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ED: विदेश में डेयरी उत्पाद भेजने की मंजूरी पाने के लिए तैयार कराई फर्जी रिपोर्ट, कोर्ट में पेश होंगे आरोपी

डिजिटल ब्यूरो ,अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Asmita Tripathi Updated Fri, 19 Jun 2026 02:55 PM IST
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सार

ED: दूसरे मुल्कों में डेयरी उत्पाद भेजने की मंजूरी पाने के लिए तैयार कराई 'फर्जी लैबोरेटरी रिपोर्ट', कोर्ट में पेश होंगे आरोपी  
 

ED: Fake report prepared to secure approval for exporting dairy products; accused to appear in court.
ED - फोटो : ED
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विस्तार

ईडी ने भोपाल जोनल ऑफिस ने स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) में सुनील कुमार त्रिपाठी और अन्य लोगों के खिलाफ एक सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (अतिरिक्त अभियोजन शिकायत) दायर की है। दूसरे मुल्कों में डेयरी उत्पाद भेजने की मंजूरी पाने के लिए आरोपियों ने 'फर्जी लैबोरेटरी रिपोर्ट' तैयार कराई थी। अब स्पेशल कोर्ट ने आरोपियों को पेश होने के लिए नोटिस जारी किए हैं। 


ईडी ने हबीबगंज पुलिस स्टेशन भोपाल और इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ईओडब्लू), द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। ये एफआईआर, जयश्री गायत्री फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (जेजीएफपीएल) से जुड़े डायरेक्टरों, अधिकारियों और अन्य लोगों के खिलाफ आईपीसी, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई थीं। 
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पीएमएलए जांच से पता चला है कि जेजीएफपीएल 'मिलावटी डेयरी उत्पादों के निर्माण और निर्यात' में शामिल थी। निर्यात की मंजूरी पाने के लिए 'फर्जी लैबोरेटरी रिपोर्ट' का इस्तेमाल करती थी। जेजीएफपीएल के तत्कालीन सीईओ सुनील कुमार त्रिपाठी ने दूसरों के साथ मिलकर ऐसी फर्जी रिपोर्ट तैयार करने और उनका इस्तेमाल करने में अहम भूमिका निभाई थी।
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इन फर्जी रिपोर्ट का इस्तेमाल बाद में हेल्थ सर्टिफिकेट हासिल करने के लिए किया गया, जिनके आधार पर निर्यात किया जाता था। जांच में यह भी पता चला है कि सुनील कुमार त्रिपाठी, जेजीएफपीएल के स्टॉक से डेयरी उत्पादों को दूसरी जगह भेजने और उनके गलत इस्तेमाल में शामिल थे। इन उत्पादों को फर्जी इनवॉइस और बिल का इस्तेमाल करके, उनके कंट्रोल वाली कंपनियों - जैसे सियाजीत एक्सपोर्ट्स, सुगम फूड्स और अन्य के जरिए बेचा गया। ऐसी बिक्री से मिली रकम को कई कंपनियों के जरिए घुमाया गया। 

फर्जी लेन-देन के जरिए आपस में जुड़ी न होने वाली कंपनियों की एक चेन के माध्यम से छिपाया गया, ताकि पैसे के असली स्रोत का पता न चल सके। इससे पहले, ईडी ने पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत इस मामले में 23.59 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया था। साथ ही, ईडी ने पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत जेजीएफपीएल के मैनेजिंग डायरेक्टर किशन मोदी और कंपनी के पूर्व सीईओ सुनील कुमार त्रिपाठी को गिरफ्तार किया था, जो अभी न्यायिक हिरासत में हैं। अपराध से हुई और कमाई का पता लगाने, मनी ट्रेल (पैसे के लेन-देन का रास्ता) का पता लगाने और मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध में अन्य लोगों/कंपनियों की भूमिका का पता लगाने के लिए आगे की जांच चल रही है।
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