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Economic Survey: आर्थिक सर्वेक्षण में RTI कानून की समीक्षा की सिफारिश, गोपनीय दस्तावेजों की सुरक्षा पर जोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Thu, 29 Jan 2026 04:42 PM IST
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सार
Economic Survey: आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि RTI कानून को उसकी मूल भावना बनाए रखते हुए आधुनिक जरूरतों के अनुसार संतुलित किया जाना चाहिए। सर्वेक्षण के अनुसार, निर्णय लेने से पहले के ड्राफ्ट दस्तावेजों और आंतरिक विचार-विमर्श के सार्वजनिक होने से प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो सकता है।
निर्मला सीतारमण
- फोटो : ANI
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विस्तार
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को लोकसभा में आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया। इस आर्थिक सर्वेक्षण में लगभग 20 साल पुराने सूचना का अधिकार (RTI) कानून, 2005 की समीक्षा की बात कही गई है। इसके साथ ही सर्वेक्षण में यह स्पष्ट कहा गया है कि इस कानून को केवल जिज्ञासा पूरी करने या सरकार को बाहरी निगरानी के माध्यम से नियंत्रित करने के लिए नहीं बल्कि सार्वजनिक कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतंत्र में नागरिक भागीदारी बढ़ाने के लिए बनाया गया था।
कानून में बदलाव का सुझाव
सर्वेक्षण में सुझाव दिया गया कि कानून में कुछ बदलाव किए जा सकते हैं। इनमें विचार-मंथन नोट्स, ड्राफ्ट टिप्पणियां और कार्य-पत्र तब तक खुलासे से सुरक्षित रखने की बात कही गई है जब तक वे अंतिम निर्णय का हिस्सा न बन जाएं। इसके अलावा, सेवा रिकॉर्ड, स्थानांतरण और गोपनीय कर्मचारी रिपोर्ट को ऐसे सामान्य RTI अनुरोधों से बचाने की सिफारिश की गई है जिनका सार्वजनिक हित से कमजोर संबंध हो।
सर्वेक्षण में रखा अहम प्रस्ताव
सर्वेक्षण में यह भी प्रस्ताव रखा गया है कि कुछ मामलों में मंत्री स्तरीय संकुचित वीटो का प्रावधान किया जाए, जिसे संसद की निगरानी में रखा जाए। हालांकि, सर्वेक्षण में जोर देकर कहा गया है कि ये केवल सुझाव हैं और कानून की मूल भावना को कमजोर करने का उद्देश्य नहीं रखता है।
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'राय देने से झिझकते हैं अधिकारी'
सर्वेक्षण में यह भी बताया गया कि वैश्विक अनुभव दिखाते हैं कि पारदर्शिता तभी प्रभावी होती है जब अधिकारियों के लिए ईमानदार और खुला विचार-विमर्श संभव हो। अमेरिका, स्वीडन और ब्रिटेन में नीति ड्राफ्ट, आंतरिक नोट्स और वित्तीय दस्तावेजों को सुरक्षित रखा जाता है। भारत में, इसके विपरीत, अधिकांश ड्राफ्ट नोट्स, आंतरिक पत्राचार और व्यक्तिगत रिकॉर्ड सार्वजनिक हो जाते हैं, जिससे अधिकारी खुले तौर पर राय व्यक्त करने या साहसिक निर्णय लेने में हिचकिचा सकते हैं।
ये भी पढ़ें: आर्थिक सर्वे के 800 पन्नों का निचोड़: घरेलू मोर्चे पर मजबूती, लेकिन बाहरी चुनौतियों का डर; जानिए बड़ी बातें
'अफसर केवल अंतिम निर्णय के लिए जवाबदेह'
सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि लोकतंत्र तभी मजबूत रहता है जब अधिकारी निर्णय लेने की प्रक्रिया में स्वतंत्र रूप से विचार-विमर्श कर सकें, और केवल अंतिम निर्णय के लिए जवाबदेह हों, न कि हर अधूरा विचार सार्वजनिक होने पर।
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कानून में बदलाव का सुझाव
सर्वेक्षण में सुझाव दिया गया कि कानून में कुछ बदलाव किए जा सकते हैं। इनमें विचार-मंथन नोट्स, ड्राफ्ट टिप्पणियां और कार्य-पत्र तब तक खुलासे से सुरक्षित रखने की बात कही गई है जब तक वे अंतिम निर्णय का हिस्सा न बन जाएं। इसके अलावा, सेवा रिकॉर्ड, स्थानांतरण और गोपनीय कर्मचारी रिपोर्ट को ऐसे सामान्य RTI अनुरोधों से बचाने की सिफारिश की गई है जिनका सार्वजनिक हित से कमजोर संबंध हो।
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सर्वेक्षण में रखा अहम प्रस्ताव
सर्वेक्षण में यह भी प्रस्ताव रखा गया है कि कुछ मामलों में मंत्री स्तरीय संकुचित वीटो का प्रावधान किया जाए, जिसे संसद की निगरानी में रखा जाए। हालांकि, सर्वेक्षण में जोर देकर कहा गया है कि ये केवल सुझाव हैं और कानून की मूल भावना को कमजोर करने का उद्देश्य नहीं रखता है।
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'राय देने से झिझकते हैं अधिकारी'
सर्वेक्षण में यह भी बताया गया कि वैश्विक अनुभव दिखाते हैं कि पारदर्शिता तभी प्रभावी होती है जब अधिकारियों के लिए ईमानदार और खुला विचार-विमर्श संभव हो। अमेरिका, स्वीडन और ब्रिटेन में नीति ड्राफ्ट, आंतरिक नोट्स और वित्तीय दस्तावेजों को सुरक्षित रखा जाता है। भारत में, इसके विपरीत, अधिकांश ड्राफ्ट नोट्स, आंतरिक पत्राचार और व्यक्तिगत रिकॉर्ड सार्वजनिक हो जाते हैं, जिससे अधिकारी खुले तौर पर राय व्यक्त करने या साहसिक निर्णय लेने में हिचकिचा सकते हैं।
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'अफसर केवल अंतिम निर्णय के लिए जवाबदेह'
सर्वेक्षण में यह भी कहा गया है कि लोकतंत्र तभी मजबूत रहता है जब अधिकारी निर्णय लेने की प्रक्रिया में स्वतंत्र रूप से विचार-विमर्श कर सकें, और केवल अंतिम निर्णय के लिए जवाबदेह हों, न कि हर अधूरा विचार सार्वजनिक होने पर।
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