने हैदराबाद एयरपोर्ट से करीब 1,420 घरेलू उड़ानें संचालित होंगी। जबकि जून 2025 में यह संख्या 1,791 थी।
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जीएमआर ग्रुप के गोवा स्थित मोपा एयरपोर्ट पर भी घरेलू उड़ानों में गिरावट दर्ज की जा रही है। जून में यहां साप्ताहिक घरेलू सेवाएं 106 कम रहने का अनुमान है। वहीं, फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स संचालित बेंगलुरु एयरपोर्ट पर भी असर साफ दिखेगा, जहां पिछले साल के मुकाबले साप्ताहिक घरेलू उड़ानों की संख्या 293 घट सकती है। इसके अलावा अदाणी समूह संचालित एयरपोर्ट्स पर भी उड़ानों में कटौती का असर दिख रहा है। जून में मुंबई एयरपोर्ट से साप्ताहिक घरेलू उड़ानें 253 तक घट सकती हैं। जबकि अहमदाबाद एयरपोर्ट पर 111 उड़ानों की कमी का अनुमान है।
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दरअसल, भारतीय एयरलाइंस पर सबसे बड़ा दबाव एविएशन टर्बाइन फ्यूल की बढ़ती कीमतों का पड़ा है। एटीएफ किसी भी विमानन कंपनी की कुल परिचालन लागत का करीब 40 फीसदी हिस्सा होता है। इसके अलावा विमान लीज और रखरखाव का खर्च डॉलर में होने से रुपये की कमजोरी भी कंपनियों की लागत बढ़ा रही है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के एयरपोर्ट भी इससे अछूते नहीं हैं। चेन्नई एयरपोर्ट से इस बार 279 साप्ताहिक घरेलू उड़ानें कम संचालित होंगी। कोलकाता में 191, भुवनेश्वर में 96, कोच्चि में 84 और वाराणसी में 60 साप्ताहिक घरेलू उड़ानों में कमी आने की संभावना है।

एयरलाइंस की बात करें तो टाटा समूह की फुल-सर्विस एयरलाइन जून में 2,655 साप्ताहिक घरेलू उड़ानें संचालित करेगी, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह संख्या 3,696 थी। यानी कंपनी के घरेलू संचालन में 28 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज हो सकती है। स्पाइसजेट की घरेलू सेवाओं में करीब 13 फीसदी और एयर इंडिया एक्सप्रेस में लगभग 10 फीसदी कमी आने का अनुमान है। इंडिगो भी घरेलू उड़ानों में हल्की कटौती कर सकती है, जहां साप्ताहिक सेवाएं 13,165 से घटकर 12,852 रह सकती हैं।


वहीं, चुनौतीपूर्ण माहौल के बीच अकासा एयर घरेलू संचालन बढ़ाने वाली एकमात्र बड़ी एयरलाइन बनकर उभरी है। कंपनी जून में पिछले साल के मुकाबले 11 फीसदी ज्यादा, यानी 1,099 साप्ताहिक घरेलू उड़ानें संचालित करने की तैयारी में है। 

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