ईडी: पटियाला और पुणे के कॉल सेंटर से अमेरिका में कर रहे थे धोखाधड़ी; 66 फोन, 13 लैपटॉप व हार्ड डिस्क जब्त
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के हैदराबाद ज़ोनल ऑफ़िस ने 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (पीएमएलए), 2002 की धारा 17 के तहत पटियाला, पुणे और चंडीगढ़ में चार जगहों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई अमेरिका के नागरिकों को निशाना बनाने वाले एक फर्जी कॉल सेंटर घोटाले की चल रही जांच के सिलसिले में की गई। जांच के दौरान मिली जानकारी और उसके बाद की गई फील्ड वेरिफिकेशन के आधार पर गहन तलाशी ली गई। इससे पता चला कि कुछ लोगों का एक ग्रुप, दूसरों के साथ मिलकर पटियाला और पुणे में कॉल सेंटर चला रहा था और उन्हें कंट्रोल कर रहा था।
तलाशी अभियान के दौरान तीन चालू कॉल सेंटर मिले। इनमें से दो पटियाला में और एक पुणे में है। तलाशी के समय इन कॉल सेंटरों में लगभग 220 लोग काम करते हुए पाए गए। उनकी पहचान, उन्हें दिए गए काम और रिपोर्टिंग स्ट्रक्चर का रिकॉर्ड रखा जा रहा है। उनकी पुष्टि की जा रही है। इन जगहों पर कई वर्कस्टेशन, क्यूबिकल, कंप्यूटर, हेडसेट, मोबाइल फ़ोन और नेटवर्किंग इक्विपमेंट लगे हुए थे। ये कॉल सेंटर अमेरिकी नागरिकों को कॉल करते थे और कथित तौर पर उन्हें झूठे बहाने बनाकर पेमेंट करने के लिए उकसाते थे।
तलाशी के दौरान पता चला कि पटियाला में चल रहे कॉल सेंटर अमेरिकी नागरिकों के साथ धोखाधड़ी और उनसे जबरन वसूली में शामिल थे। सेंटर चलाने वाले लोगों से मिले मोबाइल फोन और लैपटॉप में सिंडिकेट के काम करने के तरीके और पीड़ितों से ठगी करके कमाए गए पैसे के बंटवारे से जुड़ा डेटा मिला। इसी तरह, पुणे में चल रहे नकली कॉल सेंटर से भी ठगी का वही तरीका अपनाया जा रहा था।
चंडीगढ़ में जिस रिहायशी जगह की तलाशी ली गई, उसका इस्तेमाल मास्टरमाइंड पटियाला में चल रहे नकली कॉल सेंटरों को कोऑर्डिनेट और कंट्रोल करने के लिए कर रहा था। उस जगह पर कई डिजिटल डिवाइस मिले, जिनमें कॉल सेंटर के कामकाज से जुड़ा डेटा था। इन जगहों से एक व्यक्ति भी काम करते हुए मिला, जिस पर अमेरिकी डॉलर से भारतीय रुपये में पैसे बदलने का आरोप है। उसकी भूमिका और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच की जा रही है। तलाशी और ज़ब्ती की कार्रवाई के दौरान, बड़ी संख्या में डिजिटल डिवाइस (जिनमें 66 मोबाइल फ़ोन, 13 लैपटॉप, हार्ड डिस्क और अन्य कम्युनिकेशन उपकरण शामिल हैं) जब्त किए गए हैं। कैश और रिकॉर्ड भी जब्त किया गया है।
जांच में कॉलिंग कैंपेन, स्क्रिप्ट, डायलर और वीओआईपी-आधारित सिस्टम, पीड़ितों से जुड़ा डेटा, पेमेंट चैनल, ऑपरेशन को मैनेज और कंट्रोल करने वाले लोग और कथित गतिविधियों से मिले फंड के फ्लो जैसी चीज़ों की पड़ताल की जा रही है। बरामद किए गए मटीरियल और डिजिटल सबूतों की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि काम करने के पूरे तरीके का पता लगाया जा सके। इसमें शामिल सभी लोगों की पहचान की जा रही है। तलाशी ली गई जगहों के बीच संबंध स्थापित करने का प्रयास होगा। इन सबसे से अपराध की कमाई का पता लगाया जा सकेगा।