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E20 Petrol: 'माइलेज पर मामूली असर, इंजन पर नहीं', ई20 पेट्रोल को लेकर गडकरी ने क्या-क्या दावे किए?

Thu, 09 Jul 2026 03:52 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Thu, 09 Jul 2026 03:52 PM IST
सार

E20 Petrol: सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने उन दावों को खारिज किया है, जिनमें कहा जा रहा था कि ई20 पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहनों के इंजन खराब हो रहे हैं और माइलेज कम हो रहा है। सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही बातें दुष्प्रचार का हिस्सा हैं। गडकरी ने क्या दावे किए, पढ़िए रिपोर्ट-

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e20 petrol mileage impact engine damage myths nitin gadkari explains
नितिन गडकरी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई (फाइल)

विस्तार

वाहनों में पेट्रोल के साथ ज्यादा इथेनॉल मिलाने को लेकर बहस जारी है। इस बीच, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल से कम होती है। इसलिए जैसे-जैसे पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ती है, वैसे-वैसे गाड़ी का औसत माइलेज थोड़ा कम हो सकता है। लेकिन ज्यादातर मामलों में इसका असर बहुत कम होगा। गडकरी ने यह बात 'इंडियन एक्सप्रेस' से बातचीत में कही।
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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा?
  • केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि सोशल मीडिया पर ई20 पेट्रोल से वाहनों के खराब होने की जो बातें सामने आ रही हैं, उन्हें बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। उनके मुताबिक, यह एक सुनियोजित दुष्प्रचार है।
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  • गडकरी ने कहा कि ई20 मिश्रण (20 फीसदी इथेनॉल और 80 फीसदी पेट्रोल) को पूरे देश में लागू करने से पहले पुणे स्थित ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई) और वाहन बनाने वाली कंपनियों ने कई तरह के परीक्षण किए थे। सभी जरूरी मंजूरी मिलने के बाद ही इसे लागू किया गया।
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  • पुराने वाहनों के कुछ छोटे पुर्जों पर थोड़ा असर पड़ सकता है। इसे देखते हुए वाहन कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि सर्विस के दौरान वे ऐसे पुर्जों को बदल दें।
गडकरी ने कहा, मुझे एक भी ऐसी गाड़ी दिखाइए जो ई20 पेट्रोल की वजह से खराब हुई हो। सोशल मीडिया पर जो बातें फैलाई जा रही हैं, वे एक सुनियोजित दुष्प्रचार का हिस्सा हैं। 

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माइलेज को लेकर गडकरी ने क्या कहा?
माइलेज के बारे में गडकरी ने कहा, 'देखिए, दो बातें हैं। पहली, इथेनॉल और पेट्रोल की ऊर्जा क्षमता में अंतर है, यह सच है। लेकिन माइलेज इस बात पर भी निर्भर करता है कि वाहन किन परिस्थितियों में चलाया जा रहा है। दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में ट्रैफिक के कारण गाड़ियां अक्सर कम गियर में चलती हैं।'

उन्होंने एआरएआई की की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि खास तौर पर फ्लेक्स-फ्यूल इंजन वाली गाड़ियों में माइलेज की कोई समस्या नहीं है। इसलिए हम फ्लेक्स-फ्यूल इंजन तकनीक को भी बढ़ावा दे रहे हैं। 

उन्होंने आगे कहा, अगर आप दिल्ली से गुरुग्राम के बीच ट्रैफिक में गाड़ी चला रहे हैं, तो बार-बार ब्रेक लगाना पड़ता है। लाल बत्ती आने से पहले गाड़ी की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा से ज्यादा नहीं हो पाती। लेकिन अगर आप लगातार 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गाड़ी चलाते हैं, तो माइलेज में कुछ अंतर दिखाई दे सकता है। 

इंजन में खराबी के दावों पर क्या कहा?
  • इंजन खराब होने के दावों पर नितिन गडकरी ने कहा कि उन्होंने कुछ मामलों की जांच करने के लिए कंपनियों से कहा था। जांच में पता चला कि वहां मिलावटी ईंधन जिम्मेदार था, ई20 पेट्रोल नहीं।  
  • गडकरी ने कहा कि फ्लेक्स-फ्यूल इंजन बनाने के दौरान कई नई बातें सीखने को मिलीं और इसमें इस्तेमाल होने वाले पुर्जों में भी सुधार किया गया है।
  • उन्होंने कहा, पुरानी गाड़ियों में सर्विस के दौरान इस्तेमाल होने वाले कुछ वॉशर पहले धातु के होते थे। अब वे रबर के बनाए जा रहे हैं। हमने वाहन कंपनियों को निर्देश दिया है कि सर्विस के समय ये वॉशर बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के बदल दिए जाएं।
  • केंद्रीय मंत्री ने कहा, मेरी जानकारी में ई20 पेट्रोल की वजह से कोई गाड़ी बंद नहीं हुई है। प्रदर्शन की बात करें तो इथेनॉल बेहतर साबित हुआ है। इसमें इंजन की नॉकिंग कम होती है और इसका ऑक्टेन नंबर भी ज्यादा है। मैं वर्ष 2004 से इथेनॉल को वैकल्पिक ईंधन के रूप में बढ़ावा देने की बात करता रहा हूं। 

नए मॉडल बाजार में लाने की तैयारी में कंपनियां?
उन्होंने कहा कि फ्लेक्स-फ्यूल इंजन तकनीक आने के साथ करीब एक दर्जन कंपनियां अपने नए मॉडल बाजार में लाने की तैयारी कर रही हैं। इनमें टाटा मोटर्स, महिंद्रा, हुंडई, टोयोटा किर्लोस्कर और मारुति सुजुकी जैसी कंपनियां शामिल हैं। 

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उन्होंने बताया कि ब्राजील में वर्ष 1970 से 27 फीसदी इथेनॉल और पेट्रोल का मिश्रण इस्तेमाल किया जा रहा है। वहां होंडा और हुंडई की फ्लेक्स-फ्यूल इंजन वाली गाड़ियां बिना किसी परेशानी के चल रही हैं।

गडकरी ने कहा, हमारा उद्देश्य लोगों को विकल्प देना है। अलग-अलग कीमतों पर अलग-अलग ईंधन मिश्रण उपलब्ध कराना चाहते हैं, क्योंकि इथेनॉल की कीमत लगभग 75 रुपये प्रति लीटर है। उन्होंने कहा, फ्लेक्स-फ्यूल हाइब्रिड वाहन ज्यादा ईंधन बचाते हैं, क्योंकि इनमें लगी इलेक्ट्रिक प्रणाली ऊर्जा को बैटरी में जमा कर देता है।

'हरसंभव विकल्प तलाशना जरूरी'
गडकरी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट ने यह दिखा दिया है कि जीवाश्म ईंधन के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए हरसंभव विकल्प तलाशना जरूरी है।

उन्होंने बताया, कर्नाटक में अशोक लेलैंड ने कर्नाटक राज्य परिवहन निगम के साथ मिलकर 15 फीसदी मेथेनॉल और डीजल के मिश्रण पर 25 बसें तीन महीने तक चलाईं। इसके बाद प्रमाणित किया गया कि कोई समस्या नहीं आई। फिर अशोक लेलैंड ने ऐसा विशेष मेथेनॉल इंजन विकसित किया, जिससे ट्रक और बसें पूरी तरह मेथेनॉल पर चल सकें।

उन्होंने आगे कहा, अभी असम पेट्रो-केमिकल्स रोज 700 टन मेथेनॉल बनाती है। इसकी कीमत लगभग 20 से 22 रुपये प्रति लीटर है, जबकि डीजल की कीमत करीब 110 रुपये प्रति लीटर है। इससे काफी खर्च बच सकता है। 

उन्होंने कहा कि इस ईंधन से प्रदूषण भी बहुत कम होता है। पूर्वोत्तर भारत में ट्रक और बसों के लिए मेथेनॉल का इस्तेमाल किया जा सकता है। यह समुद्री इंजनों के लिए भी बहुत अच्छा ईंधन है। ब्रह्मपुत्र नदी में जल परिवहन और बांग्लादेश जाने वाली नौकाओं में मेथेनॉल से चलने वाले इंजन इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इससे डीजल और पेट्रोल की बचत होगी। 

गडकरी ने कहा कि बांस से बनने वाली रिफाइनरी के जरिये इथेनॉल और मेथेनॉल दोनों बनाए जा सकते हैं। इससे पूर्वोत्तर में बसें, ट्रक और निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाली मशीनें डीजल की जगह मेथेनॉल पर चल सकेंगी। 


इथेनॉल से आइसो-ब्यूटेनॉल बनाने को लेकर क्या कहा?
उन्होंने आगे कहा कि इथेनॉल से आइसो-ब्यूटेनॉल भी बनाया जाता है, जो डीजल का विकल्प बन सकता है। इसकी जरूरत इसलिए है, क्योंकि इथेनॉल को सीधे डीजल इंजन में नहीं मिलाया जा सकता।

उन्होंने बताया कि किर्लोस्कर समूह ने दो जनरेटर सेट तैयार किए हैं। एक 100 फीसदी आइसो-ब्यूटेनॉल पर चलता है और दूसरा इथेनॉल पर। दोनों सफल रहे हैं। 

गडकरी ने कहा, अगर ट्रैक्टर, खेती के उपकरण, हार्वेस्टर और निर्माण कार्य की मशीनों में आइसो-ब्यूटेनॉल का इस्तेमाल किया जाए, तो डीजल का आयात खत्म किया जा सकता है। जनरेटर सेट सीएनजी, इथेनॉल, मेथेनॉल या आइसो-ब्यूटेनॉल इन सभी स्वदेशी ईंधनों पर चल सकते हैं।

उन्होंने कहा, हम विदेशी ईंधन और आयात पर निर्भर नहीं रहना चाहते। अभी हम लगभग 2 लाख करोड़ रुपये के जीवाश्म ईंधन का आयात करते हैं और प्रदूषण का बड़ा कारण भी यही ईंधन हैं। निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाली मशीनों को भी बिजली से चलाया जा सकता है। 
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