फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   ED Takes Major Action in Fake Government Office Real Estate Fraud Cases Attaches Assets Worth Over Rs 152+ Cr

Gujarat: फर्जी सरकारी दफ्तर और रियल एस्टेट धोखाधड़ी मामलों पर ED की बड़ी कार्रवाई, 152+ करोड़ की संपत्ति जब्त

Mon, 17 Aug 2026 11:55 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Mon, 17 Aug 2026 11:55 PM IST
सार

गुजरात में प्रवर्तन निदेशालय ने फर्जी सरकारी दफ्तर और रियल एस्टेट धोखाधड़ी से जुड़े दो मामलों में कुल 152.5 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की हैं। दाहोद में छह फर्जी सरकारी दफ्तर बनाकर 121 फर्जी कामों के नाम पर सरकारी धन लेने का आरोप है। अहमदाबाद में घर और दुकान दिलाने के नाम पर खरीदारों से ठगी की गई। आखिर कैसे हुआ करोड़ों का यह खेल और कहां गया पैसा? आइए, विस्तार से जानते हैं...

विज्ञापन
ED Takes Major Action in Fake Government Office Real Estate Fraud Cases Attaches Assets Worth Over Rs 152+ Cr
ईडी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गुजरात में प्रवर्तन निदेशालय ने दो अलग-अलग मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने फर्जी सरकारी दफ्तर चलाने और रियल एस्टेट धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में कुल 152.5 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की हैं। इसमें दाहोद के फर्जी सरकारी कार्यालय मामले में 22.7 करोड़ रुपये और अहमदाबाद के हाउसिंग फ्रॉड मामले में 129.8 करोड़ रुपये की संपत्तियां शामिल हैं। जांच में जमीन, म्यूचुअल फंड निवेश और बैंक खातों में जमा रकम को कार्रवाई के दायरे में लिया गया है।
विज्ञापन

दाहोद में छह फर्जी सरकारी दफ्तर कैसे बनाए गए?

दाहोद मामले में आरोप है कि आरोपियों ने सिंचाई और जल संसाधन विभाग के छह फर्जी सरकारी दफ्तर बनाए। इन दफ्तरों के जरिए सिंचाई से जुड़े काम कराने के नाम पर सरकार से करोड़ों रुपये के अनुदान हासिल किए गए। आरोपियों पर सरकारी अधिकारियों का रूप धारण करने, फर्जी मुहर और हस्ताक्षर बनाने तथा नकली दस्तावेज तैयार करने का आरोप है। जांच के मुताबिक, इन लोगों ने 121 फर्जी कामों की मंजूरी हासिल की और सरकारी धन को कथित तौर पर धोखाधड़ी से अपने कब्जे में लिया।
विज्ञापन

सरकारी पैसे को कहां लगाया गया?

जांच एजेंसी के अनुसार, फर्जी तरीके से हासिल की गई रकम को कई बैंक खातों के जटिल नेटवर्क के जरिए इधर-उधर किया गया। इसके बाद इस धन का इस्तेमाल जमीन खरीदने, निवेश करने और अन्य कामों में किया गया। ईडी ने आरोपी अबुबकर जकिराली सैयद, उसके परिवार और सहयोगियों से जुड़ी सात जमीनों, म्यूचुअल फंड निवेश और अलग-अलग बैंक खातों में मौजूद रकम को अटैच किया है। इन संपत्तियों की कुल कीमत 22.70 करोड़ रुपये बताई गई है। इस मामले में पूर्व आईएएस अधिकारी बीडी निनामा समेत कई आरोपियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

अहमदाबाद में घर-दुकान के नाम पर कैसे हुई ठगी?

दूसरा मामला अहमदाबाद के रियल एस्टेट कारोबार से जुड़ा है। ईडी ने नवरंगपुरा और बोपल थानों में दर्ज पांच एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी। एजेंसी के मुताबिक, आरोपी रोनक सोनानी, विपुल गंगानी और अन्य लोगों ने आम घर खरीदारों, छोटे निवेशकों, कारोबारियों और मध्यमवर्गीय परिवारों को निशाना बनाया। आरोप है कि इन लोगों ने फ्लैट और दुकानें आकर्षक शुरुआती कीमतों पर देने का भरोसा दिया और 54 से 100 प्रतिशत तक सुनिश्चित रिटर्न का वादा किया। इसके बाद खरीदारों से पैसा लिया गया, लेकिन कई परियोजनाओं को जरूरी मंजूरी नहीं मिली और वादे के मुताबिक फ्लैट या दुकानें नहीं दी गईं।

250 खरीदारों से जुड़े प्रोजेक्ट में क्या हुआ?

ईडी के मुताबिक, छारोड़ी परियोजना में करीब 250 खरीदारों और निवेशकों को कथित तौर पर यह बताया गया कि रेरा पंजीकरण और एनए अनुमति की प्रक्रिया चल रही है। बाद में परियोजना के लिए तय जमीन को दूसरे लोगों को बेचने या हस्तांतरित करने का आरोप सामने आया। जांच में यह भी दावा किया गया कि संपत्तियों को तीसरे पक्ष को दिखावटी बिक्री दस्तावेजों के जरिए हस्तांतरित किया गया। दस्तावेजों में ऐसी भुगतान जानकारी दर्ज की गई, जिससे लेनदेन वास्तविक और कानूनी दिखाई दे।

दोनों मामलों में पैसे के इस्तेमाल पर क्या सामने आया?

ईडी के मुताबिक, दोनों मामलों में कथित तौर पर धोखाधड़ी से हासिल रकम को अलग-अलग तरीकों से छिपाने और इस्तेमाल करने की कोशिश की गई। दाहोद मामले में सरकारी अनुदान की रकम को कई बैंक खातों के जरिए घुमाकर संपत्तियों और निवेश में लगाया गया। अहमदाबाद मामले में घर और दुकान के नाम पर जुटाए गए पैसे को कथित तौर पर दूसरी जगह भेजा गया और संपत्तियां छिपाने की कोशिश की गई। ईडी ने कुल 152.5 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अटैच कर जांच में आगे की कार्रवाई का रास्ता तैयार किया है।

बैंक खातों के इस्तेमाल को लेकर ईडी ने क्या चेतावनी दी?

दाहोद मामले की जांच के दौरान एजेंसी ने कथित तौर पर म्यूल बैंक खातों के इस्तेमाल की बात कही है। म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खाते होते हैं जिनका इस्तेमाल अपराध से हासिल रकम को रखने या एक जगह से दूसरी जगह भेजने के लिए किया जाता है। ईडी ने लोगों को चेतावनी दी है कि वे किसी दूसरे व्यक्ति को अपना बैंक खाता या बैंकिंग जानकारी इस्तेमाल करने की अनुमति न दें। संदिग्ध तरीके से बैंक खाता इस्तेमाल करने का अनुरोध मिलने पर तुरंत इसकी जानकारी देने की सलाह दी गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed